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पीरियड्स के दिनों में महिलाओं को मानते हैं अछूत, रहती हैं गांव से बाहर, लोग नहीं पहनते जूते-चप्पल
भारत में चप्पल-जूते उतार कर घर में प्रवेश करना यहां की संस्कृति और शिष्टाचार है, जिसको लोग पूरे मन से फॉलो भी करते हैं। लेकिन अगर कोई ये कहे की बिना चप्पल और जूता पहने आप सड़कों पर निकले तो ये सुनने वाले को बहुत ही अजीब लगेगा और वो कहने वाले से भी यहीं बोलेगा कि सड़क पर गंदगी, धूल और कंकड़ भी होते हैं, ऐसे में उसके पांव में चोट लग सकती है, लेकिन आन्ध्र प्रदेश में एक ऐसा गांव है जहां के लोग नंग पैर ही रहते हैं। वो सारे काम भी बिना चप्पल, जूता पहने ही करते हैं। सबसे अहम बात ये है कि उनके गांव में भी कोई जूता पहन कर प्रवेश नहीं कर सकता है, यहां तक की वहां के जिलाधिकारी से लेकर मंत्री तक को भी चप्पल, जूते के साथ प्रवेश की मनाही है। इसी के साथ ही महिलाओं के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार भी होता है, जब महिलाओं के पीरियड शुरू होते हैं, तब गांव की महिलाओं को गांव से बाहर तब तक रहना पड़ता है, जब तक गांववालों के अनुसार वो पवित्र ना हो जाएं-

गांव के लोग नीच जाति वालों से नहीं करते बात
आन्ध्र प्रदेश में वेमना इंडलू गांव जो तिरुपति जिले के पाकला मण्डल में है। इस गांव की कुल आबादी 80 लोगों की है जो सभी एक ही गोत्र के हैं। इस गांव के लोग अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं और कृषि इनकी अजीविका सा साधन है।
गांव में प्रवेश से पहले लोग करते हैं स्नान
इस गांव में जो भी बाहर से आता है उसे पहले स्नान करना पड़ता है, उसके बाद ही वो घर में प्रवेश कर सकताा है। अधिक विकास ना होने के कारण इस गांव में ऊंच-नीच और जाति प्रथा विद्यामान है, जिसके कारण यहां दलितों का प्रवेश वर्जित है। इस गांव में शिड्यूल कास्ट जाति के लोग नहीं आ सकते हैं। यहां के लोग नीची जाति के लोगों से बात करना भी पसंद नहीं करते है।
महिलाएं अपने पीरियड के दिनों में रहती हैं गांव से बाहर
महिलाओं को उनके पीरियड के दिनों में गांव से बाहर रहना पड़ता है। इसके लिए गांव के बाहर एक कमरा उनके लिए बनाया गया है, जिसमें महिलाएं अपने पीरियड के दिनों तक वहां रहती हैं। उन्हें दिन-रात एक ही कमरे में रहना पड़ता है।
गांव अभी भी विकास से दूर
यहां पर अंधविश्वास का भी बोलबाला है। यहां कोई बीमार होने पर डॉक्टर को भी नहीं दिखाता है। यहां के लोग बीमार होने पर अपने कुल देवता के मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, इनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी बीमारी देवता ठीक कर देते हैं।
सरकारी राशन के गांव के लोग नहीं जाते बाहर
पीडिएस वर्कर खुद नंगे पैर इस गांव में आकर हर घर को अनाज मुहैया कराते हैं। इसके साथ ही दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी इस गांव के लोग उठाते हैं। लेकिन आधुनिक होते भारत में ये गांव आज भी पिछड़ेपन का शिकार हो रहा है।



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