Latest Updates
-
Putrada Ekadashi 2026: 23 या 24 अगस्त, कब है पुत्रदा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
कौन हैं क्रिकेटर मेधावी बिधूड़ी? ‘6-7’ सेलिब्रेशन के बाद इंटरनेट पर हुईं वायरल, खूबसूरती के दीवाने हुए फैंस -
दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, जानें बच्चों में H1N1 के लक्षण और बचाव के उपाय -
53 की उम्र में दूल्हा बने अर्जुन रामपाल, गोवा में 14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला संग रचाई शादी -
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार
क्यों सावन में चाव से खाया जाता है घेवर, जाने इतिहास और इंग्लिश में इसका नाम
घेवर राजस्थान की खूब जानी मानी मिठाईयों में से एक है। कुछ प्रमुख त्योहारों में घेवर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैसे घेवर खाने में जितना स्वादिष्ट लगता है, इतना ही इसका इतिहास भी काफी रोचक है। सावन के दौरान कई जगह छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है, घेवर छप्पन भोग के अन्तर्गत प्रसिद्ध व्यंजन है। सावन के दौरान कई तरह के तीज त्योहार पड़ते है तो इस दौरान घेवर को खूब पसंद किया जाता है। राजस्थान और इसके आसपास के क्षेत्र में लोगों का मानना है कि घेवर के बिना रक्षाबंधन और तीज का त्योहार अधूरा माना जाता है। रक्षाबंधन पर बहन घेवर लेकर भाई के घर जाती है। बिना घेवर के भाई-बहन का ये त्योहार पूरा नहीं होता।

बता दें कि घेवर राजस्थान और ब्रज क्षेत्रों की प्रमुख पारंपरिक मिठाई है। ये मिठाई बरसात के दिनों में बनाई जाती है और इसे लोग खूब पसंद करते हैं। घेवर को मूलत: राजस्थान की उत्पत्ति मानी जाती है। इसके अलावा ब्रज क्षेत्रों में घेवर अलग-अलग तरीकों से बनाए जाते हैं। घेवर को इंग्लिश में हनीकॉम्ब डेटर्ट के नाम से जाना जाता है।

कैसे बनाया जाता है घेवर?
सामान्य तौर पर मैदा और अरारोट के घोल को तरह-तरह के सांचों में डालकर घेवर बनाया जाता है और फिर इसे चाशनी में डूबाया जाता है। समय के साथ-साथ घेवर को प्रेजेंट करने के तरीके में बदलाव आया है, लेकिन आज भी घेवर का स्वाद पुराना ही पसंद किया जाता है। नए घेवर के रूप में लोग मावा घेवर, मलाई घेवर और पनीर घेवर ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

स्वाद में भी अलग-अलग
घेवर स्वाद में भी अलग-अलग होता है। एक तो मीठा और दूसरा फीका। ताजा घेवर नर्म और खस्ता होता है पर ये ज्यादा दिनों तक रखने से सख्त होने लगता है। वहीं सख्त पड़ गए घेवर के को बेसन में मिलाकर तेल में तलकर पकौड़े बनाए जाते हैं। वहीं मीठे घेवर से खीर या पुडिंग भी बनाई जा सकती है।



Click it and Unblock the Notifications