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Muharram 2025: शिया और सुन्नी मुसलमान कैसे मनाते हैं मुहर्रम? जानें दोनों परंपराओं में फर्क
Muharram 2025: मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना होता है और इसे इस्लाम में बेहद पवित्र माना जाता है। खासतौर पर यह महीना पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है, जो 680 ईस्वी में कर्बला के युद्ध में शहीद हुए थे।
हालांकि, शिया और सुन्नी दोनों समुदाय मुहर्रम को अहमियत देते हैं, लेकिन इसे मनाने का तरीका, भावनाएं और धार्मिक क्रियाएं दोनों में काफी हद तक अलग होती हैं। आइए जानते हैं कि सिया और सुन्नी कैसे मनाते हैं मुहर्रम?

1. मुहर्रम का महत्व: भावनात्मक दृष्टिकोण
शिया समुदाय के मुस्लिम कैसे मनाते हैं मुहर्रम?
मोहर्रम इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत का प्रतीक है। यह गहरा शोक का समय होता है। उनके लिए मुहर्रम कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम और सच्चाई के लिए कुर्बानी की याद है।
सुन्नी समुदाय के मुस्लिम कैसे मनाते हैं मुहर्रम?
अब बात कर लेते हैं सुन्नी समुदाय के लोगों की जो इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं, लेकिन मातम और ताजिया जैसे रीति-रिवाज आम तौर पर नहीं करते। उनके लिए यह महीना उपवास और प्रार्थना का समय होता है।

2. सिया और सुन्नी दोनों की परंपराओं में क्या फर्क?
शिया समुदाय की परंपराएं
मजलिस (शोक सभाएं) आयोजित की जाती हैं
मातम किया जाता है जिसमें लोग छाती पीटते हैं
ताजिया और जुलूस निकाले जाते हैं
कर्बला की कहानी और हुसैन की कुर्बानी का वर्णन होता है
10वें दिन यानी आशूरा को सबसे ज्यादा शोक मनाया जाता है
सुन्नी समुदाय की परंपराएं
वे आशूरा के दिन रोजा रखते हैं (जो पैगंबर के समय से है)
शोक सभाएं कम ही होती हैं, मातम नहीं किया जाता
इमाम हुसैन की कुर्बानी को श्रद्धांजलि दी जाती है, लेकिन ताजिया या जुलूस कम देखा जाता है
धार्मिक उपदेश और कुरान पढ़ना प्रमुख होता है

3. दोनों समुदाय में सामाजिक और सांस्कृतिक फर्क
शिया समुदाय मुहर्रम को बहुत भावुकता और श्रद्धा से मनाता है, वहीं सुन्नी समुदाय इसे एक आध्यात्मिक समय मानते हैं जिसमें प्रार्थना और उपवास को प्राथमिकता दी जाती है। शिया समुदाय में मुहर्रम के दौरान कई लोग काले कपड़े पहनते हैं, बाल नहीं कटवाते और शादी जैसे समारोह नहीं करते। यह शोक की प्रतीकात्मकता है।



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