नाम ही नहीं शख्सियत भी थी 'अटल', पोखरण धमाके से लेकर कारगिल तक बदल दी थी भारत की तस्‍वीर

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Atal Bihari Vajpayee Biography | Vajpayee की 'अटल' कहानी | वनइंडिया हिंदी

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को निधन हो गया। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी दूरगामी सोच, कविताओं, पोखरण टेस्ट, कारगिल में भारत को मिली जीत और अंतर्राष्टीय स्तर पर भारत का कद बढाने के लिये हमेशा याद किया जायेगा। भारतीय राजनीति में " भीष्‍म पितामह " कहे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी अपनी दमदार शख्सियत की वजह से जाने थे, यही वजह थी कि विपक्ष में भी उनकी छवि काफी दमदार मानी जाती थी। पूरा देश अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के साथ अत्यंत शौक में डूब गया है। अटलबिहारी वाजपेयी अपने नाम के साथ व्‍यक्तित्‍व के धनी थे।

उनके जीवन से जुड़े ऐसे कई किस्‍से हैं जो उन्‍हें एक महान नेता और एक व्‍यक्ति रुप में साबित करता है। उनके कार्यकाल में हुए कई कार्यों और उनके फैसलों ने अंतर्राष्‍ट्रीय पटल पर भारत की नई तस्‍वीर उभरकर आई और भारत एक राष्‍ट्र के साथ ही एक नई शक्ति के रुप में पहचाने जाने लगा।

RIP Atal Bihari Vajpayee: Intersting Facts on the former PM

आइए जानते है अटलबिहारी वाजपेयी की ज‍िंदगी से जुड़े कुछ किस्‍से, जिनकी वजह से पूरी दुनिया उन्‍हें आने वाले समय में भी याद रखेगी।



पहले ग़ैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे

पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले ग़ैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बनें थे। भारत रत्न से सम्मानित वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए फिर 1998 से 1999 में 13 महीनों के ल‍िए और आखिरी बार 1999 से 2004 तक अपने पांच वर्ष पूरे किए थे।

चार दशक तक विपक्ष की भूमिका में

मात्र 18 साल की उम्र में ही उन्‍होंने राजनीति में कदम रख ल‍िया था। अटल बिहारी वाजपेयी चार दशक तक विपक्ष की कमान थामें रखी। 1957 में पहली बार बने लोकसभा सांसद, 47 साल तक संसद सदस्य रहे। 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी ने 2005 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था।

परमाणु परीक्षण से भारत को दिलाया शक्ति का दर्जा

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बने सिर्फ 3 महीने ही हुए थे और उन्होंने परमाणु परीक्षण करने का फैसला किया। 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किया गया। उस वक्त अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भारत पर नजर रखने के लिए पोखरण के ऊपर सैटेलाइट लगा दिए थे, लेकिन भारत ने इन अमेरिकी सैटेलाइट को चकमा देते हुए सफल परमाणु परीक्षण किया। मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद भी इस टीम में शामिल थे।



दिल्ली से लाहौर तक की बस सर्विस की शुरुआत

जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने दिल्ली से लाहौर तक बस सर्विस की शुरुआत की, जिसे 'सदा-ए-सरहद' नाम दिया गया। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए खुद अटल बस में बैठकर दिल्ली से लाहौर गए थे। हालांकि 2001 में हुए संसद हमले के बाद इस सेवा को बंद कर दिया गया, लेकिन 2003 में इसे फिर से शुरू कर दिया गया।



कारगिल युद्ध में 'विजय'

1999 में जब पाकिस्तान सेना ने भारत-पाकिस्तान के बीच बनी एलओसी को पार किया और भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया। इसको लेकर अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन कर समझाया भी कि भारत युद्ध नहीं करना चाहता, लेकिन पाकिस्तान ने बात नहीं मानी। जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में दोनों देश के बीच युद्ध छिड़ गया। आखिर में 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को हराकर कारगिल युद्ध जीत लिया।

नेहरू, कहा था- एक दिन ये युवा प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे

देश में दूसरा लोकसभा चुनाव 1957 में हुआ था। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर सीट (उत्तर प्रदेश) से सांसद बने थे। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में एक ब्रिटिश राजनेता से अटलजी की मुलाकात करवाई थी। तब नेहरू जी ने कहा था- इनसे मिलिए। यह युवा एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। राष्ट्रीय और वैश्विक राजनीति पर पकड़ और जोरदार भाषणों ने उन्हें संसद में चर्चित कर दिया था।और उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर अटलजी की भाषण कला को सराहा था।

