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जब दिलीप कुमार ने फोन पर लताड़ा था नवाज शरीफ को... जानिए कारगिल युद्ध से जुड़े ऐसे ही दिलचस्प किस्से
Kargil Vijay Diwas 2023: कारगिल युद्ध मई-जुलाई 1999 के बीच जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर लड़ा गया था जिसमें भारत को जीत मिली थी। 55 दिनों तक चले इस युद्ध के दौरान हमारे सैनिकों की अदम्य साहस के वजह से दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
इस युद्ध में अपनी वीरता का परिचय देते हुए कई सैकड़ों सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसलिए यह दिन कारगिल युद्ध के शहीदों को समर्पित है। हर साल 26 जुलाई को ये दिन मनाया जाता है। इस साल कारगिल विजय दिवस की 24वीं वर्षगांठ है। आइए जानते हैं, इस युद्ध से जुड़े दिलचस्पों बातों को जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे।

एक चरवाहे ने दी थी सूचना
कारगिल भारतीय राज्य लद्दाख का एक सीमावर्ती क्षेत्र है। यहां की कुछ क्षेत्र और पहाड़ियों पर पाकिस्तानी फौज ने घुसपैठ करके कब्जा कर चौकिया बना रखी थी। जहां पर प्रशिक्षित आतंकवादियों के साथ फौज भी जमा थी।
कारगिल में इस घुसपैठ की सबसे पहले जानकारी ताशी नामग्याल नामक स्थानीय चरवाहे ने दी थी। जो कारगिल के बाल्टिक सेक्टर में अपने याक की खोजबीन में गया था। इस सूचना के मिलने के बाद भारतीय सेना हरकत में आई थी।
जब दिलीप कुमार ने नवाज शरीफ को लताड़ा
कारगिल युद्ध के दौरान भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन मिलाकर खूब खरी-खटी सुनाई थी, जिसके जवाब में नवाज शरीफ ने कहा था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह परवेज मुशर्रफ (तब पाकिस्तानी सेना के प्रमुख थे) से बात करके फिर फोन करेंगे।
तब अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ से कहा था कि आप एक साहब से बात करें जो मेरे बगल में बैठे हुए हैं। नवाज शरीफ उस वक्त सकते में आ गए क्योंकि फोन पर अगली आवाज मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार थी। दिलीप कुमार ने उनसे कहा, " मियां साहब, हमें आपसे इसकी उम्मीद नहीं थी क्योंकि आपने हमेशा भारत और पाकिसतान के बीच अमन की बात की है।

अमेरिका ने हस्तक्षेप के लिए कर दिया था मना
कारगिल युद्ध के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया था जब भारतीय सेना से बुरी तरह डर चुके पाकिस्तान ने अमेरिका से हस्तक्षेप करने के लिए कहा, लेकिन तब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने उनके अनुरोध को अस्वीकार कर पाकिस्तान से साफ तौर पर कह दिया कि इस्लामाबाद को नियंत्रण रेखा से अपने सैनिकों को वापस बुला लेना चाहिए।

जब रवीना टंडन के नाम के साथ पाकिस्तान पर दागी गई मिसाइल
युद्ध के दौरान बमबारी के दौरान भारतीय सैनिकों ने कुछ मिसाइल के ऊपर 'रवीना टंडन की तरफ से नवाज शरीफ के लिए' लिख कर दिल बनाकर इन बमों को युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किया था। जब इन बमों की फोटोज अखबारों में सामने आई तो जनता ने भारतीय जवानों के इस कदम की खूब सराहना की। दरअसल, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक बार एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि रवीना टंडन उनकी पसंदीदा एक्ट्रेस हैं। इस खुलासे के कुछ साल बाद 1999 में कारगिल युद्ध हुआ।
बोफोर्स तोपों ने दुश्मनों के दांत कर दिए थे खट्टे
बोफोर्स तोप कारगिल युद्ध में भारत की जीत का सबसे अहम हथियार बनी। इस तोप के खरीददारी पर देशभर में खूब विवाद हुआ था, लेकिन ये कारगिल में बहुत काम आई। बोफोर्स तोपें 27 किलोमीटर की दूरी तक गोले दाग सकती हैं। बोफोर्स तोप की गिनती दुनिया के सबसे घातक तोपों में होती है। हल्के वजन के कारण इसे युद्धभूमि में कही भी तैनात करना और यहां-वहां ले जाना बहुत आसान होता था।
कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपों ने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए। तोप की सबसे बड़ी खासियत इसे -3 डिग्री से लेकर 70 डिग्री के ऊंचे कोण तक फायर करने की है। इस खासियत थी कि यह तोप कारगिल और सियाचिन जैसी ऊंची पहाड़ी इलाकों में बहुत उपयोगी साबित हुआ।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ज्यादा रॉकेट और बमों का हुआ था इस्तेमाल
इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बमों का प्रयोग किया गया था। करीब दो लाख पचास हजार गोले, बम और रॉकेट दागे गए। लगभग 5000 तोपखाने के गोले, मोर्टार बम और रॉकेट 300 बंदूकें, मोर्टार और एमबीआरएल से प्रतिदिन दागे जाते थे, जबकि 9000 गोले उस दिन दागे गए थे जिस दिन टाइगर हिल को वापस लाया गया था। ऐसा कहा जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह एकमात्र युद्ध था जिसमें दुश्मन सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी। अंत में, भारत ने एक जीत हासिल की।
कई बॉलीवुड फिल्में बन चुकी है
बॉलीवुड में कारगिल युद्ध को लेकर कई फिल्में बन चुकी है। जैसे एलओसी : कारगिल (2003), धूप (2003),स्टम्प्ड (2003) लक्ष्य (2004), टैंगो चार्ली (2005), मौसम (2011) और शेरशाह (2021) आदि।



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