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पीटी उषा : इंदिरा गांधी के खत से मिली प्रेरणा तो अद्भुत एथलीट ने लिखा स्वर्णिम इतिहास, बनीं एशियाई सुपरवुमन
PT Usha achievements- आम लोगों की जिंदगी में एक सेकंड की अहमियत बहुत अधिक नहीं होती है, लेकिन एक सेकेंड की अहमियत एक एथलिट से ज्यादा कोई नहीं जान सकता। जब खेल की दुनिया में सेकंड के सौवें हिस्से से आपकी जीत और हार डिसाइड होती हो। भारतीय स्प्रिंटर पीटी उषा (PT Usha) से एक सेकेंड के सौवें हिस्से की अहमियत बता सकती हैं। जब वो उस दिन भारत के लिए मेडल ना जीत इतिहास रचने से चूक गई।

भारत की उड़न परी नाम से मशहूर पीटी उषा का पूरा नाम पिलावुल्लाकांडी थेक्केपराम्बिल उषा आज 59वां जन्मदिन मना रही हैं। पीटी उषा देश की महान एथलीटों में शामिल है। 80 से 90 के दशक तक पीटी उषा दुनिया की सबसे तेज़ महिला धावकों में से एक थीं। पीटी उषा को भारतीय एथलेटिक्स की 'गोल्डन गर्ल' भी कहा जाता है।
पीटी उषा की सबसे खास बात ये रही कि उसको उस मेडल के लिए दुनिया याद करती है, जो उन्होंने जीता ही नहीं था। 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पीटी उषा ने महिलाओं की 400 मीटर हर्डल रेस में 55.42 सेकेंड के समय के साथ चौथा स्थान पाया था, वो सिर्फ 1/100 सेकंड के अंतर से पदक जीतने से चूकी थीं।

जब इंदिरा गांधी ने पीटी उषा के लिए लिखा खत
पीटी उषा की इस हार के बाद भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने उन्हें हौसला दिया था। olympics.com के अनुसार, टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए उषा ने कहा, "मुझे इंदिरा गांधी जी की तरफ से एक संदेश मिला, जिसमें लिखा था 'उषा मेरी बेटी, तुमने देश के लिए बहुत कुछ किया है। तुम निराश न होना और अगली बार के लिए और मेहनत करना, हम सब तुम्हारे साथ हैं।' उस एक ख़त ने मुझे प्रेरणा दी।"
पीटी उषा के विश्व रिकॉर्ड और पुरस्कार
पीटी उषा ने कई सारे विश्व रिकॉर्ड और पुरस्कार प्राप्त किये हैं। रिटायमेंट लेने से पहले स्प्रिंट खिलाड़ी पीटी उषा ने 1998 में जापान में एशियन चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित चार पदक जीते थे। पीटी उषा को दुनियाभर के पुरस्कार, मेडल और सम्मान प्राप्त हैं, इसके साथ ही कुछ कॉन्ट्रोवर्सीज भी उनके साथ जुड़ी हुई हैं। आइये जानते हैं उनके जीत के सफर के बारें में और कुछ उनसे जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सीज के बारें में-
-पीटी उषा ने 1980 में मॉस्को ओलंपिक में भाग लिया। वो इसमें हिस्सा लेने वाली 16 साल की सबसे कम उम्र की भारतीय धावक थीं।
-पीटी उषा ने ओलंपिक लॉस एंजेलिस 1984, महिलाओं की 400 मीटर हर्डल रेस में एथलेटिक्स मीट के फ़ाइनल में क्वालीफ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
-उन्होंने 1980 में कराची अंतर्राष्ट्रीय आमंत्रण बैठक में चार स्वर्ण पदक जीते थे।
-1982 के एशियन गेम्स में पीटी उषा व्यक्तिगत इवेंट (100 मीटर, 200 मीटर) में दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए।
-भारतीय स्प्रिंटर पीटी उषा ने 100 मीटर रेस में 11.95 की टाइमिंग के साथ लीडिया डी वेगा के पीछे यानी कि सेकेंड नंबर पर रहीं।
-पीटी उषा ने 1985 को सर्वश्रेष्ठ रेलवे एथलीट का खिताब पाया था। वो ऐसा करने वाली पहली भारतीय एथलीट थीं।
-अपने करियर में पय्योली एक्सप्रेस नाम से मशहूर उषा ने 100 से ज़्यादा इंटरनेशनल मेडल जीते हैं, बहुत से नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किये हैं।

-पीटी उषा को सबसे खतरनाक एशियन एथलीट में से एक माना जाता हैं।
-पीटी उषा को 1984 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वो पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित है।
-2022 में, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला हैं।
-भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष का पद संभालने वाली पहली ओलंपियन भी हैं।
-पीटी उषा 'उषा स्कूल ऑफ़ एथलेटिक्स' भी रन करती हैं। ये एकेडमी केरला में है जो उन युवाओं को पंख देती है जो उड़ना चाहते हैं, ओलंपिक में मेडल के सपने लिए देश का नाम रौशन करना चाहते हैं।
पीटी उषा से जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सी
पिछले कुछ महीनों से जारी भारतीय पहलवानों के प्रदर्शन के बीच भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा के दिल्ली स्थित जंतर-मंतर जानें पर विरोध हुआ। पीटी उषा ने पहलवानों के प्रदर्शन को अनुशासनहीन बताया था
Image Courtesy- PT Usha / Facebook
twitter- Doordarshan Sports



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