Latest Updates
-
नाखूनों से होली का पक्का रंग छुड़ाने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय, मिनटों में दूर हो जाएंगे सारे निशान -
Holi 2026: रंगों की मस्ती में न आए कोई परेशानी, इन सावधानियों के साथ मनाएं सुरक्षित होली -
क्या Chandra Grahan के दौरान शारीरिक संबंध बनाना सही है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम -
Holi Wishes 2026 For In-Laws: सास-ससुर से लेकर साले-साली तक; होली पर ससुराल वालों को भेजें ये प्यार भरे संदेश -
Chandra Grahan 2026: आज साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण; अनिष्ट से बचने के लिए राशि अनुसार करें इन चीजों का दान -
Holi 2026 Wishes For Jiju: मीठी-मीठी गुझिया खाइए...इन मजेदार शायरियों से जीजा जी को दें होली की शुभकामनाएं -
Chandra Grahan 2026: क्या सूतक काल में गर्भवती महिलाएं सो सकती हैं? जानें क्या कहता है शास्त्र और विज्ञान -
Happy Holi Wishes 2026: पिचकारी में भर लिया रंग…होली पर दोस्तों और प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Happy Holi My Dear Husband: इस होली अपने पति को भेजें ये चुनिंदा प्रेम भरे संदेश, और भी गहरा होगा आपका बंधन -
Holi Wishes in Banarasi Style: का बे, रंगवाओगे कि खाली मुसुराओगे? आपके दोस्तों-रिश्तेदारों के लिए बनारसी मैसेज
Old vs New Lady Justice: ‘न्याय की देवी’ की आंखों में पट्टी और तलवार का क्या मतलब है? कैसे पहुंची भारत
Old vs New Lady Of justice statue : सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में न्याय की देवी (लेडी ऑफ जस्टिस) की एक नई मूर्ति लगाई गई है, जो चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मूर्ति की विशेषता यह है कि इसकी आंखों पर बंधी पट्टी हटा दी गई है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। पारंपरिक रूप से, न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी होती थी, जो इस बात का प्रतीक थी कि कानून सबके लिए समान है और वह बिना किसी भेदभाव के न्याय करता है।
इस नई प्रतिमा की कल्पना मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की है। उनके निर्देशन में यह मूर्ति सुप्रीम कोर्ट की जजों की लाइब्रेरी में स्थापित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि "कानून अंधा नहीं है और यह सिर्फ सजा का प्रतीक नहीं है।" आइए जानते हैं नई और पुरानी लेडी ऑफ जस्टिस की मूर्ति का मतलब और इससे जुडा इतिहास।

नई मूर्ति की विशेषताएं
आंखों से पट्टी हटाई गई है: यह बदलाव यह संदेश देता है कि कानून अंधा नहीं है और वह खुली आंखों से न्याय करता है। इसका अर्थ यह है कि कानून को सभी तथ्यों और परिस्थितियों को समझते हुए निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।
तलवार की जगह संविधान: नई मूर्ति के हाथ में अब तलवार की बजाय संविधान की प्रति रखी गई है, जो इस बात का प्रतीक है कि संविधान ही सबसे सर्वोपरि है और कानून का आधार है। तलवार, जो पहले सजा और अधिकार का प्रतीक होती थी, उसे हटाकर न्याय में संवैधानिक प्रक्रिया की महत्ता को दर्शाया गया है।
तराजू का महत्व: मूर्ति के दाहिने हाथ में तराजू अब भी मौजूद है, जो संतुलन और निष्पक्षता का प्रतीक है। तराजू इस बात का प्रतीक है कि न्याय प्रणाली किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों के तर्कों और तथ्यों को सुनकर संतुलित रूप से विचार करती है। यह नई मूर्ति न्यायिक व्यवस्था में संविधान की सर्वोच्चता और निष्पक्षता के महत्व को दर्शाती है।
पुरानी मूर्ति की मतलब
आंखों पर पट्टी: पुरानी मूर्ति में आंखों पर बंधी पट्टी न्याय की निष्पक्षता को दर्शाती थी, कि कानून किसी व्यक्ति की पहचान, स्थिति, या पृष्ठभूमि को देखे बिना न्याय करता है।
तलवार: पुरानी मूर्ति में तलवार न्याय और अन्याय को दंडित करने की शक्ति का प्रतीक थी।
तराजू: पुरानी और नई मूर्ति, दोनों में तराजू मौजूद है, जो निष्पक्षता और संतुलन का प्रतीक है।
दुनिया भर में न्याय की देवी की मूर्तियों के विभिन्न रूप:
दुनिया भर में न्याय की देवी (Lady of Justice) की मूर्तियां विभिन्न देशों और संस्कृतियों में अलग-अलग रूप में दिखाई देती हैं, जिसमें किसी के आंखों में पट्टी होती हैं, तो किसी के नहीं होती है।
अमेरिका: अमेरिका में न्याय की देवी की मूर्ति की आंखों पर पट्टी बंधी होती है, जो यह दर्शाती है कि न्याय बिना किसी भेदभाव के और निष्पक्ष रूप से होता है। इसके हाथ में तराजू और तलवार होती है, जो क्रमशः संतुलन और कानून की शक्ति का प्रतीक हैं।
जर्मनी: जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित न्याय की देवी की मूर्ति बिना पट्टी के दिखाई जाती है। इसका यह मतलब है कि न्याय करने वाले को सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान से देखना और समझना चाहिए, फिर निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।
इंग्लैंड: ब्रिटेन में न्याय की देवी की मूर्तियां अक्सर पट्टी के साथ देखी जाती हैं, लेकिन वहां न्याय का प्रतीकवाद संविधान और कानून की प्रक्रिया के साथ अधिक जुड़ा हुआ है। यह ब्रिटिश कानूनी प्रणाली की पारंपरिक प्रतिष्ठा का हिस्सा है।
यूनान (ग्रीस) और रोम: न्याय की देवी की उत्पत्ति प्राचीन ग्रीक और रोमन पौराणिक कथाओं से मानी जाती है। ग्रीस में न्याय की देवी को थेमिस और रोम में जस्टिटिया के रूप में जाना जाता था। थीमिस और जस्टिटिया को भी एक तराजू और कभी-कभी तलवार के साथ दिखाया जाता है, लेकिन हमेशा उनकी आंखों पर पट्टी नहीं होती थी।
भारत कैसे पहुंची लेडी ऑफ जस्टिस?
भारत में लेडी ऑफ जस्टिस का कॉन्सेप्ट ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान आया। जब ब्रिटिश शासन ने भारत में अपनी अदालतों और कानूनी संस्थानों की स्थापना की। तब इस मूर्ति को ब्रिटिश कानून और न्याय प्रणाली के साथ भारत में स्थापित की गईं, और तभी से भारत की न्यायिक प्रणाली में इनका एक अहम स्थान है।
भारतीय न्याय प्रणाली में, रोमन पौराणिक कथाओं की जस्टिटिया देवी को लेडी ऑफ जस्टिस के तौर पर दिखाया गया है। जिनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में तराजू हैं। उनके आंखों में पट्टी बंधी हुई हैं। भारत में न्याय की देवी की मूर्तियां आपको अदालतों, लॉ कॉलेजों, और अन्य कानूनी संस्थानों में दिखाई देंगी।



Click it and Unblock the Notifications











