National Ice Cream Day 2026: क्यों मनाया जाता है यह खास दिन? जानिए इतिहास और भारत में कैसे पहुंची आइसक्रीम

National Ice Cream Day 2026: आइसक्रीम उन चुनिंदा डिजर्ट में शामिल है, जिसे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बड़े चाव से खाते हैं। गर्मियों के मौसम में इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि हर साल दुनिया के कई देशों में जुलाई के तीसरे रविवार को नेशनल आइसक्रीम डे मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ आइसक्रीम का स्वाद लेने का मौका नहीं होता, बल्कि इसके इतिहास, लोकप्रियता और इससे जुड़ी दिलचस्प जानकारियों को जानने का भी अवसर होता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ बाजार में मिलने वाली ज्यादा प्रोसेस्ड आइसक्रीम की बजाय घर पर बनी ताजी आइसक्रीम को बेहतर मानते हैं।

National Ice Cream Day 2026

नेशनल आइसक्रीम डे कब और क्यों मनाया जाता है?

हर साल जुलाई के तीसरे रविवार को नेशनल आइसक्रीम डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य आइसक्रीम उद्योग को बढ़ावा देना और लोगों की पसंदीदा इस मिठाई का जश्न मनाना है। कई जगह इस मौके पर विशेष ऑफर, फूड फेस्टिवल और आइसक्रीम से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। यह दिन लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ मीठे पल बिताने का अवसर भी देता है।

कैसे हुई नेशनल आइसक्रीम डे की शुरुआत?

नेशनल आइसक्रीम डे की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। साल 1984 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने जुलाई के तीसरे रविवार को नेशनल आइसक्रीम डे और पूरे जुलाई महीने को नेशनल आइसक्रीम मंथ घोषित किया था। उनका मानना था कि आइसक्रीम अमेरिका की सबसे पसंदीदा डिजर्ट में से एक है और इसे सम्मान देने के लिए एक विशेष दिन होना चाहिए। इसके बाद से यह परंपरा कई देशों में लोकप्रिय हो गई।

आइसक्रीम का अविष्कार कैसे हुई?

आइसक्रीम का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है। प्राचीन फारस में लोग बर्फ पर फलों का रस डालकर ठंडा मीठा व्यंजन तैयार करते थे, जिसे गर्मियों में बड़े शौक से खाया जाता था। बाद में यूरोप में दूध और क्रीम से बनने वाली आधुनिक आइसक्रीम का विकास हुआ। माना जाता है कि इटली ने इसे नया रूप दिया, जिसके बाद यह धीरे-धीरे दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंची और अलग-अलग फ्लेवर के साथ लोकप्रिय होती चली गई।

भारत में कब और कैसे पहुंची आइसक्रीम?

भारत में आइसक्रीम का इतिहास भी काफी रोचक है। माना जाता है कि मुगल काल में शाही रसोई में बर्फ, दूध और फलों से ठंडे मीठे व्यंजन तैयार किए जाते थे। अकबर के समय कश्मीर और हिमालयी क्षेत्रों से बर्फ मंगाकर विशेष मिठाइयां बनाई जाती थीं, जिनका उल्लेख आइने-ए-अकबरी जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है। बाद में अंग्रेजों के शासनकाल में आधुनिक आइसक्रीम बनाने की तकनीक भारत आई। 19वीं सदी में इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह आम लोगों तक भी पहुंच गई।

आइसक्रीम खाने के फायदे

जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत

आइसक्रीम में दूध से मिलने वाले कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन-ए और विटामिन-डी जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में मदद कर सकता है।

शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है

आइसक्रीम में कार्बोहाइड्रेट और शुगर होती है, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा देने का काम करती है। थकान महसूस होने पर सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर में ग्लूकोज की पूर्ति करने में मदद कर सकता है।

मूड बेहतर करने में सहायक

विशेषज्ञों के अनुसार, पसंदीदा चीजें खाने से दिमाग में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे रसायनों का स्तर बढ़ सकता है, जिससे मन खुश महसूस करता है। इसलिए कई लोगों को आइसक्रीम खाने के बाद अच्छा महसूस होता है। हालांकि, अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए।

Story first published: Sunday, July 19, 2026, 10:12 [IST]
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