पाकिस्तान में भी मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए भारत के अलावा कहां-कहां होता है सेलि‍ब्रेट?

Makar Sankranti is celebrated in Different Countries : सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने करने का उत्सव मकर संक्रांति का त्यौहार भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। देश के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे कि तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में माघी, असम में बीहू और उत्तर प्रदेश में खिचड़ी कहा जाता है।

लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के और भी ऐसे कई देश है, जिसमें भी मकर संक्रांति का ये त्यौहार पूरे जोश और हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

How maker Sankranti is celebrated in Different Countries

हालांकि, हर देश में इस त्यौहार का नाम एक-समान नहीं है। बल्कि हर देश में इस त्यौहार को अलग-अलग नाम दिया गया है। यहां हम आपको पांच ऐसे देशों के बारे में बताने जा रहे है जहां संक्रांति का ये त्यौहार बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।


श्रीलंका में उजाहवर थिरूनल

श्रीलंका में मकर संक्रांति के इस पर्व को 'उजाहवर थिरनल' नाम से मनाया जाता है। चूंकि, यहां बड़ी संख्या में तमिलनाडु के लोग रहते है, ऐसे में यहां पोंगल नाम से भी जाना जाता हैं। हालांकि, श्रीलंका में मकर संक्रांति मनाने का तरीका भारतीय संस्कृति से थोड़ा अलग है। जिसमें यहां के लोगों द्वारा अलग-अलग परम्पराओं का निर्वहन किया जाता है।

कंबोडिया में मोहा संगक्रान

कंबोडिया में मकर संक्रांति को 'मोहा संगक्रान' नाम से जाना जाता है। जिसमें जो परम्पराएं निभाई जाती है उनमें भारतीय संस्कृति की विशेष झलक देखने को मिलती है। मान्यता है कि ये त्यौहार नए साल के आगमन के लिए मनाया जाता है। जिसमें सभी लोग विभिन्न परम्पराओं का निर्वहन करते हुए पूरे वर्ष खुशहाली भरा माहौल बना रहने की प्रार्थना करते है।

नेपाल में माघे संक्रांति

नेपाल के सभी प्रांतों में मकर संक्रांति का ये त्यौहार अलग-अलग नामों से माना जाता है। इस दिन को विभिन्न रीति-रिवाजों का अनुसरण करते हुए भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति को यहां माघे-संक्रांति, सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में माघी कहा जाता है। जो कि थारू समुदाय का यह सबसे प्रमुख त्यौहार है। भारत की तरह ही इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन नेपाल के बाकी समुदाय भी तीर्थस्थल में स्नान करके दान-धर्मादि करते है। इस दिन घरों में तिल, घी, शर्करा व कंदमूल खाया जाता हैं। यहां पर भी नदियों के संगम पर लाखों की संख्या में लोग नहाने के लिए जाते हैं। यहां के तीर्थस्थलों में रूरूधाम (देवघाट) व त्रिवेणी मेला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।

थाईलैंड में सॉन्कर्ण

भारत और नेपाल के अलावा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के लोग भी मकर संक्रांति के त्यौहार को अलग-अलग तरीके से धूमधाम से मनाते हैं। थाईलैंड में इस पर्व को सॉन्कर्ण नाम से जाना जाता है। हालांकि थाईलैंड की संस्कृति भारतीय संस्कृति जैसी नहीं है, बल्कि उससे बिलकुल अलग है। लेकिन यहां पर भी इस खास मौके पर पतंग उड़ाने की परम्परा है। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि, थाईलैंड में हर राजा की अपनी विशेष पतंग होती थी जिसे जाड़े के मौसम में भिक्षु और पुरोहित देश में शांति व खुशहाली की आशा में उड़ाते थे। थाईलैंड के लोग भी अपनी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाने के लिए पतंग उड़ाते थे। इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए थाईलैंड में मकर संक्रांति का ये त्यौहार मनाया जाता है।

म्यांमार में थिनज्ञान

म्यांमार में मकर संक्रांति का ये त्यौहार एक-दो दिन नहीं बल्कि तीन-चार दिनों तक चलता है। यहां मकर संक्रांति का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। इस दिन मनाए जाने वाले त्यौहार को थिनज्ञान कहा जाता है, जो बौद्धों से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि नए साल के आने की खुशी में और उसका स्वागत करने के लिए यह त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

पाकिस्तान में लाल लोई

मकर संक्रांति का पर्व पाकिस्तान में लाल लोई के नाम से मनाया जाता है। लाल लोई पंजाबी लोक त्यौहार लोहड़ी का सिंधी शब्द है। यह पाकिस्तानी प्रांत सिंध के कुछ हिस्सों में हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है और भारत में सिंधी हिंदुओं द्वारा भी मनाया जाता है। लाल लोई के दिन बच्चे अपने दादा-दादी और चाचियों से लकड़ी की लकड़ियां लाते हैं और रात में लकड़ियों को जलाकर आग जलाते हैं और लोग आग के चारों ओर आनंद लेते हैं, नाचते हैं और खेलते हैं।

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