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कांवड़ यात्रा के दौरान इन चीजों से रहें दूर वरना होगा पाप! जानें किन नियमों का करें पालन
Kanwar Yatra Ke Niyam: सावन का पावन महीना आते ही भोलेनाथ के भक्तों में एक नई ऊर्जा भर जाती है। हर ओर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष गूंजने लगते हैं। इसी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है कांवड़ यात्रा, जिसमें लाखों श्रद्धालु नंगे पांव गंगाजल लाने के लिए कठिन यात्रा करते हैं। लेकिन यह यात्रा सिर्फ शारीरिक तपस्या नहीं, बल्कि आत्मिक अनुशासन का भी प्रतीक है। यह एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है, न कि एक पिकनिक। इसलिए इसका पालन श्रद्धा, नियम और संयम से करें।
भोलेनाथ का आशीर्वाद उन्हीं को मिलता है, जो मन, वचन और कर्म से पवित्र रहते हैं। अगर आपने भी कांवड़ यात्रा पर जाने का संकल्प लिया है, तो आपको कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। इन नियमों का उल्लंघन न केवल यात्रा को व्यर्थ करता है, बल्कि पाप का कारण भी बन सकता है। आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

1. कांवड़ को जमीन पर न रखें
अगर आप पहली बार कांवड़ यात्रा करने जा रहे हैं तो इस सबसे अहम नियम का पालन करें कि गंगाजल से भरी कांवड़ को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए यात्रियों को विशेष स्टैंड या सहारा देना चाहिए।
2. नंगे पैर करें कावंड़ यात्रा
कांवड़ यात्रियों के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। एक अहम नियम ये है कि कांवड़ियों को नंगे पांव चलना चाहिए। माना जाता है कि नंगे पांव धार्मिक यात्रा पर जाना एक तपस्या होती है जो श्रद्धा का प्रतीक होता है।

3. शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें
कांवड़ यात्रा के दौरान मांस, मछली, अंडा, लहसुन-प्याज और शराब जैसी तामसिक चीजों से दूर रहें। केवल शुद्ध शाकाहारी और सात्विक भोजन ही लें। इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर सामर्थ्य है तो भंडारों में भोजन करने के बाद कुछ न कुछ दान जरूर करें।
4. यात्रा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें
कांवड़ यात्रा के दौरान हर किसी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संयम रखना अनिवार्य होता है। ये इस यात्रा का मूल है, ऐसे में ब्रह्मचर्य का पालन पूरी श्रद्धा से करें।

5. कांवड़ में गंगाजल बराबरी से रखना
कांवड़ का मतलब होता है कि हरिद्वार और गोमूख आदि से गंगाजल लेकर आना और उससे भोले बाबा का अभिषेक करना। अगर आप भी कांवड़ लेने जा रहे हैं तो इस दौरान दोनों पोटली/बर्तन जो बाएं और दाएं में गंगाजल से भरे होते हैं में बराबर मात्रा में गंगाजल होना चाहिए।



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