Lovlina Borgohain : कौन हैं 23 साल की लवलीना बोरगोहेन जिन्होंने किया भारत का दूसरा ओलिंपिक मेडल पक्का

भारत्तोलन में मीराबाई चानू के रजत पदक के बाद भारत के खाते में एक और मेडल पक्का भारतीय महिला मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन ने कर दिया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग के वेल्टरवेट क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चेन को हराया और सेमीफइनल में अपना स्थान बनाया। इसके साथ ही मुक्केबाज़ी में भारत को एक पदक मिलने वाला है यह भी तय हो गया है।

Lovlina Borgohain

लवलीना का जन्म असम के गोलाघाट ज़िले में 2 अक्टूबर 1997 को टिकेन और मामोनी बोरगोहेन के घर हुआ था। उनके पिता टिकेन एक छोटे व्यापारी थे और अपनी बेटी के सपने को साकार करने के हर संघर्ष का सामना करते आये। लवलीना बोरगोहेन केवल 23 साल की हैं और असम से ओलम्पिक तक के सफर को आर्थिक व अन्य चुनौतियों के बावजूद बेहद दृढ़ता से पार किया। जानते हैं उनके संघर्ष भरे इस सफर के बारे में।

किकबॉक्सिंग को छोड़कर बॉक्सिंग अपनाने का कारण

किकबॉक्सिंग को छोड़कर बॉक्सिंग अपनाने का कारण

लवलीना की दो अन्य बहनें जब किकबॉक्सिंग करने लगीं तब लवलीना ने भी किकबॉक्सिंग में ही शुरुआत की। उनकी बहनें किकबॉक्सिंग में नेशनल चैंपियन भी बनीं पर लवलीना के लिए नियति ने कुछ और ही तय किया हुआ था।

एक दिन जब उनके पिता बाजार से कुछ सामान अखबार में लपेटकर लाये तब लवलीना ने उस अखबार के टुकड़े पर महान बॉक्सिंग खिलाड़ी मोहम्मद अली की तस्वीर देखी और अपने पिता से अली की पूरी कहानी जानी। और बस उसी पल से उनका बॉक्सिंग के साथ का दिलचस्प सफर शुरू हुआ।

बॉक्सिंग करियर की शुरुआत

बॉक्सिंग करियर की शुरुआत

लवलीना के बॉक्सिंग करियर की औपचारिक शुरुआत 2012 में हुई जब स्कूल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के ट्रायल हुए और कोच पादुम बोरो की नज़र उनपर पड़ी। और इसके बाद पांच साल के अंदर अंदर वे एशियाई चैंपियनशिप के कांस्य पदक तक पहुंच गयी।

ट्रेनिंग के लिए नहीं मिलते थे पार्टनर

ट्रेनिंग के लिए नहीं मिलते थे पार्टनर

ट्रेनिंग के दौरान भी उनको समस्या का सामना करना पड़ा क्योंकि भारत में उनके वर्ग के खिलाड़ी बहुत कम हैं इसलिए उनको प्रैक्टिस के लिए पार्टनर नहीं मिलते थे और किसी अन्य वेट केटेगरी के मुक्केबाज़ों के साथ उन्हें ट्रेनिंग करनी पड़ती थी।

प्रेक्टिस में आई बाधा

प्रेक्टिस में आई बाधा

ओलम्पिक खेलों से पहले का समय भी लवलीना के लिए कठिनाई भरा रहा। इस दौरान वो अपनी मां की किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की वजह से कुछ समय तक रिंग से दूर रहीं। मगर इसके बाद भी उन्होंने ट्रेनिंग रिंग में वापसी की और खुद को शारीरिक, मानसिक व खेल के लिए पूर्ण रूप से बेहतर बनाया। जिसका नतीजा हम सबके सामने है।

पूरे भारतवर्ष को लवलीना पर बहुत गर्व है। भारत की ये बेटी पदक का जो भी रंग जीतेंगी उसके लिए पूरे देश की तरफ से बधाई।

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