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झारखंड का ऐसा गांव, जहां महिलाएं लाठियों के नोंक पर मर्दों को रखती है काबू, PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
Jharkhand's Unique Alcohol-Free Village : भारत के कई गांव आज भी नशे की समस्या से जूझ रहे हैं। शराब और तंबाकू जैसी बुरी लत न केवल परिवार को तोड़ देती है बल्कि समाज की जड़ों को भी खोखला कर देती है। लेकिन झारखंड की राजधानी रांची से करीब 25 किलोमीटर दूर बसे आरा केरम गांव की कहानी इससे बिल्कुल अलग है।
यहां की महिलाओं ने एकजुट होकर ऐसा कदम उठाया कि पूरा गांव शराब और नशे की गिरफ्त से बाहर निकल आया।

शराब की समस्या से जूझता था गांव
करीब तीन साल पहले इस गांव का हाल बेहद खराब था। यहां लगभग हर घर का पुरुष शराब पीने का आदी था। महिलाएं दिन-रात परेशान रहती थीं, क्योंकि पति शराब पीकर घर आते थे, परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभाते थे और आए दिन कलह-झगड़े होते रहते थे। महिलाओं को यह महसूस हुआ कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गया, तो आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित होगी।
महिलाओं का एकजुट होना
गांव की महिलाएं बताती हैं कि यह समस्या हर घर में समान थी, तो उन्होंने सभी महिलाओं को इकट्ठा कर एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप का मकसद सिर्फ इतना था कि शराब जैसी बुरी आदत को गांव से जड़ से खत्म करना है। शुरुआत में यह महिलाओं का संघर्ष आसान नहीं था।
शराब बनाने और बेचने पर रोक
महिलाओं ने सबसे पहले उन जगहों को निशाना बनाया जहां से शराब गांव तक पहुंचती थी। वे दूसरे गांव जाने लगीं और वहां शराब बनवाने और बेचने पर रोक लगवाई। धीरे-धीरे गांव में शराब की उपलब्धता कम हो गई। अब पुरुषों को शहर जाना पड़ता था, लेकिन जब वे वहां से शराब पीकर लौटते, तो उनका सामना महिलाओं के गुस्से से होता।
लाठियों से सबक सिखाया
महिलाओं ने एक सख्त नियम बना दिया कि जो भी पुरुष शराब पीकर गांव आएगा, उसे लाठी-डंडों से पीटा जाएगा। यह तरीका सुनने में कठोर लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर दिखने लगा। पुरुषों को डर लगने लगा और उन्होंने शराब पीना कम कर दिया।

समझाने का भी रास्ता अपनाया
महिलाओं ने केवल सख्ती नहीं दिखाई, बल्कि पुरुषों को बैठाकर समझाया भी। उन्होंने बताया कि जितना पैसा वे शराब और तंबाकू पर खर्च करते हैं, उतना अगर घर की जरूरतों पर लगाएं, तो बच्चों की पढ़ाई हो सकती है और परिवार पोषक भोजन खा सकता है। महिलाओं ने यह भी समझाया कि शराब और नशे से बीमारियां बढ़ती हैं, जबकि दूध-दही और सब्जियां खाने से स्वास्थ्य बेहतर होता है।
नशामुक्ति के बाद गांव की तस्वीर
आज आलम यह है कि आरा केरम गांव पूरी तरह नशामुक्त हो चुका है। यहां का कोई भी व्यक्ति शराब नहीं पीता। हर पुरुष खेती-बाड़ी करता है और परिवार की जिम्मेदारी निभाता है। बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं और शिक्षा के महत्व को समझते हैं। महिलाएं भी गांव के कामों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं।
पीएम मोदी ने की तारीफ
आरा केरम गांव की इस अनोखी पहल की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कार्यक्रम "मन की बात" में की। उन्होंने महिलाओं की इस पहल को सराहा और कहा कि इस तरह की मुहिम पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
आज आरा केरम गांव आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुका है। यहां नशा छोड़ चुके लोग खेती-बाड़ी पर ध्यान दे रहे हैं, परिवार की खुशहाली बढ़ रही है और बच्चे शिक्षा की ओर आगे बढ़ रहे हैं। महिलाओं की यह मुहिम दिखाती है कि यदि समाज की आधी आबादी एकजुट हो जाए, तो किसी भी बुराई को खत्म करना मुश्किल नहीं है।



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