गाय के पेट में US कर रहा है बड़ा छेद, कारण है Shocking

रिपोट के अनुसार वैज्ञानिकों के लिए गाय के पाचन तंत्र की जांच करना मुश्‍किल होता है। ऐसे में उनके पेट पर छेद कर दिया जाता है और उस पर ढक्‍कन लगा दिया जाता है।

यूएस और स्विट्जरलैंड में किसानों ने कुछ ऐसा प्रयोग किया है कि जिसे देख कर आज दुनिया काफी दंग हो गई है। आप को यह जानकर हैरानी होगी कि यहां के ऑर्गेनिक डेयरी किसान अपनी-अपनी गायों के पेट में एक बड़ा छेद कर रहे हैं।

कहा जा रहा है कि ऐसा करने से गायों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हो रहा है और इससे उनकी आयु भी बढ़ रही है।

इस विधि को फिस्‍टूला या कैन्‍यूला नाम से जाना जाता है। ऐसी गायों की तस्‍वीरें बड़ी ही तेजी के साथ इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं, इसलिये हमने सोंचा कि चलो ज़रा इस बात का पता लगाएं कि आखिर माजरा क्‍या है।

 ऐसा करने से पोषण की जांच करने में आसानी होती है

ऐसा करने से पोषण की जांच करने में आसानी होती है

रिपोट के अनुसार वैज्ञानिकों के लिए गाय के पाचन तंत्र की जांच करना मुश्‍किल होता है। ऐसे में उनके पेट पर छेद कर दिया जाता है और उस पर ढक्‍कन लगा दिया जाता है।

क्‍या होता है इस प्रक्रिया में

क्‍या होता है इस प्रक्रिया में

गाय में जो छेद बनाते हैं उससे पता लगाया जा सकता है कि गाय किस चीज़ को आराम से पचा पा रही है और क्‍या चीज़ खाने में उसे दिक्‍कत हो रही है।

फिस्टुला क्‍या होता है

फिस्टुला क्‍या होता है

गाय को खाना खिलाने के बाद वैज्ञानिक इस छेद से बनाए गए रास्‍ते का इस्तेमाल करते हैं ताकि पता लगाया जा सके कि शरीर में खाना किस स्तर पर पच रहा है। साथ ही अगर गाय को कोई दवा देनी हो तो वह भी सीधे इसी छेद के माध्‍यम दी जा सकती है।

बैक्‍टीरिया का भी आसानी से पता चलता है

बैक्‍टीरिया का भी आसानी से पता चलता है

इस प्रक्रिया से गाय के पेट में रहने वाले बैक्‍टीरिया का भी पता चलता है।

 यह एक एक्‍सपेरिमेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है

यह एक एक्‍सपेरिमेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है

शोध के अनुसार, गायों के पेट में जई और अन्‍य प्रकार की फसलों को डाल कर एक्‍सपेरिमेंट किया जाता है। उसके बाद गाय इस चारे को किस तरह से पचा रही है और क्‍या ये फसल उसके पेट के लिये अच्‍छा है या नहीं, इस चीज़ की रिसर्च की जाती है।

1920 में इस प्रक्रिया का काफी ट्रेंड था

1920 में इस प्रक्रिया का काफी ट्रेंड था

रिपोर्ट ने क्‍लेम किया है कि यह प्रक्रिया कोई नहीं है बल्‍कि इसे एक 1920 में से किया आता जा रहा है। कैन्‍यूला को सर्जरी के दृारा गाय के पेट में डालते हैं और फिर गाय को 4-6 हफ्तों का आराम दिया जाता है। बाद में गाय पूरी तरह से फिट हो जाती है और एक्‍सपेरिमेंट के लिये तैयार हो जाती है।

इस टेक्‍नीक से गाय स्‍वस्‍थ बनती हैं

इस टेक्‍नीक से गाय स्‍वस्‍थ बनती हैं

जब पता चलता है कि कौन सा चारा खाने से गाय तंदरुस्‍त रहती है, तो आगे चल कर भी मवेशियों को पालने में आसानी होती है और उनकी पैदावार भी बढिया होती है।

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