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Code Of Conduct: आचार संहिता क्या है? क्यों और कब होती है लागू, किन चीजों पर लग जाती है पाबंदिया
Aachar Sanhita Kya Hai : लोकसभा चुनाव 2024 के चुनावों की तारीख की घोषणा होते ही आचार संहिता (Code of Conduct) भी लागू हो गई। आचार संहिता आखिर होती क्या है, इसकी शुरुआत कब से हुई, क्यों लगाई जाती है, कब तक ये लागू रहती है और इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं? ये खबर आपके काफी काम की साबित हो सकती हैं।
आइए सबसे पहले समझते हैं कि आचार संहिता क्या होती हैं और चुनावों से इसका क्या हैं कनेक्शन?

आचार संहिता क्या है? ( What is The Model Code of Conduct)
आचार संहिता को आप सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि यह एक नियमावली है, जिसके तहत चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र ढंग से करने के लिए चुनाव आयोग कुछ नियम-शर्तें तय करता है। चुनाव आयोग हर चुनाव के एक निर्धारित नियम बनाता है। इन नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी सरकार, नेता और राजनीतिक दलों की होती है।
कब लागू होती है आचार संहिता?
चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता भी लागू हो जाती है। देश में लोकसभा के चुनाव हर 5 साल पर होते हैं। अलग-अलग समय पर अलग-अलग राज्यों की विधानसभा चुनाव होते रहते हैं। चुनाव आयोग हर चुनावों की तारीख की घोषणा करने के साथ अचार संहिता भी लागू कर देता है।
आचार संहिता कब खत्म होती है?
चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक आचार संहिता लागू रहती है। चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता देश में लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है।
इन कामों की होती हैं पाबंदी
आचार संहिता के तहत हर उस काम पर पाबंदी लगा दी जाती हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मतदान को प्रभावित कर सकते हैं।
- दीवारों पर लिखे गए सभी तरह के पार्टी से संबंधित नारे व प्रचार सामग्री हटवा दी जाती है।
- आचार संहिता लागू होने के बाद नई योजना और नई घोषणाएं पर पाबंदी लग जाती है।
- सरकारी गाड़ी, बंगला और विमान उपयोग करने की मनाही होती है।
- धार्मिक स्थलों और प्रतीकों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान करने की मनाही होती है। धर्म या जाति के नाम पर वोट मांगने पर भी पाबंदी होती है।
- मतदान के दिन और इसके 24 घंटे पहले शराब की बिक्री और वितरित करने पर लग जाती है रोक।
- किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनिवार्य रुप से इजाजत लेनी पड़ती है।
- चुनाव से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए अधिकारियों या पदाधिकारियों का तबादला और तैनाती पर भी पाबंदी लग जाती है।
- सरकारी धन का दुरपयोग नहीं कर सकते है।
- मतदान से 48 घंटे पहले ही सभी तरह के प्रचार पर रोक लगा दी जाती है।



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