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Budget 2024: सेक्स पर टैक्स... रेवेन्यू के नाम पर कैसे-कैसे टैक्स लगाकर कमाई करते है अलग-अलग देश
Top 10 weirdest tax rules around the world : आज आम बजट पेश हो रहा है और सबको खासकर नौकरीपेशा लोगों को हर बार की तरह इस बार भी टैक्स कटौती की उम्मीद है। पर इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां सरकारों ने अजीबोगरीब टैक्स लगाया है। आज भी ऐसे कई टैक्स हैं जो समझ से परे हैं।
आज हम आपको बताने जा रहे दुनिया के उन 10 अजीबोगरीब टैक्स के बारे में जिन्हें जानकर आपका भी माथा चकरा जाएगा। सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि इन पर टैक्स वसूला जाता है...

सेक्स पर टैक्स
भले ही देह व्यापार जर्मनी में लीगल है, लेकिन इसके लिए यहां देह व्यापार जैसे कानून बनाए गए हैं। 2004 में आए इस टैक्स कानून के तहत हर प्रॉस्टिट्यूट को शहर को 150 यूरो हर महीने देने पड़ते हैं। पार्ट टाइमर को अपने हर दिन के काम के लिए 6 यूरो चुकाने पड़ते हैं। इस देह व्यापार टैक्स की बदौलत यहां 1 मिलियन यूरो वार्षिक की आमदनी होती है।
ताश के पत्ते खरीदने पर टैक्स
अमेरिका के अलबामा में लोगों को ताश के पत्ते खरीदने या बेचने के लिए भी टैक्स देना पड़ता है। खरीदने वाले को 10 फीसदी प्रति 'ताश की गड्डी', जबकि बेचने वाले को 71 रुपये फीस के साथ ही 213 रुपये वार्षिक लाइसेंस के लिए चुकाने पड़ते हैं। हालांकि यह टैक्स सिर्फ ताश के 54 पत्ते या उससे कम खरीदने वालों पर लागू होता है।
आइस पर टैक्स
अमेरिका के एरिजोना में बर्फ का टुकड़ा (आइस ब्लॉक) खरीदने पर भी लोगों को टैक्स देना पड़ता है। हालांकि अगर लोग आइस क्यूब खरीदें तो उसके लिए कोई टैक्स नहीं है।
पेट पालने के टैक्स
साल 2017 के अंत में पंजाब सरकार ने अलग-अलग पालतू जानवरों के मालिकों पर टैक्स लगाने का ऐलान किया। करों (Taxes) की दो श्रेणियां रखी गई हैं: पहला, कुत्ते, बिल्ली, भेड़, सुअर और हिरण के मालिकों से 250 रुपये प्रति वर्ष शुल्क लिया जाएगा। दूसरा, हाथी, गाय, ऊंट, घोड़ा, भैंस और बैल के लिए 500 रुपये प्रति वर्ष शुल्क लिया जाएगा।
टॉयलेट में फ्लश करने के लिए भी टैक्स
क्या आपने कभी ये बात सोचा भी होगा कि आपको टॉयलेट में फ्लश करने के लिए भी टैक्स चुकाना पड़ सकता है? अमेरिका के मैरीलैंड में कुछ ऐसा ही होता है। यहां की सरकार टॉयलेट फ्लश के उपयोग पर लोगों से प्रति महीने करीब 355 रुपये टैक्स वसूलती है। हालांकि इन पैसों को नालों की साफ-सफाई पर खर्च किया जाता है।
खिड़कियों पर टैक्स
इंग्लैंड और वेल्स के किंग विलियम्स तृतीय ने साल 1696 में खिड़कियों पर टैक्स लगा दिया था। खिड़कियों पर टैक्स भी उसकी संख्या के हिसाब से देना पड़ता था। जिन लोगों के घरों में 10 से ज्यादा खिड़कियां होती थीं, वे 10 शिलिंग तक टैक्स भरते थे। 1851 में इस टैक्स को खत्म किया गया था। संख्या को कम करने के लिए कई घरों ने अपनी खिड़कियों पर ईंटें लगा लीं जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं। 156 वर्षों के बाद इसे 1851 में निरस्त कर दिया गया था।
ब्रेस्ट टैक्स
क्या कभी आपने ब्रेस्ट टैक्स के बारे में सुना है? इतिहास में ऐसा भी हुआ है। टैक्स कलेक्टर्स ब्रेस्ट माप कर उसी के अनुसार टैक्स वसूलते थे, जिससे परेशान होकर एक युवती ने अपना ब्रेस्ट काटकर टैक्स कलेक्टर के हाथ में ही दे दिया था।
बैचलर टैक्स
इतिहास में ऐसे कई उदाहरण भरे पड़े हैं। जूलियस सीज़र ने इंग्लैंड में 1695 में, पीटर द ग्रेट ने बैचलर टैक्स को 1702 में लागू किया। मुसोलिनी ने भी सन् 1924 में 21 वर्ष से लेकर 50 वर्ष की आयु के बीच अविवाहित पुरुषों पर बैचलर टैक्स लगाया। इन बैचलर्स को बिना कपड़ों के बाजार में अपना ही मजाक उड़ाते हुए घूमना पड़ता था।
टैटू टैक्स
ऑरकैंसस में अगर कोई टैटू, बॉडी पियर्सिंग या इलेक्ट्रोलीसिस ट्रीटमेंट करवाता है तो उसे स्टेट को सेल्स टैक्स के तहत 6% टैक्स देना होता है।
यूरिन टैक्स
रोम के राजा वेस्पेशन ने पब्लिक यूरिनल पर टैक्स की व्यवस्था की। इतना ही नहीं इंडस्ट्री में यूज के लिए यूरिन की सेल से भी रेवेन्यू कलेक्ट करने की व्यवस्था की गई थी। जब उनके बेटे टाइटस ने इस पॉलिसी पर सवाल उठाया तो वेस्पेशन ने उसके नाक पर एक सिक्का लगा दिया और उससे कहा, 'Money doesn't stink - पैसों से दुर्गंध नहीं आती।'
खाने में फैट की मात्रा के हिसाब से टैक्स!
यह सुनकर आपको थोड़ा अजीब तो लगेगा, लेकिन है यह सच है डेनमार्क और हंगरी जैसे देशों ने चीज, बटर और पेस्ट्री जैसे हाई कैलरीज फूड पर फैट टैक्स लगता है। इसके दायरे में वे सभी चीजें आती हैं, जिनमें 2.3 परसेंट से ज्यादा सेचुरेटेड फैट है। इसका मकसद लोगों को मोटापे और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं से बचाना है। कई अन्य देश भी इस बारे में सोच रहे हैं।
भारत के केरल राज्य में भी जंक फूड टैक्स के रूप में फैट टैक्स लगाया जा चुका है। लोगों में मोटापे की समस्या को कंट्रोल करने के लिए साल 2016 में केरल सरकार की ओर से रेस्त्रां में बर्गर, पिज्जा और पास्ता जैसी चीजों पर 14.5 पर्सेंट का फैट टैक्स लगाया था। भारत में फैट टैक्स लगाने वाला केरल पहला राज्य था। उस दौरान इस टैक्स का काफी विरोध भी हुआ था।



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