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जानिये जीवन और मृत्यु से जुड़े कुछ अजीबो गरीब रहस्य
मृत्यु एक शाश्वत सत्य है जिससे कोई भी इंकार नहीं सकता है। जो भी व्यक्ति या वस्तु इस संसार में जन्मी है उसे एक न एक दिन समाप्त होना ही है। मृत्यु होती ही है लेकिन उसके कारण अलग-अलग होते है, कभी कोई दुर्घटना में चल बसता है तो कोई बीमारी में।
बुद्ध भगवान का कहना है कि हम जब भी सोते हैं तो एक प्रकार से मर ही जाते हैं क्योंकि उस समय दिमाग में कुछ भी नहीं चल रहा होता है।
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कुछ लोग पर्याप्त जीवन जिएं बिना ही चल बसते हैं और कुछ लोग पूरा जीवन व्यतीत करने के बाद मृत्यु को प्राप्त होते हैं। यह सब कुछ भाग्य पर निर्भर करता है। बस अक्सर लोगों की इच्छा होती है कि उनकी मृत्यु किसी भी गंभीर बीमारी से न हों।
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आज बोल्डस्काई के इस आर्टिकल में हम आपको जीवन और मृत्यु से सम्बंधित कुछ विचित्र किन्तु सत्य तथ्यों को बताने जा रहे हैं जिन्हे जानकर आपको आश्चर्य होगा।

दहेज:
भारत एक ऐसा देश है जहां बेटियों के विवाह के लिए धन देना पड़ता है, जिसे दहेज कहा जाता है। दहेज न मिलने के कारण लोग बहुओं को मार देते हैं और हिंदुस्तान में हर घंटे एक महिला की मृत्यु का कारण दहेज ही होता है।

इलाज में खामी:
पूरी दुनिया में चिकित्सा विज्ञान काफी आगे निकल गई है लेकिन आज भी 440,00 लोग हर साल सिर्फ इलाज की खामियों की वजह से मर जाते हैं।

सुनने की क्षमता:
मरने से पूर्व सुनने की क्षमता अंतिम इंद्री होती है जो समाप्त हो जाता है। मरने से कुछ समय पूर्व व्यक्ति को सुनाई देना बंद हो जाता है, अगर वह सामान्य है तो।

व्यायाम:
सारी दुनिया में कई लोग सिर्फ इसलिए मर जाते हैं क्योंकि वह व्यायाम नहीं करते है। यह एक अप्रत्यक्ष कारण है लेकिन सत्य है।

प्रदूषण:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण है। भयानक वायु प्रदूषण के कारण फेंफडों में गंदी हवा जाती है और उसके जरिए शरीर के खून में भी गंदी हवा चली जाती है।

शोकाकुल लोगों को किराए पर लाना:
ब्रिटेन में एक कम्पनी है - ''रेंट ए मॉउरनर'' जो अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को किराए पर देती है, ये लोग बहुत एक्सपर्ट होते हैं और ठीक रिश्तेदारों की तरह ही शोक व्यक्त करते हैं।

डॉक्टर की खराब लेखनी:
ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि अमेरिका में लगभग 7000 लोग डॉक्टर्स की खराब राईटिंग के कारण मर जाते हैं क्योंकि उनकी सलाह, दवा और परहेज के बारे में सही से पढ़ा नहीं जा सकता है। ऐसा भारत में वहां की अपेक्षा कम होता है।

माउंट एवरेस्ट :
माउंट एवरेस्ट पर लगभग 200 पर्वतारोहियों की डेडबॉडी दबी हुई हैं। वहां ये लाशें सालों-साल दबी रह जाती है।

वेंडिग मशीन:
एक शार्क भी इतनी जानें नहीं लेती है जितनी जानें ये वेंडिग मशीन ले लेती हैं। लोग अक्सर इनमें फंस जाते हैं या उनके सिर में चोट लग जाती है, जब वे इसे हिलाते या हटाते हैं।

जेली फिश:
जेली फिश का एक प्रकार टुररटोपिस होता है जो कभी मरती ही नहीं है। जब कभी यह घायल हो जाती है और मरने ही वाली होती है, इसमें इसकी अद्भुत के कारण यह वापस जवां हो जाती है। इसकी कोशिकाएं पहले से ज्यादा यंग हो जाती हैं।

इरेक्शन/ स्खलन:
व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका इरेक्शन या स्खलन अपने आप हो जाता है क्योंकि उसके पेनिस की परत के द्वारा कैल्शियम के कारण होता है, यह कैल्शियम दबाव पैदा करता है जिसकी वजह से ऐसा हो जाता है।

पाचन एंजाइम्स:
मृत्यु के तीन दिन बाद तक, आपके शरीर के एंजाइम भोजन को पचाने में सक्षम होते हैं।

मृत्यु:
जब से मानव जाति का आर्भिभाव हुआ है तब से अब तक 100 बिलियन लोग मर चुके हैं और तब से अब तक 3,50,000 सालों से शवों को जलाने की परम्परा कई सम्प्रदायों और धर्मों में है।

खास-खास बातें:
दुनिया भर में 153,000 लोग अपने जन्मदिन पर ही मर जाते हैं। उल्टे हाथ से लिखने वाले लोग, सीधे हाथ से लिखने वाले लोगों से 3 साल पहले मर जाते हैं। हर 40 सेकेंड में कोई एक व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। हर 90 सेकेंड में एक महिला, बच्चे को जन्म देते हुए मर जाती है।



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