Latest Updates
-
'कांटे' और 'शूटआउट एट वडाला' के निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन, सामने आई मौत की वजह -
Ahoi Ashtami Vrat Me Pani Kab Piye: अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पीना चाहिए या नहीं? जानें व्रत के जरूरी नियम -
Namakpara Recipe: दिवाली पर घर पर बनाएं बिना मैदा के कुरकुरे नमकपारे, निशा मधुलिका ने बताई आसान रेसिपी -
Halloween 2026: क्यों मनाया जाता है हैलोवीन? जानिए कहां और कैसे शुरू हुआ यह 'डरावना त्योहार' -
National Unity Day 2026 Wishes: हमारी पहचान हमारी एकता...राष्ट्रीय एकता दिवस पर आप भी भेजें ये शुभकामना संदेश -
Halloween 2026: हैलोवीन पार्टी के लिए ट्राई करें ये 5 स्पूकी मेकअप आइडियाज, दिखेंगी सबसे अलग -
बार-बार होने वाला सिरदर्द कहीं ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? डॉक्टर ने बताए 5 वार्निंग संकेत जिन्हें पहचानना है जरूरी -
Ahoi Ashtami 2026: 1 या 2 नवंबर, अहोई अष्टमी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Karwa Chauth Wishes For Saasu Maa: आपके आशीर्वाद से...करवा चौथ पर सासू मां को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Happy Karwa Chauth Wishes For Husband: चांद से भी प्यारा...करवाचौथ पर जीवनसाथी को भेजें ये प्यार भरे संदेश
क्यों सावन में चाव से खाया जाता है घेवर, जाने इतिहास और इंग्लिश में इसका नाम
घेवर राजस्थान की खूब जानी मानी मिठाईयों में से एक है। कुछ प्रमुख त्योहारों में घेवर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैसे घेवर खाने में जितना स्वादिष्ट लगता है, इतना ही इसका इतिहास भी काफी रोचक है। सावन के दौरान कई जगह छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है, घेवर छप्पन भोग के अन्तर्गत प्रसिद्ध व्यंजन है। सावन के दौरान कई तरह के तीज त्योहार पड़ते है तो इस दौरान घेवर को खूब पसंद किया जाता है। राजस्थान और इसके आसपास के क्षेत्र में लोगों का मानना है कि घेवर के बिना रक्षाबंधन और तीज का त्योहार अधूरा माना जाता है। रक्षाबंधन पर बहन घेवर लेकर भाई के घर जाती है। बिना घेवर के भाई-बहन का ये त्योहार पूरा नहीं होता।

बता दें कि घेवर राजस्थान और ब्रज क्षेत्रों की प्रमुख पारंपरिक मिठाई है। ये मिठाई बरसात के दिनों में बनाई जाती है और इसे लोग खूब पसंद करते हैं। घेवर को मूलत: राजस्थान की उत्पत्ति मानी जाती है। इसके अलावा ब्रज क्षेत्रों में घेवर अलग-अलग तरीकों से बनाए जाते हैं। घेवर को इंग्लिश में हनीकॉम्ब डेटर्ट के नाम से जाना जाता है।

कैसे बनाया जाता है घेवर?
सामान्य तौर पर मैदा और अरारोट के घोल को तरह-तरह के सांचों में डालकर घेवर बनाया जाता है और फिर इसे चाशनी में डूबाया जाता है। समय के साथ-साथ घेवर को प्रेजेंट करने के तरीके में बदलाव आया है, लेकिन आज भी घेवर का स्वाद पुराना ही पसंद किया जाता है। नए घेवर के रूप में लोग मावा घेवर, मलाई घेवर और पनीर घेवर ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

स्वाद में भी अलग-अलग
घेवर स्वाद में भी अलग-अलग होता है। एक तो मीठा और दूसरा फीका। ताजा घेवर नर्म और खस्ता होता है पर ये ज्यादा दिनों तक रखने से सख्त होने लगता है। वहीं सख्त पड़ गए घेवर के को बेसन में मिलाकर तेल में तलकर पकौड़े बनाए जाते हैं। वहीं मीठे घेवर से खीर या पुडिंग भी बनाई जा सकती है।



Click it and Unblock the Notifications
