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Independence Day 2024 : ये एक्टर्स भी लड़ चुके हैं आजादी की जंग, किसी को मिली फांसी तो कोई रहा जेल में बंद
Independence Day 2024 : इस 15 अगस्त को भारत को आजाद हुए 77 साल पूरे हो चुके हैं। इस दिन हर उस शख्स को याद किया जाता है जिनकी वजह से देश को आजादी नसीब हुई। आजादी की लड़ाई में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने न सिर्फ देश के लिए जान न्यौछावर की बल्कि कई लोगों ने अंग्रेजों के जुल्म सहें।
आजादी की जंग लड़ने वाले कई शूरवीरों के बारे में तो हम जानते हैं और कुछ गुमानमी के जद में खो गए। इनमें कुछ ऐसे फिल्मी सितारे भी हैं, जो फ्रीडम फाइटर भी रहे हैं। अंग्रेजों की खिलाफत के लिए जेल भी गए और खूब जुल्म भी सहें। एक एक्टर को तो सजा ए मौत तक सुनाई जा चुकी थी।

नुजीर हुसैन
नजीर हुसैन न सिर्फ हिंदी फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी, बल्कि उन्होंने ही भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत की थी इस वजह से उन्हें 'भोजपुरी सिनेमा का पितामह' भी कहा जाता है। आपको बता दें कि नजीर हुसैन एक्टर बनने से पहले स्वतंत्रता सेनानी थे और सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का हिस्सा थे। अंग्रेजों की खिलाफत की वजह से उन्हें मौत की सजा मिली थी। और फिर कुछ समय बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया और जो भी स्वतंत्रता सेनानी बंदी बनाए गए थे, उन्हें छोड़ दिया गया।

दीना पाठक
दीना पाठक 40 और 50 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस रहीं और 80 के दशक तक फिल्मों में एक्टिव रहीं। दीना पाठक जब कॉलेज में थीं, तो उन्होंने आजादी की जंग में शामिल होने का निश्चय किया। दीना पाठक को बचपन से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी, और इसलिए वह इंडियन नेशनल थिएटर का हिस्सा बन गईं। उन दिनों देश में अंग्रेजी हुकूमत थी और आजादी की लड़ाई चल रही थी। दीना पाठक ने भी अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठा दी। वह अपने थिएटर के नाटकों के जरिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आम जनता को जागरूक करने लगी। यह देख दीना पाठक को कॉलेज से निकाल दिया गया। फिर भी वह नहीं हारी। दीना पाठक की दो बेटियां- रत्ना पाठक और सुप्रिया पाठक बॉलीवुड की नामी एक्ट्रेस में जानी जाती हैं।

एके हंगल
जब अंग्रेजों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को पकड़ लिया था, तो उन्हें छुड़वाने के लिए मर्सी पिटीशन दायर की गई, और उस पर देशभर के लोगों ने साइन किए थे। उस पर एके हंगल ने भी साइन किए थे। साल 1946 में एके हंगल परिवार के साथ पेशावर से कराची चले गए और वहां भी उन्होंने आजादी की लड़ाई में भाग लिया। लेकिन जब 1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो उस दौरान अंग्रेजों ने एके हंगल को पकड़ लिया और जेल में डाल दिया। वह दो साल तक जेल में रहे, जहां खूब यातनाएं सहीं। लेकिन जब 2 साल बाद जेल से बाहर आए, तो वो जेल में 20 रुपये लेकर भारत आ गए।

सुबोध मुखर्जी
सुबोध मुखर्जी एक जाने-माने फिल्ममेकर थे। उन्हें सिनेमा का 'वट वृक्ष' कहा जाता था। शम्मी कपूर और देव आनंद को स्टार बनाने का क्रेडिट सुबोध मुखर्जी को दिया जाता है। 'शागिर्द', 'तीसरी आंख', 'जंगली' और 'मुनीम जी' जैसी फिल्में बनाने वाले सुबोध मुखर्जी भी आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। सुबोध मुखर्जी टेनिस में अपना करियर बनाना चाहते थे और इसीलिए वह जन्म स्थान झांसी से निकलकर लखनऊ चले गए। लेकिन यहां जब वह आजादी की लड़ाई लड़ रहे लोगों से मिले और उनके साथ उठना-बैठना शुरू हुआ, तो इरादा बदल गया। वह स्वतंत्रता सेनानी बन गए। साल 1942 में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके कारण उन्हें जेल भेज दिया गया, और टॉर्चर किया गया। बाद में इन्हें रिहा कर दिया और फिर उन्होंने बड़े भाई शशधर मुखर्जी के पास जाकर फिल्में बनाना शुरू कर दिया।

टीपी राजलक्ष्मी
एक्ट्रेस टीपी राजलक्ष्मी यह साउथ की पहली महिला डायरेक्टर थी। टीपी राजलक्ष्मी हीरोइन बनने से पहले स्वतंत्रता सेनानी रहीं, और कई बार जेल भी गईं। टीपी राजलक्ष्मी नाटकों में भाग लेकर अंग्रेजों के खिलाफ बोलतीं थी। वह गानों के जरिए भी अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए लोगों को प्रेरित करती थी। राजलक्ष्मी का बढ़ता रौब देख अंग्रेजी ने उन्हें जेल भेज दिया। टीपी राजलक्ष्मी को बार-बार जेल भेजा जाता, और हर बार उनके नाटकों के साथी उन्हें छुड़ा लाते।



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