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Paris Olympics 2024: ओलंपिक विजेता मेडल को दांतों से क्यों काटते हैं? ये हैं वजह
Paris Olympics 2024: पेरिस ओलंपिक का 26 जुलाई से आगाज होने वाला है, यह गेम्स 11 अगस्त तक चलेंगे। इस बार ओलंपिक मेडल के लिए दुनियाभर के 10 हजार खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे। ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले हर एथलीट का सपना होता है कि वो देश के लिए मेडल जीते और उसके बाद उसे लेकर परांपरा को निभाते हुए दांतों से काटते हुए फोटो खिंचवाएं।
ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स जैसे गेम्स में आपने पोडियम पर मेडल को काटते हुए एथलीट्स को तस्वीरें खिंचवाते हुए देखा होगा, अब सवाल यह भी है कि आखिर खिलाड़ी ऐसा क्यों करते हैं? क्या ऐसा कोई नियम हैं।

क्या सोने की परख के लिए ऐसा करते हैं खिलाड़ी?
कई लोगों का मानना हैं कि पुराने समय में सोने के सिक्कों की परख के लिए व्यापारी उनको काटते थे, शायद खिलाड़ी भी ऐसा करते हैं। लेकिन आपको बता दें कि ये बात बिल्कुल गलत है। क्योंकि ओलंपिक में दिया जाने वाले मेडल में सोने का कम चांदी का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। 1912 तक ही सोने के मेडल दिए जाते थे। इसके पीछे अलग वजह है।
पोज के लिए करते हैं ऐसा
मेडल को काटने की असली वजह ये है कि खिलाड़ियों को ऐसा करने के लिए फोटोग्राफर कहते हैं, ओलंपिक वेबसाइट के मुताबिक एथलीट सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए मेडल को दांतों से काटते हैं। फोटोग्राफर ही एथलीट्स को ये पोज देने के लिए कहते हैं।
राष्ट्रमंडल गेम्स हो या ओलंपिक गेम हो, मेडल को काटने की प्रथा काफी लंबे समय से चलते आ रही है। हर एथलीट मेडल का ये सपना है कि वो मेडल जीतकर इस ऑइकोनिक पोज को दे। 2010 ओलंपिक में तो जर्मन के लुगर डेविड मोलर ने मेडल को काटते समय अपना एक दांत गंवा दिया था।



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