Latest Updates
-
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म
Lovlina Borgohain : कौन हैं 23 साल की लवलीना बोरगोहेन जिन्होंने किया भारत का दूसरा ओलिंपिक मेडल पक्का
भारत्तोलन में मीराबाई चानू के रजत पदक के बाद भारत के खाते में एक और मेडल पक्का भारतीय महिला मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन ने कर दिया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग के वेल्टरवेट क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चेन को हराया और सेमीफइनल में अपना स्थान बनाया। इसके साथ ही मुक्केबाज़ी में भारत को एक पदक मिलने वाला है यह भी तय हो गया है।

लवलीना का जन्म असम के गोलाघाट ज़िले में 2 अक्टूबर 1997 को टिकेन और मामोनी बोरगोहेन के घर हुआ था। उनके पिता टिकेन एक छोटे व्यापारी थे और अपनी बेटी के सपने को साकार करने के हर संघर्ष का सामना करते आये। लवलीना बोरगोहेन केवल 23 साल की हैं और असम से ओलम्पिक तक के सफर को आर्थिक व अन्य चुनौतियों के बावजूद बेहद दृढ़ता से पार किया। जानते हैं उनके संघर्ष भरे इस सफर के बारे में।

किकबॉक्सिंग को छोड़कर बॉक्सिंग अपनाने का कारण
लवलीना की दो अन्य बहनें जब किकबॉक्सिंग करने लगीं तब लवलीना ने भी किकबॉक्सिंग में ही शुरुआत की। उनकी बहनें किकबॉक्सिंग में नेशनल चैंपियन भी बनीं पर लवलीना के लिए नियति ने कुछ और ही तय किया हुआ था।
एक दिन जब उनके पिता बाजार से कुछ सामान अखबार में लपेटकर लाये तब लवलीना ने उस अखबार के टुकड़े पर महान बॉक्सिंग खिलाड़ी मोहम्मद अली की तस्वीर देखी और अपने पिता से अली की पूरी कहानी जानी। और बस उसी पल से उनका बॉक्सिंग के साथ का दिलचस्प सफर शुरू हुआ।

बॉक्सिंग करियर की शुरुआत
लवलीना के बॉक्सिंग करियर की औपचारिक शुरुआत 2012 में हुई जब स्कूल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के ट्रायल हुए और कोच पादुम बोरो की नज़र उनपर पड़ी। और इसके बाद पांच साल के अंदर अंदर वे एशियाई चैंपियनशिप के कांस्य पदक तक पहुंच गयी।

ट्रेनिंग के लिए नहीं मिलते थे पार्टनर
ट्रेनिंग के दौरान भी उनको समस्या का सामना करना पड़ा क्योंकि भारत में उनके वर्ग के खिलाड़ी बहुत कम हैं इसलिए उनको प्रैक्टिस के लिए पार्टनर नहीं मिलते थे और किसी अन्य वेट केटेगरी के मुक्केबाज़ों के साथ उन्हें ट्रेनिंग करनी पड़ती थी।

प्रेक्टिस में आई बाधा
ओलम्पिक खेलों से पहले का समय भी लवलीना के लिए कठिनाई भरा रहा। इस दौरान वो अपनी मां की किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की वजह से कुछ समय तक रिंग से दूर रहीं। मगर इसके बाद भी उन्होंने ट्रेनिंग रिंग में वापसी की और खुद को शारीरिक, मानसिक व खेल के लिए पूर्ण रूप से बेहतर बनाया। जिसका नतीजा हम सबके सामने है।
पूरे भारतवर्ष को लवलीना पर बहुत गर्व है। भारत की ये बेटी पदक का जो भी रंग जीतेंगी उसके लिए पूरे देश की तरफ से बधाई।



Click it and Unblock the Notifications
