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Mango Shayari : आम है पर खास है.... इस मैंगो सीजन पर शेयर करें दिल छू लेने वाली शायरियां
Mango quotes status shayari : गर्मियों की दस्तक के साथ जो फल सबसे ज़्यादा लुभाता है, वो है आम। भारत में इसे फलों का राजा कहा जाता है। हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और अदब में आम का एक ख़ास मुकाम रहा है। उर्दू शायरों ने इसे अपने शे'र और नज़्मों में जगह दी है। संस्कृत साहित्य में इसे "आमरम" कहा गया है, वहीं तमिल में इसे "मंगाई" कहा जाता है। जब पुर्तगाली भारत आए तो यही शब्द अंग्रेज़ी में "मैंगो" बन गया।
आम हमारे लिए सिर्फ़ एक फल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजा गया है। इसका ज़िक्र नज़्मों, लोकगीतों और कहावतों में भी बार-बार मिलता है! आइये देखते हैं कि इस आमों के सीजन में आम को लेकर बड़े- बड़े शायर क्या कह गए हैं, आइए आम पर जानते हैं मिठास सी भरी शायरियां-

आम पर शायरियां ( Hindi Shayari on Mango)
1. वो खट्टे-मीठे वो रसीले आम,
वो लंगड़ा, दशहरी, देसी, आम,
दिल करता है खाते रहो सुबह शाम।
- अज्ञात
2. जिस खास के लिए आप खास नहीं,
उसे आम कीजिये, किस्सा तमाम कीजिए..!
- खालिद
3. नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए
इस फ़स्ल में जो भेजिए बस आम भेजिए
ऐसा ज़रूर हो कि उन्हें रख के खा सकूँ
पुख़्ता अगरचे बीस तो दस ख़ाम भेजिए
मालूम ही है आप को बंदे का ऐडरेस
सीधे इलाहाबाद मिरे नाम भेजिए
ऐसा न हो कि आप ये लिखें जवाब में
तामील होगी पहले मगर दाम भेजिए
- अक़बर इलाहाबादी
4. आमों में बस दो खूबियां होनी चाहिए, एक मीठे हों और बहुत सारे हों।
- मिर्ज़ा ग़ालिब
5. आम तेरी ये ख़ुश-नसीबी है
वर्ना लंगड़ों पे कौन मरता है
- साग़र ख़य्यामी
6. मोड़ पे देखा है वो बूढ़ा-सा इक आम का पेड़ कभी?
मेरा वाकिफ़ है बहुत सालों से, मैं जानता हूँ
जब मैं छोटा था तो इक आम चुराने के लिए
परली दीवार से कंधों पे चढ़ा था उसके
जाने दुखती हुई किस शाख से मेरा पाँव लगा
धाड़ से फेंक दिया था मुझे नीचे उसने
मैंने खुन्नस में बहुत फेंके थे पत्थर उस पर
वक़्त के साथ सभी फूल, सभी पत्ते गए
तब भी लजाता था जब मुन्ने से कहती बीबा
'हाँ उसी पेड़ से आया है तू, पेड़ का फल है।'
अब भी लजाता हूँ, जब मोड़ से गुज़रता हूँ
खाँस कर कहता है,"क्यूँ, सर के सभी बाल गए?"
सुबह से काट रहे हैं वो कमेटी वाले
मोड़ तक जाने की हिम्मत नहीं होती मुझको!
- गुलजार
असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर'
इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुँचा
- अकबर इलाहाबादी
7. बारे आमों का कुछ बयाँ हो जाए
ख़ामा नख़्ल-ए-रुतब-फ़िशाँ हो जाए
आम के आगे पेश जावे ख़ाक
फोड़ता है जले फफूले ताक
मुझ से पूछो तुम्हें ख़बर क्या है
आम के आगे नीशकर क्या है
साया उस का हुमा का साया है
ख़ल्क़ पर वो ख़ुदा का साया है
- मिर्ज़ा ग़ालिब
8. ए हवा तू कभी मुसाफिर बनकर मेरे गांव जा आना,
मेरे नाते-रिश्तेदारों और दोस्तों का पता लेती आना,
ठीक घर के सामने है आम का बगीचा, जरा उसे भी देख आना।
9. गर्मी के मौसम में जो लू से बचाता है,
ये आम है दोस्तों इसे हर कोई बड़े चाव से खाता है।
10. मौसम तुम्हारे साथ का जाने किधर गया
तुम आए और बौर न आया दरख़्त पर
अब्बास ताबिश
11. नायाब आम लुत्फ़ हुए रंग रंग के
कोई है ज़र्द कोई हरा कुछ हैं लाल लाल
जलील मानिकपूरी



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