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न पूजा, न प्रसाद… यहां बाबा को चढ़ती है सिगरेट, जानिए भूतनाथ मंदिर की रहस्यमयी परंपरा
Bhootnath Temple : भारत विविध धर्मों और आस्थाओं का देश है, जहां हर मंदिर की अपनी एक खास मान्यता और पूजा की परंपरा होती है। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर है मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के पास रंगवासा गांव में स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर। यह मंदिर अपने खास चढ़ावे के लिए चर्चा में रहता है, यहां भक्त भगवान को अगरबत्ती या धूपबत्ती नहीं, बल्कि जलती हुई सिगरेट चढ़ाते हैं। जी, हां आपने सही सुना
इस मंदिर में भक्त अपनी अर्जी लगवाने के लिए पहले भगवान को सिगरेट पिलाता है, फिर अपनी फरियाद पर मंजूरी का ठप्पा लगवाता है, आइए जानते हैं कि कहां हैं ये अनोखा मंदिर और इससे जुडे चमत्कार-

रंगवासा में स्थित 200 साल पुराना मंदिर
यह मंदिर इंदौर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर राऊ के पास रंगवासा गांव में स्थित है। यह करीब 200 साल पुराना मंदिर है और इसकी देखभाल गांव के स्थानीय भक्तों द्वारा की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान भूतनाथ महाकाल की एक लेटती हुई स्वयंभू प्रतिमा है, जो बेहद प्राचीन मानी जाती है। यह प्रतिमा भक्तों के लिए चमत्कारी और सिद्ध मानी जाती है।
सिगरेट चढ़ाने की अनोखी परंपरा
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां भक्त भगवान को अगरबत्ती या धूपबत्ती की जगह जलती हुई सिगरेट अर्पित करते हैं। हर रविवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार में सिगरेट के साथ पहुंचते हैं। भक्त सिगरेट जलाकर उसे मंदिर परिसर के एक यज्ञ कुंड में अर्पित करते हैं। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
चमत्कारों पर अटूट विश्वास
भूतनाथ महाराज भक्त मंडली के अंकित पाटीदार बताते हैं कि बाबा भूतनाथ का यह मंदिर इतना सिद्ध है कि आस्था और विश्वास से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यहां विशेष रूप से वे लोग आते हैं जो निसंतान होते हैं, या किसी गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या मानसिक रोग से पीड़ित होते हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर प्रसाद के रूप में 21 या 11 बार मूर्ति से पानी उतारकर दिया जाता है, जिसे बाद में भक्तों के बीच बांटा जाता है।
आस्था की मिसाल
"यह ऐसा पहला मंदिर है जहां भगवान को सिगरेट का भोग लगाया जाता है।" उनके अनुसार, यहां की मान्यता और परंपरा ने उन्हें आस्था के साथ खींचकर लाया है। बाबा भूतनाथ मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह मानव आस्था और परंपराओं की विविधता का जीवंत उदाहरण है। सिगरेट जैसा पदार्थ, जिसे आमतौर पर बुराई के रूप में देखा जाता है, यहां आस्था का माध्यम बन गया है। यह दिखाता है कि विश्वास और श्रद्धा के आगे सब कुछ स्वीकार्य हो सकता है। चाहे परंपरा कितनी भी अनोखी क्यों न हो, जब उसे सच्चे दिल से निभाया जाए, तो वह आस्था का प्रतीक बन जाती है।



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