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Jagannath rath yatra 2024 : पुरी में 12 साल में एक बार क्यों होता है ब्लैकआउट? भगवान कृष्ण से जुड़ी है वजह
Jagannath rath yatra 2024 :उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 7 जून से शुरू होगी। रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के साथ तीन अलग-अलग रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।
जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की काठ यानी लकड़ी से निर्मित मूर्तियां विराजमान हैं। इन मूर्तियों को हर 12 साल में बदलने की परंपरा है। और जब भी मूर्ति बदलने की यह परंपरा होती है तो इस दौरान पूरे शहर की बिजली कटौती कर दी जाती है। ताकि इस प्रक्रिया को पूरी तरह से गोपनीय रखा जा सके।

सिर्फ पुजारी ही मंदिर में जा सकता है
इस प्रक्रिया के दौरान पूरी सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के पास होता है। एक बार अंधेरा होने के बाद कोई मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है। मूर्तियों को बदलने के लिए सिर्फ एक पुजारी को प्रवेश करने की अनुमति होती है। उस पुजारी के हाथों में दस्ताने पहनाए जाते हैं और आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है। ताकि पुजारी भी मूर्तियों को बदलते हुए देख ना सकें। पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति को बदलते एक महत्वपूर्ण चीज़ को बदला जाता है, जिसे ब्रह्म पदार्थ कहते हैं।
मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी देह का त्याग किया, तो उनके अंतिम संस्कार के दौरान दिल छोड़कर बाकी शरीर पंच तत्व में विलीन हो गया। दिल उनका ज़िंदा रहा और मान्यता है कि श्रीकृष्ण का दिल ही ब्रह्म पदार्थ है। यह दिल भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर आज भी धड़कता है। यदि इसे दूसरी मूर्ति में रखने के दौरान पुजारी ने ब्रह्म पदार्थ को देख लिया, तो कुछ अनिष्ट होने की आशंका रहती है।
क्यों 12 साल में बदली जाती है मूर्तियां?
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को हर 12 साल में बदलने का रिवाज है, इस प्रथा को नवकलेबारा नाम दिया जाता है।
जगन्नाथ जी की मूर्तियां नीम की लकड़ी की बनी हुई हैं और उनके क्षय होने का डर रहता है इसलिए इन्हें 12 साल में बदला जाता है। नवकलेबारा को देवताओं की ऊर्जा को नवीनीकृत करने का एक तरीका माना जाता है।
- भक्त भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को निर्जीव नहीं हैं, बल्कि जीवित प्राणी मानते हैं और उनकी देखभाल भी वैसे ही की जाती है।



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