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Menstrual Rituals: कहीं भोज तो कहीं दुल्हन सा शृंगार, इन जगहों पर पीरियड को मनाते हैं त्योहार की तरह
Menstrual Rituals : हमारे देश में 'Periods' एक ऐसा Taboo Topic है जिस पर लोग खुले आम बात करने से कतराते हैं। माहवारी को लेकर हमारे समाज में कई दकियानूसी सोच है। वहीं
भारत में कई ऐसे राज्य हैं जहां पर लड़की को पहली बार पीरियड्स आने पर विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है। इन समारोह के जरिए लड़की को पीरियड को लेकर अवेयर किया जाता है। आइए आज ऐसे ही पांच भारतीय राज्यों में पीरियड्स से जुड़ी पांच रस्मों और रीति-रिवाजों के बारे में जानते हैं।

कर्नाटक
कर्नाटक में जब लड़की को पहली बार पीरियड्स होते हैं, तो इसे 'ऋतुशुद्धि' या 'ऋतु कला संस्कार' कहा जाता है। ऋतुशुद्धि में लड़की को पहली बार साड़ी पहनाई जाती है, जो इस बात का प्रतीक है कि लड़की ने यौवन की दहलीज पर प्रवेश कर लिया है। इसका मतलब है कि महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व हो चुकी हैं। दरअसल ऋतुशुद्धि रिवाज के जरिए लड़की को माहवारी और इससे जुड़ी साफ-सफाई को लेकर अवेयर कराया जाता है।
असम
असम में लड़की को पहली बार माहवारी आने पर 'तुलोनिया बिया' नामक त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार शादी की तैयारियों की तरह ही मनाया जाता है। इस प्रथा में लड़की को कई तरह के काम करने की मनाही होती है और एक कमरे में ही रहना होता है। तुलोनिया बिया में लड़की को सात दिन तक अलग जगह में रखा जाता है, क्योंकि इस समय के दौरान सूर्य, चंद्रमा और सितारों को देखना अशुभ माना जाता है। सात दिन बाद लड़की को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और केले के पौधे से लड़की की शादी कराई जाती है। इस समारोह में लड़की के रिश्तेदार शामिल होते हैं और लड़की को कई तरह के उपहार देते हैं।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में लड़की को मंजल निरातु विज़ा त्योहार मनाया जाता है। यह एक भव्य समारोह होता है। इस रीति-रिवाज में लड़की के चाचा चाचा नारियल, आम और नीम के पत्तों से बनी झोपड़ी या कुदिसाई बनाते हैं। लड़की को हल्दी के पानी से नहलाया जाता है और वह कुदिसाई में रहती है। इस झोपड़ी में झाडू के साथ-साथ कई स्वादिष्ट पकवान भी रखे जाते हैं। नहलाने के बाद लड़की को रेशम की साड़ी पहनाई जाती है। साथ ही ज्वेलरी भी पहनाई जाती है। 'पुण्य धनम' से समारोह खत्म होता है। यह आमतौर पर 9वें, 11वें और 15वें दिन किया जाता है। इसके बाद मामा द्वारा बनाई गई झोपड़ी को हटा दिया जाता है और पंडित घर को शुद्ध करता है।
ओडिशा
ओडिशा में राजा प्रभा नाम से समारोह मनाया जाता है जो तीन दिनों तक चलता है। राजा संस्कृत शब्द राज से आया है जिसका मतलब मासिक धर्म यानि पीरियड्स है। जिन महिलाओं को माहवारी आती है, उन्हें रजस्वला के नाम से जाना जाता है। यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि इन दिनों के दौरान धरती माता को पीरियड्स होते हैं। समारोह के बाद चौथे दिन लड़की को नहलाया जाता है। यह रिवाज मिथुन संक्रांति से भी जुड़ा हुआ है, जो मानसून की पहली बारिश की याद दिलाता है।
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में पहली माहवारी आने पर पेडमनिषी पंडगा' नामक समारोह का आयोजन होता है, इस त्योहार में पहले दिन 'मंगल स्नान' किया जाता है। मंगल स्नान में लड़की को पांच महिलाएं नहलाती हैं, जिसमें लड़की की मां नहीं होती है। पीरियड्स के दौरान लड़की के लिए अलग कमरे का इंतजाम किया जाता है। इस दौरान लड़की को कहीं आने-जाने की भी मनाही होती है। 'पेडमनिषी पंडगा' समारोह जितने दिन तक चलता है इस दौरान लड़की के खाने से लेकर गद्दे तक हर चीज अलग की जाती है। आखिरी दिन में लड़की को चंदन का लेप लगाया जाता है। साथ ही लड़की का चाचा लड़की को उपहार में साड़ी और ज्वेलरी देता है।



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