Premanand Maharaj Family Tree: प्रेमानंद महाराज के परिवार में कौन-कौन? जानें वृंदावन के संन्यासी का असली नाम

Premanand Maharaj Family Tree: वृंदावन के मशहूर और सम्मानित संत प्रेमानंद महाराज की इन दिनों तबीयत बहुत खराब है। उन्होंने बिगड़ी हुई तबीयत के चलते पदयात्रा भी बंद कर दी है और अभी सत्संग भी नहीं कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज के भक्त उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंतित हैं और उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। हवन और यज्ञ किए जा रहे हैं जिसमें हिंदू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोग शामिल हो रहे हैं। हर धर्म के भक्तों को प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। इसी बीच लोगों के मन में महाराज के परिवार के बारे में और उनके असली नाम के बारे में व पर्सनल लाइफ के बारे में जानने की जिज्ञासा हो रही है।

आज बेशक वो इतने मशहूर संत बन गए हैं जिनके भक्तों की लाइन देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। मगर अपने शुरुआती जीवन में उन्होंने बहुत कष्ट झेला और मार भी खाई जिसके बारे में खुद प्रेमानंद महाराज ने बताया है। आइए आज हम जानते हैं संत के परिवार और उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते होंगे।

Premanand Maharaj Family Tree

क्या है प्रेमानंद महाराज का असली नाम?

प्रेमानंद महाराज का जन्म साल 1969 में कानपुर (उत्तर प्रदेश) के अखारी गांव में हुआ था। उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आज देश और दुनिया में प्रेमानंद महाराज के नाम से पहचान बनाने वाले संत का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय था। उन्होंने संत बनने से पहले अपना असली नाम बदल दिया और इसी नाम से जाने जाते हैं व अपने भक्तों के दिलों पर राज करते हैं। बता दें कि बचपन से ही प्रेमानंद महाराज गृहस्थ जीवन से अलग थे और भक्ति में लीन रहते थे।

13 साल की उम्र में छोड़ा घर

प्रेमानंद महाराज बचपन से ही दुनियादारी से अलग रहते थे और भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया। ये वो उम्र थी जब बच्चे खेलते-कूदते हैं और मस्ती करते हैं, मगर प्रेमानंद महाराज भक्ति के मार्ग पर निकल पड़े और सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। हालांकि उनके परिवार के लिए ये फैसला लेना आसान नहीं था लेकिन संत के सामने किसकी चलती है।

कैसे मिला प्रेमानंद महाराज नाम?

ये तो आपने जान लिया कि प्रेमानंद महाराज का असली नाम किया था लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि उन्होंने एक बार नहीं बल्कि दो बार अपना नाम बदला। संन्यास लेने के शुरुआती समय में उनका नाम 'आर्यन ब्रह्मचारी' रखा गया। उन्होंने कठोर साधना की और फिर वो कृष्ण भक्ति में लीन हो गए और वृंदावन पहुंच गए। वहां वो राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़े और वहीं उनकी साधना से प्रभावित होकर उन्हें प्रेमानंद महाराज नाम मिला जो आज उनकी असली पहचान बन गया है।

प्रेमानंद महाराज के परिवार में कौन-कौन

अब ये जान लेते हैं कि प्रेमानंद महाराज के पिता का नाम शंभू पांडे और माता का नाम रमा देवी था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम और पहचान गुप्त रखी गई है। बता दें कि प्रेमानंद महाराज अपने परिवार के बारे में न तो खुद बहुत बात करते हैं और न ही किसी न्यूज पोर्टल पर उनके बारे में ज्यादा जानकारी है।

किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे प्रेमानंद

जब प्रेमानंद महाराज 35 साल के थे तो उन्हें अचानक से पेट में दर्द हुआ और जब डॉक्टर ने जांच की तो पता चला कि उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। अब वो डायलिसिस पर चल रहे हैं। प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने उन्हें कई बार किडनी देने की इच्छा जाहिर की है लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा कि जब तक श्रीजी और श्रीहरि की इच्छा है वो धरती पर हैं और फिर अपने परमात्मा से जाकर मिलेंगे।

प्रेमानंद महाराज ने खुद बताया कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष झेला है। जब पता चला कि उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी हो गई है को आश्रम के महाराज ने उन्हें ये कहकर निकाल दिया कि हम तुम्हारे ठेकेदार नहीं हैं। कई-कई दिन तक खाना खाने के लिए नहीं मिलता था। एक दिन तो सड़क पर चलते हुए उन्हें एक आदमी ने गाड़ी से उतरकर उन्हें बेवजह मारा लेकिन एक बुढ़िया अम्मा ने उन्हें बचाया।

Story first published: Tuesday, October 14, 2025, 11:09 [IST]
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