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Pankaj Udhas Ghazal: पंकज उधास ने दुनिया को कहा अलविदा, इन गजलों के साथ दें उन्हें श्रद्धांजलि
Pankaj Udhas Death: पंकज उधास एक प्रसिद्ध भारतीय गायक और संगीतकार हैं, जिन्होंने हिन्दी और उर्दू भाषा में अनेक लोकप्रिय गाने गाए हैं। वो अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय गायन शैली के लिए विख्यात हैं। उनके प्रशंसकों में हर उम्र के लोग शामिल हैं।
पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को भारत के राजस्थान राज्य के गांधीनगर नामक शहर में हुआ था। उनके परिवार में संगीत के प्रति रुचि थी, और उनके पिता रामप्यारे उधास भी एक उत्कृष्ट गायक थे। पंकज उधास ने भी अपने पिता से संगीत की शिक्षा प्राप्त की और बाद में मुंबई में गायन करियर की शुरुआत की।

पंकज उधास ने बॉलीवुड में अनेक लोकप्रिय गाने गाए हैं, जैसे कि "चिट्ठी आई है", "नजर के सामने जिगर के पास", "मैं तो तेरे प्यार में दीवाना" आदि। उनकी गायकी की खासियत थी उनकी गहराई और भावनात्मकता जिसने उन्हें एक अलग पहचान दी।
उन्होंने भारतीय संगीत उद्योग में अपनी अद्वितीय धारा बनाई और अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने गायन की दुनिया में अपनी अमूल्य योगदान दिया और आज भी उनके गाने संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं।
मगर आज यानी 26 फरवरी 2024 में उनके चाहने वालों को एक बड़ा झटका लगा है। लंबी बीमारी के बाद पंकज उधास ने 72 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वो अपने प्रशंसकों की आंखे नम करके चले गए। यहां एक बार फिर याद करते हैं उनकी मशहूर गजलें और गीत जो आज भी सदाबहार हैं और उनकी याद भविष्य में भी दिलाते रहेंगे।

Pankaj Udhas Famous Songs and Ghazals List
पंकज उधास की मशहूर गजलें
1. चिट्ठी आई है, चिट्ठी आई है - फिल्म: नाम
हम्म.. हम्म.. हम्म..
चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है
चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है
चिट्ठी आई है वतन से, चिट्ठी आयी है
बड़े दिनों के बाद, हम बेवतनों को याद
बड़े दिनों के बाद, हम बेवतनों को याद
वतन की मिट्टी आई है..ए..
चिट्ठी आई है आई है, चिट्ठी आई है
चिट्ठी आई है वतन से, चिट्ठी आयी है
ऊपर मेरा नाम लिखा है
अंदर ये पैगाम लिखा है
ओ परदेस को जाने वाले
लौट के फिर ना आने वाले
सात समुंदर पार गया तू
हमको ज़िंदा मार गया तू
खून के रिश्ते तोड़ गया तू
आँख में आँसू छोड़ गया तू
कम खाते हैं, कम सोते हैं
बहुत ज़्यादा हम रोते हैं
चिट्ठी आई है
चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है
चिट्ठी आई है वतन से, चिट्ठी आयी है
2. चांदी जैसा रंग है तेरा - फिल्म: एक ही मकसद
चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल
एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल
चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल
एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल
एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल
जिस रस्ते से तू गुज़रे वो फूलों से भर जाये
जिस रस्ते से तू गुज़रे वो फूलों से भर जाये
तेरे पैर की कोमल आहट सोते भाग जगाये
जो पत्थर छू ले गोरी तू वो हीरा बन जाये
तू जिसको मिल जाए वो
तू जिसको मिल जाए वो, हो जाये मालामाल
एक तूही धनवान है गोरी, बाकी सब कंगाल
चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल
एक तूही धनवान है गोरी बाकी सब कंगाल
3. न कजरे की धार, न मोतियों के हार - फिल्म:मोहरा
[ना कजरे की धार ना मोतियों के हार ना कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुंदर हो तुम कितनी सुन्दर हो] x2
मन में प्यार भरा और तन में प्यार भरा जीवन में प्यार भरा तुम तो मेरे प्रियवर हो तुम्हीं तो मेरे प्रियवर हो
सिंगार तेरा यौवन, यौवन ही तेरा गहना सिंगार तेरा यौवन, यौवन ही तेरा गहना तू ताज़गी फूलों की, क्या सादगी का कहना उड़े खुशबू जब चले तू, उड़े खुशबू जब चले तू, बोले तो बजे सितार
ना कजरे की धार ना मोतियों के हार ना कोई किया सिंगार फिर भी कितनी सुंदर हो तुम कितनी सुन्दर हो
4. घूंघट को मत खोल - एल्बम: घूंघट
छम छ्म करके कहते है
ये पायलिया के बोल
छम छ्म करके कहते है
ये पायलिया के बोल
छम छ्म करके कहते है
ये पायलिया के बोल
घुँघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
घुघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
छम छ्म करके कहते है
ये पायलिया के बोल
घुँघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
घुघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
सुन्दरता का तेज अनोखा
इसको गोरी छुपा के रखना
कजरे नैनो की नगरी
युँ ही सजा के रखना
घुँघट मे ही रुप का धन है
नही है इसका मोल
घुँघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
छम छ्म करके कहते है
ये पायलिया के बोल
घुँघट को मत खोल
के गोरी घुँघट है अनमोल
5. गजल - थोड़ी थोड़ी पिया करो - एल्बम: आफरीन vol. 2
ये इंतजार गलत है के शाम हो जाये
जो हो सके तो अभी दौर-ए-जाम हो जाये
मुझ जैसे रिंद को भी तूने हश्र मे या रब
बुला लीया है तो, कुछ इंतजाम हो जाये
हुई महँगी बहत ही शराब, के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
पियो लेकिन रखो हिसाब, के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
हुई महँगी बहत ही शराब, के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
गम का दौर हो या हो खुशी, समा बाँधती है शराब
गम का दौर हो या हो खुशी, समा बाँधती है शराब
गम का दौर हो या हो खुशी, समा बाँधती है शराब
एक मशवरा है जनाब के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
हुई महँगी बहत ही शराब, के थोड़ी-थोड़ी पिया करो
6. चुपके चुपके सखियों से वो बातें करना भूल गयी - फिल्म: महक
चुपके चुपके सखियों से वो
बातें करना भूल गई
मुझको देखा पनघट पे तो
पानी भरना भूल गई
पहले शायद उसको मेरे
चेहरे का अंदाज़ ना था
मुझसे आँखें टकराईं तो
खुद पे मरना भूल गई
चुपके चुपके सखियों से वो...
