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Ravi Dahiya: किराए की जमीन पर खेती करके रवि कुमार दहिया की हुई ट्रेनिंग, आज देश को दी है ओलिंपिक पदक की खुशी
पिछले कुछ समय से ओलम्पिक जैसे मंच पर भारतीय पहलवानों ने अपना अच्छा प्रदर्शन का दौर जारी रखा है और टोक्यो 2020 में रवि कुमार दहिया का नाम भी जुड़ गया है। 23 वर्षीय भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया ने बुधवार को अपने कुश्ती के ओलम्पिक सेमीफाइनल मैच को जीतकर भारत के खाते में चौथा मैडल पक्का कर दिया है और साथ ही अपना नाम खेल जगत में सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। हर देशवासी को जाननी चाहिए युवा खिलाड़ी रवि कुमार दहिया के संघर्ष, त्याग और परिश्रम की कहानी।

पिता का संघर्ष
कुश्ती के मक्का कहे जाने वाले हरियाणा राज्य के सोनीपत से आने वाले रवि कुमार दहिया ने 10 वर्ष की उम्र से ही दिग्गज पहलवान सतपाल सिंह के निर्देशन में छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। उनके पिता एक किसान थे और किराये के ज़मीन पर खेती किया करते थे। आर्थिक तंगी होने के बावजूद उनके पिता ने अपने बेटे की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे हर रोज अपने गांव से छत्रसाल स्टेडियम तक की 40 किलोमीटर की यात्रा करके रवि तक फल व् दूध पहुंचाया करते थे ताकि ट्रेनिंग के लिए उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता रहे।

चोट से रहा है नाता
2015 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में रवि ने 55 किलो कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता, लेकिन सेमीफाइनल में चोटिल भी हो गए। उसके बाद 2017 के सीनियर नेशनल्स में भी एक बार फिर चोट ने उन्हें परेशान किया। इस कारण उन्हें कुछ समय तक मैट से दूर भी रहना पड़ा। लेकिन 2018 में उन्होंने अंडर 23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में शानदार वापसी की और रजत पदक अपने नाम किया था।

महत्वपूर्ण पदक किये अपने नाम
रवि कुमार चोट से वापसी के बाद से ही बेहद अच्छा प्रदर्शन करते आये हैं। 2019 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता। वहीं 2020 और 2021 दोनों वर्षों के एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किये।
यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय ओलम्पिक पदकों की उमीदों की चर्चाओं में अंडरडॉग रवि कुमार दहिया का नाम कहीं नहीं था परन्तु आज उन्होंने अपने खेल से पूरे देश को पदक की ख़ुशी दी है।



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