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Japan Earthquake : जापान में 90 मिनट में 21 बार आया भूकंप, जानें क्यों कहते हैं सबसे ज्यादा भूकंप वाला देश?
नए साल पर जापान के मध्य और तटीय क्षेत्र में 90 मिनट के भीतर 4.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए। इनमें से एक की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.6 की मापी गई है। इसके कारण समुद्र में 5 मीटर ऊँची लहरें उठने और सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है।

इस भूकंप ने फिर से 2011 के दर्द को ताजा कर दिया है। उस समय सुनामी की चपेट में आने से 15,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 2,000 से ज्यादा लोग आज भी लापता सूची में शामिल है। आइए जानते हैं उस दिन क्या हुआ था और क्यों जापान में इतने भूकंप आते हैं?
क्यों आता है भूकंप?
दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहते हैं। जानकारी के अनुसार, पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है। जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। इस जगह पर सबसे ज्यादा भूकंप का असर रहता है। हालांकि, भूकंप की तीव्रता अगर ज्यादा होती है तो इसके झटके काफी दूर तक महसूस किए जाते हैं।
जापान में हर साल आते हैं 1 हजार भूकंप
छोटे-बड़े सभी भूकंपों की बात करें तो हर साल जापान में तकरीबन एक हजार भूकंप आते हैं, इनमें से सिर्फ एक या दो ऐसे होते हैं जो तीव्र होते हैं, हालांकि नए साल के पहले दिन जापान में जो भूकंप आया वो 7.6 मैग्नीट्यूड का था। यह बहुत ही खतरनाक माना जाता है। यदि नेशनल भूकंप सेंटर के आंकड़ों की मानें तो हर साल दुनिया में तकरीबन 20 हजार भूकंप आते हैं, इनमें से 100 ऐसे होते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें से 1 या दो तबाही लाने वाले हो सकते हैं।

जापान रिंग ऑफ फायर
जापान रिंग ऑफ फायर पर बसा है, यह प्रशांत महासागर का इलाका है, जिसे प्रशांत रिम या पैसिफिक बेल्ट भी कहते हैं। यह वो इलाका है जहां सबसे ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 75 प्रतिशत ज्वालामुखी रिंग ऑफ फायर इलाके में ही स्थित हैं। यह इलाका जुआन डे, कोकोसा, नाजका, उत्तरी अमेरिकी और फिलीपीन सहित 40 हजार किमी तक फैला हुआ है। अलेक्ज़ेंडर पी. लिविंगस्टन ने 1906 में लिखी पुस्तक में सबसे पहले प्रशांत महासागर के इस क्षेत्र को रिंग ऑफ फायर के तौर पर संदर्भित किया था। इसके बाद 1960 के दशक में टेक्टोनिक सिद्धांत के तौर पर इसके बारे में जानकारी दी गई।
जापान ही नहीं ये देश भी हैं जद में
रिंग ऑफ फायर में आने वाले भूकंप की जद में अकेले जापान ही नहीं है, बल्कि रूस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, फिलीपींस, मैक्सिको, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली बोलिविया भी भूकंप की जद में हैं। पिछले दिनों इंडानेशिया में भी इसी तरह के भूकंप ने तबाही मचाई थी।
टेक्टोनिक प्लेटों क्या है?
यदि भौगोलिक स्थिति की बात करें तो रिंग ऑफ फायर का इलाका दो टेक्टोनिक प्लेटों का जंक्शन है। इन्हीं प्लेटों के टकराने से भूकंप की उत्पत्ति होती है। यही वजह है कि रिंग ऑफ फायर में ही दुनिया के 90 प्रतिशत भूकंप आता है। टेक्टोनिक प्लेट को लिथोस्फेरिक प्लेट भी कहते हैं। यह एक तरह से चट्टान का स्लैब होता है जो महाद्वीपीप लिथोस्फीयर से बना होता है। यह क्रस्ट और ऊपरी मेंटल से तैयार होता है। जिसकी चौड़ाई 5 से 200 किमी तक हो सकती है। 1967 में सबसे पहले इन्हें टेक्टोनिक प्लेट का नाम दिया गया। यह महाद्वीप और महासागरीय दोनों तरह की हो सकती हैं।
भूंकप और सुनामी से क्या है संबंध
रिंग ऑफ फायर टेक्टोनिक प्लेटों का जंक्शन है, इसीलिए यहां प्लेटों में घर्षण की संभावना ज्यादा रहती है। इसीलिए यहां आने वाला भूकंप तीव्र होता जा है। जब धरती के कोर से कोई ऊर्जा निकलती है तो उससे टेक्टोनिक प्लेटें हिलने को मजबूर हो जाती हैं। टेक्नोटोनिक प्लेटों से निकली ऊर्जा जब तक मुक्त नहीं होती तब तक भूकंप बना रहता है। यदि इसका केंद्र समुद्र में हो तो विनाशकारी सुनामी आता है। जानकर हैरानी होगी कि ये टेक्टोनिक प्लेट हर साल कुछ सेकेंड ही बढ़ती हैं, लेकिन जब भूकंप आता है तो ये कई मीटर तक बढ़ जाती हैं।
13 साल पहले भूंकप और सुनामी ने मचाई थी जापान में तबाही
11 मार्च 2011 को जापान के पूर्वी प्रायद्वीप ओशिका से 70 किलोमीटर दूर भूकंप के जोरदार झटके महसूस हुए, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9 मापी गई थी। इसके करीब 20 मिनट बाद ही सुनामी की लहरें उठीं और उत्तर के होककाइदो व दक्षिण के ओकीनावा द्वीप से टकराईं। सुनामी की लहरें 10 मीटर की ऊंचाई तक उठी थीं। भूकंप के बाद हर तरफ तबाही का मंजर था। 70 फीसदी इलाका पानी में डूब गया था। सुनामी की लहरों के कारण हुए शॉर्ट सर्किट ने हालात और खराब कर दिए थे। इतना ही नहीं, सुनामी की तेज लहरें फुकुशिमा दाइची परमाणु बिजली संयंत्र में भी घुस गईं। परमाणु संयंत्र में समुद्र का खारा पानी घुसने से रिएक्टर पिघलने लगे। संयंत्र से भारी मात्रा में रेडियोधर्मी तत्व लीक हुए। सके बाद जापान ने अपने सभी परमाणु बिजली घर 3 साल के लिए बंद कर दिए थे। इस तबाही में 2.28 लाख लोग बेघर हो गए थे। उस समय सुनामी की चपेट में आने से 15,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 2,000 से ज्यादा लोग आज भी लापता सूची में शामिल है।



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