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तमिलनाडू के गांव में किन्नर करते है इस देवता से शादी फिर हो जाते है विधवा, जानिए क्यूं?
तमिलनाडु के विल्लूपुरम जिले के कूवागम गांव में हजारों किन्नर इरावन देवता की दुल्हन के रूप में शादी समारोह में शिरकत करती हैं और मंदिर के पुजारी ने उनकी गर्दन में कलावा बांधवाती हैं।
वर्तमान में दक्षिणी में किन्नरों द्वारा इरावन की पूजा की जाती है। वर्ष में एक दिन ऐसा भी आता जब किन्नर विवाहित महिलाओं की तरह सजकर इरावन से शादी करती है। पौराणिक मान्यता अनुसार भगवान कृष्ण ने औरत का रूप धारण कर नाग राजकुमार इरावन से शादी की थी। तमिलनाडु के विल्लूपुरम जिले के कूवागम गांव में इरावन की पूजा कूथांदवार के रूप में होती है।
हजारों किन्नर इरावन की दुल्हन के रूप में शादी समारोह में शिरकत करती हैं और मंदिर के पुजारी ने उनकी गर्दन में कलावा बांधवाती हैं। 18 दिन तक चलने वाले इस समारोह में ये किन्नर इरावन की मुत्यु के बाद विलाप भी करती हैं। आइए जानते है महाभारत के इस ऐतिहासिक पात्र के बारे में कैसे किन्नरों से इनका नाता जुड़ गया। -

जीत के लिए इरावन ने दी थी बलि
मान्यता अनुसार महाभारत युद्ध में एक समय ऐसा आता है जब पांडवों को अपनी जीत के लिए मां काली के चरणों में स्वेच्छिक रूप से किसी पुरुष की बलि हेतु एक राजकुमार की जरूरत पड़ती है। जब कोई भी राजकुमार आगे नहीं आता है तो इरावन खुद को इसके लिए प्रस्तुत कर देता है, लेकिन वह इसके साथ ही एक शर्त भी रख देता है कि वह अविवाहित नहीं मरेगा। इस शर्त के कारण यह संकट उत्पन्न हो जाता है कि यदि यदि किसी राजा की बेटी या सामान्य स्त्री से उसका विवाह किया जाता है कि वह तुरंत ही विधवा हो जाएंगी।

मोहिनी का रुप धरकर किया विवाह
ऐसे में कोई भी पिता इरावन से अपनी बेटी के विवाह के लिए तैयार नहीं होता है। तब भगवान कृष्ण स्वयं मोहिनी के रुप में इरावन से विवाह करते हैं। इसके बाद इरावन अपने हाथों से अपना शीश मां काली के चरणों में अर्पित कर देता है।

विवाह के अगले दिन दे दी बलि।
इरावन की मृत्यु के पश्चात कृष्ण उसी मोहिनी रूप में काफी देर तक उसकी मृत्यु का विलाप भी करते हैं। अब चुकी कृष्ण पुरुष होते हुए स्त्री रूप में इरावन से शादी रचाते हैं इसलिए किन्नर, जोकि स्त्री रूप में पुरुष माने जाते हैं, वह भी इरावन से एक रात की शादी रचाते हैं और उन्हें अपना आराध्य देव मानते हैं। लेकिन यह कथा कितनी सच है इसके बारे कोई ज्यादा नहीं जानता हैं। क्योंकि महाभारत में इरावन की मुत्यु के बारे में दो काहानी हैं।

कौन था इरावन ?
इरावन अर्जुन का पुत्र था। इसका जन्म विशेषकाल परिस्थिति में हुआ था। दरअसल, एक बार अर्जुन ने युधिष्ठिर और द्रौपदी को एकांत में देखकर वैवाहिक नियम भंग कर दिया था जिसके चलते उन्होंने स्वेच्छापूर्वक एक वर्ष के लिए तीर्थ भ्रमण स्वीकार कर इंद्रप्रस्थ छोड़ दिया। एक दिन वे हरिद्वार में स्नान कर रहे थे कि तभी नागराज कौरव्य की पुत्री नागकन्या उलूपी ने उन्हें देखा और वह उन पर मोहित हो गई। ऐसे में वह उन्हें खींचकर अपने नागलोक में ले गई और उसके अनुरोध करने पर अर्जुन को उससे विवाह करना पड़ा। अर्जुन और नागकन्या उलूपी के मिलन से अर्जुन को एक वीरवार पुत्र मिला जिसका नाम इरावन रखा गया।

एक दिन के लिए करते है किन्नर इरावन से शादी
हिजड़ों की शादी का जश्न देखना है तो आपको तमिलनाडु के कूवगाम जाना होगा। यहां हर साल तमिल नव वर्ष की पहली पूर्णिमा से हिजरों के विवाह का उत्सव शुरु होता है जो 18 दिनों तक चलता है। 17 वें दिन हिजरों की शादी होती है। सोलह श्रृंगार किए हुए हिजड़ों को पुरोहित मंगलसूत्र पहनाते हैं और इनका विवाह हो जाता है।

इराविन करती है विलाप
विवाह के अगले दिन इरवन देवता को की मूर्ति को शहर में घुमाया जाता है और इसके बाद उसे तोड़ दिया जाता है। इसके साथ ही किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर एक विधवा की तरह विलाप करने लगती है। इरावन से विवाह करने वाली इन किन्नरों को ' इराविन या अराविन' कहा जाता हैं।

एक अन्य मान्यता यह भी काहानी
महाभारत के भीष्म पर्व के 83वें अध्याय के अनुसार महाभारत के युद्ध के सातवें दिन इरावन का अवंती के राजकुमार विंद और अनुविंद से अत्यंत भयंकर युद्ध हुआ। इरावन ने दोनों भाइयों से एक साथ युद्ध करते हुए शकुनी के छह पुत्रों का वध कर दिया था। इसके बाद अल्बुस नामक राक्षस से युद्ध करते हुए इरावन की मुत्यु हुई थी।



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