सच पूछो तो मेरी वजह से
उसको ऐसा रोग लगा
काजल मेहंदी कंगन बिंदिया
से संवरना भूल गई
चुपके चुपके सखियों से वो...
क्या जाने कब उससे मिलने
आ जाऊँ इस ख्वाहिश में
छत पर बैठी रहती है वो
छत से उतरना भूल गई
चुपके चुपके सखियों से वो...
7. गजल - और आहिस्ता कीजिये बातें - एल्बम: Stolen Moments
और आहिस्ता कीजिए बातें
धड़कनें कोई सुन रहा होगा
और आहिस्ता कीजिए बातें
धड़कनें कोई सुन रहा होगा
लफ़्ज़ गिरने ना पाए होंठों से
वक़्त के हाथ इनको चुन लेंगे
कान रखते हैं ये दर-ओ-दीवार
राज़ की सारी बात सुन लेंगे
और आहिस्ता कीजिए बातें
ऐसे बोलो के दिल का अफ़साना
दिल सुने और निगाह दोहराए
ऐसे बोलो के दिल का अफ़साना
दिल सुने और निगाह दोहराए
अपने चारों तरफ़ की ये दुनिया
साँस का शोर भी ना सुन पाए, ना सुन पाए
और आहिस्ता कीजिए बातें
धड़कनें कोई सुन रहा होगा
लफ़्ज़ गिरने ना पाए होंठों से
वक़्त के हाथ इनको चुन लेंगे
कान रखते हैं ये दर-ओ-दीवार
राज़ की सारी बात सुन लेंगे
और आहिस्ता कीजिए बातें
8. गजल - दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है - एल्बम: Mu-Kar-Rar
दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से
दुनिया भर की यादें हमसे मिलने आती हैं
दुनिया भर की यादें हमसे मिलने आती हैं
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से
कितने दिनों के प्यासे होंगे यारों सोचो तो
कितने दिनों के प्यासे होंगे यारों सोचो तो
शबनम का कतरा भी जिनको दरिया लगता है
शबनम का कतरा भी जिनको दरिया लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से
किसको कैसर पत्थर मारूं कौन पराया है
किसको कैसर पत्थर मारूं कौन पराया है
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है
दीवारों से
9. निकलो न बेनकाब - एल्बम नायाब vol. 1
बे पर्दा नज़र आई जो कल चंद बिवियाँ
अकबर जमीन में गैरत-ए-कौनी से गड गया
पूछा जो मैने, आपका पर्दा वो क्या हुआ
कहने लगी के, अक्ल पे मर्दों की पड़ गया
निकलो ना बेनकाब
निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
और उसपे ये शबाब जमाना ख़राब है
निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
सब कुछ हमे खबर है नसीहत ना कीजिए
सब कुछ हमे खबर है नसीहत ना कीजिए
सब कुछ हमे खबर है नसीहत ना कीजिए
सब कुछ हमे खबर है नसीहत ना कीजिए
क्या होंगे हम ख़राब ज़माना ख़राब है
क्या होंगे हम ख़राब ज़माना ख़राब है
और उसपे ये शबाब जमाना ख़राब है
निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
मतलब छुपा हुआ है यहाँ हर सवाल में
मतलब छुपा हुआ है यहाँ हर सवाल में
मतलब छुपा हुआ है यहाँ हर सवाल में
मतलब छुपा हुआ है यहाँ हर सवाल में
दूँ सोचकर जवाब जमाना ख़राब है
दूँ सोचकर जवाब जमाना ख़राब है
और उसपे ये शबाब जमाना ख़राब है
निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है
10. गजल - एक तरफ उसका घर - एल्बम: पीने वालों सुनों
ऐ गम-ए-ज़िंदगी कुछ तो दे मशवरा
ऐ गम-ए-ज़िंदगी कुछ तो दे मशवरा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
मैं कहाँ जाऊँ होता नहीं फ़ैसला
मैं कहाँ जाऊँ होता नहीं फ़ैसला
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
ज़िंदगी एक है और तलबगार दो
ज़िंदगी एक है और तलबगार दो
जां अकेली मगर जां के हक़दार दो
ज़िंदगी एक है और तलबगार दो
जां अकेली मगर जां के हक़दार दो
दिल बता पहले किसका करूँ हक अदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
ऐ गम-ए-ज़िंदगी कुछ तो दे मशवरा
ऐ गम-ए-ज़िंदगी कुछ तो दे मशवरा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
एक तरफ उसका घर, एक तरफ मयकदा
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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