अटल का हिंदी प्रेम

अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को विश्वस्तर पर मान दिलाने के लिए काफी प्रयास किए। वह एक अच्‍छा वक्‍ता उनकी हिंदी भाषा पर बहुत अच्‍छी पकड़ थी। वह पहले व्‍यक्ति थे,‍ जिन्‍होंने 1977 में जनता सरकार में विदेश मंत्री रहते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) में हिंदी में भाषा दिया था। जो उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था। ये उनकी हिंदी का ही कमाल था कि यूएन के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर वाजपेयी के लिए तालियां बजाईं थीं।

1984 से एक किडनी पर जिंदा थे वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी 1984 से एक किडनी पर जिंदा थे। ये बात उन्‍होंने खुद 2007 में दिल्ली में एक किडनी हॉस्पिटल की नींव रखते हुए कहा था कि किसी को भी किडनी देने से डरना नहीं चाहिए। मैं कई साल पहले अपनी किडनी दे चुका हूं। यहां आपके सामने एकदम स्वस्थ बैठा हूं। उनका मानना है कि किसी की जिंदगी बचाना, उसे जिंदगी देने के बराबर ही है।

निकल पड़े थे प्लेन के यात्रियों की जान बचाने

बात तब की है जब देश में राम जन्मभूमि आंदोलन का दौर चल रहा था और अटलजी लखनऊ के सांसद हुआ करते थे। लखनऊ में अपने प्रवास के लिए आते तो मीराबाई रोड के गेस्ट हाउस में रुका करते थे। तब तत्‍कालीन डीएम ने बताया कि अमौसी एयरपोर्ट पर एक युवक ने एक विमान हाईजैक कर लिया है और उसके हाथ में बम है। प्लेन हाईजैकर ने विमान को उड़ाने की धमकी दी है लेकिन यह भी कहा है कि अगर अटल बिहारी वाजपेयी आ जाएं तो मैं सभी यात्रियों को छोड़ दूंगा, इसलिए अगर आप हमारे साथ चलें तो शायद सभी की जान बच जाए। अटलजी ने खाना छोड़ा और डीएम के साथ चलने की हामी भर दी। अटलजी और सभी बीजेपी नेता एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से विमान में संपर्क हुआ तो अटलजी ने हाईजैक करने वाले से बात की। उसने अटलजी की आवाज सुनकर कहा कि आप अटलजी नहीं हैं। इसके बाद अटलजी ने डीएम को विमान तक चलने को कहा। एक कार में अटल जी, राज्यपाल के सलाहकार और डीएम विमान तक पहुंचे।  अटलजी को विमान में देख जब इस पर युवक अटलजी का पैर छूने के लिए झुका तो वहां मौजूद एक पुलिसवाले ने उसे जकड़ लिया। उस युवक ने अपने हाथ में पड़े एक सुतली के गुच्छे को फेंकते हुए कहा कि उसके पास कोई बम नहीं है, वह तो सिर्फ इन्हें यह बताना चाहता था कि देश में राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर कितना आक्रोश है। युवक की गिरफ्तारी के बाद, अटलजी विमान में मौजूद सभी लोगों से मिले। विमान में एक सीट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सीताराम केसरी भी बैठे हुए थे।

राजनीतिज्ञ के साथ कवि भी

वाजपेयी की हिंदी के रुप में एक अच्‍छे वक्‍ता के रुप में पहचान जगजाह‍िर थी। इसके अलावा

वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ कवि भी थे। 'मेरी इक्यावन कविताएं' वाजपेयी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। जगजीत सिंह के साथ उन्होंने दो एल्बम 'नई दिशा' (1999) और 'संवेदना' (2002) भी रिलीज कीं। उनकी मशहूर कविता 'क्या खोया क्या पाया जग में' को साल 1999 में एक्टर शाहरुख खान पर फिल्माया गया था। शाहरुख ने बताया कि अटल जी ने खुद जगजीत सिंह को फोन कर पूछा कि वे इस वीडियो में किसे लेने वाले हैं। जगजीत सिंह ने उनसे कहा कि अभी किसी का नाम फाइनल नहीं किया गया है। इसपर अटल जी ने उनसे कहा कि आज कर शाहरुख का नाम बहुत चल रहा है इसलिए वे उन्हें इस वीडियो में लें। इसके बाद यह इच्छा शाहरुख तक पहुंची तो वे झट से तैयार हो गए।



2015 में भारत रत्‍न मिला

अटल बिहारी वाजपेयी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1992 में उन्हें पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार और 1994 में ही गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा 2015 में उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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    English summary

    RIP Atal Bihari Vajpayee: Intersting Facts on the former PM

    Also known as the “Bhishma Pitamah” of Indian politics, Atal ji’s subtle demeanor and personality never failed to win over not only all the countrymen but even his oppositions.
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