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आम चुनाव से पहले 1951 में हुआ था नकली चुनाव, पहले Lok Sabha Chunav की ये हैं 6 रोचक बातें
First Lok Sabha Chunav 2024 interesting facts : भारत मे इस बार 18वां लोकसभा चुनाव होने जा रहा हैं। स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव से लेकर अब तक के चुनाव की प्रक्रिया में कई बदलाव आ चुके हैं। 1951-52 में भारत में पहली बार आम चुनाव हुए थे। यह चुनाव सिर्फ अहम ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी था।
दुनियाभर की निगाहे इस चुनाव पर टिकी हुई थी। पहले आम चुनाव ने न सिर्फ देश की लोकतांत्रिक तस्वीर बदल दी थी। आज हम आपको पहले चुनाव से जुड़े कुछ दिलचस्प फैक्ट बता रहे हैं, जो आप नहीं जानते होंगे।

चार महीने तक चला था पहला चुनाव
25 अक्टूबर 1951 में पहले आम चुनाव का पहला वोट हिमाचल प्रदेश के चिनी जिले में डाला गया गया था। 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक यानी करीब चार महीने तक पहले चुनाव की प्रक्रिया चली थी। पहले लोकसभा चुनाव में प्रति वोटर खर्च आया था 60 पैसे, जो 2019 के चुनावों में बढ़कर करीब 72 रुपए हो गया।
नकली चुनाव कराया गया
आम चुनाव से पहले सितंबर 1951 में नकली चुनाव कराया गया। यह एक तरह से डमी चुनाव जैसा था। इसका मकसद देश के नागरिकों को चुनाव प्रक्रिया से परिचित कराना था। भारत के पहले चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे। मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक कराए गए थे।

18 साल नहीं मतदान करने की उम्र
पहले चुनाव में वोट देने की उम्र 18 नहीं बल्कि 21 साल थी। बाद में इसे 18 साल कर दिया गया।
85% अशिक्षित वोटर्स ने दिए थे वोट
पहले चुनावों में 10.59 करोड़ वोटर्स ने वोटिंग प्रक्रिया में भाग लिया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें 85% अशिक्षित थे।
कांग्रेस ने एक तरफा जीत की थी हासिल
पहले चुनावों में लोकसभा की 497 तथा राज्य विधानसभाओं की 3,283 सीटों के लिए 17 करोड़ 32 लाख 12 हजार 343 रजिस्टर्ड वोटर थे। कुल 68 फेज में वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में 364 सीटें जीतकर कांग्रेस ने एक तरफा जीत हासिल की थी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी।

कई दिग्गज हार गए चुनाव
पहले आम चुनाव में कई दिग्गजों को हार झेलनी पड़ी थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश के संविधान को नई सूरत देने वाले डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को बॉम्बे की नॉर्थ सेन्ट्रल सीट पर अपने ही सहयोगी रहे एन. एस. कर्जोलकर से मात मिली थी। इसके अलावा किसान मजदूर प्रजा पार्टी के दिग्गज आचार्य कृपलानी भी ये चुनाव हार गए थे।



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