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'The Diplomat' Real Story : कौन हैं रियल लाइफ उजमा अहमद जिस पर बनी है ‘द डिप्लोमैट’, जानिए पूरी काहानी
True Story Behind 'The Diplomat' : नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होते ही 'द डिप्लोमैट' ने दो दिनों के भीतर टॉप पोज़िशन हासिल कर ली। यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है, दिल्ली की रहने वाली एक भारतीय युवती, उज़मा अहमद की कहानी, जो 2017 में पाकिस्तान में फंस गई थीं।
शुरुआत में यह एक आम इंटरनेशनल लव स्टोरी लगती है, लेकिन बहुत जल्दी यह रिश्ता एक डरावने अनुभव में तब्दील हो गया। आइए जानते हैं कौन हैं रियल लाइफ उजमा और कैसे वो पाकिस्तान में फंस गई और कैसे वो इस चुंगल से बाहर निकली?

मलेशिया में हुई थी ताहिर अली से मुलाकात
उज़मा उस वक्त 27 साल की थीं और मलेशिया में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थीं। वहीं उनकी मुलाकात ताहिर अली नामक पाकिस्तानी नागरिक से हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया। ताहिर ने उज़मा को शादी का झांसा देकर पाकिस्तान बुला लिया, लेकिन वहां पहंचते ही हालात बदल गए। उज़मा को न केवल बंदूक की नोक पर शादी के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उन्हें नशा देकर बंधक बना लिया गया और उनका पासपोर्ट भी छीन लिया गया।
बाद में उज़मा को पता चला कि ताहिर पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। वह उन्हें पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र, खैबर पख्तूनख्वा, जो अफगानिस्तान सीमा से सटा हुआ है, वहां ले गया। यह इलाका काफी दूरदराज और अलग-थलग था। वहाँ उज़मा को एक छोटी-सी झोपड़ी में कैद कर दिया गया।
ऐसे मिली मदद
हालात से परेशान होकर उज़मा ने एक दिन एक अन्य महिला, जिसे ताहिर ने बंधक बना रखा था, का फोन इस्तेमाल कर मलेशिया में अपने दोस्त से संपर्क किया। दोस्त ने उसे सलाह दी कि वह किसी भी तरह इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग पहुँचे, क्योंकि वहीं से मदद मिल सकती थी। उज़मा ने सूझबूझ से काम लेते हुए ताहिर को यह कहकर मनाया कि भारत में शादी के बाद लड़की का परिवार वर को पैसे देता है, और वह रकम उसका भाई भारतीय उच्चायोग से देगा।
इसके बाद उज़मा भारतीय उच्चायोग पहुँचीं, जहां उन्हें शरण दी गई। इस पूरे मामले में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और इस्लामाबाद स्थित भारतीय राजनयिक जे. पी. सिंह ने अहम भूमिका निभाई। काफी जद्दोजेहद के बाद उज़मा भारत लौट सकीं और 2017 में इस मामले ने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी।
उज़मा की ज़िंदगी अब कैसी है?
भारत लौटने के बाद उज़मा ने मीडिया को बताया कि एक निर्देशक ने उन्हें उनकी कहानी के अधिकार के लिए 15 लाख रुपये दिए, जिससे उन्होंने दिल्ली के सीलमपुर इलाके में एक कमरा खरीदा। फिलहाल वह ब्रह्मपुरी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं, जिसका नाम उन्होंने अपनी बेटी के नाम पर 'फलक' रखा है। उनकी बेटी उनकी पहली असफल शादी से है और वह दिल्ली में अपनी नानी के साथ रहती है।



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