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हर नागरिक को पता होने चाहिए स्वतंत्रता सेनानियों के ये जोशीले नारे, अंग्रेजों के छूट गए थे पसीने
साल 2021 में अंग्रेजी हुकूमत से भारत को आजाद हुए 75 साल पूरे हो जाएंगे। आज जिस देश में लोग आजादी की सांस ले पा रहे हैं, उसके लिए लाखों स्वाधीनता सेनानियों ने अपनी जिंदगी कुर्बान की थी। आजादी की लड़ाई आसान नहीं थी, कई माओं की गोद उजड़ी, कई पिता का सहारा छीन गया तो कई महिलाओं के सुहाग सात जन्मों का वादा निभाने के बाद भी साथ नहीं दे पाए, कई बच्चों को बाप के कांधे पर बैठकर घूमने का मौका मिलने से पहले ही उन्हें चार कंधों की जरूरत आ पड़ी।

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुई जंग की गंभीरता का अंदाजा आसान नहीं है। देश के प्रत्येक हिस्से से हर उम्र, जाति, धर्म के लोगों ने मिलकर आवाज बुलंद की थी। उस समय देश के लोगों को एकजुट करने के लिए ऐसे जोशीले नारे दिए गए जिसने अंग्रेजों के पसीने छुड़ा दिए।
भारत के जांबाज आजादी के दीवानों की बदौलत ही इतिहास के पन्नों में 15 अगस्त, 1947 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो सका। देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने इस खास दिन के लिए अपना सब कुछ न्योछवर कर दिया। कई क्रांतिकारी ऐसे भी रहे जिन्हें आजाद भारत का उगता सूरज देखना नसीब न हो पाया। ये आजाद देश उन्हीं रक्षकों की अमानत है। आज जब देश आजादी का जश्न मना रहा है तो उसे उन महशूर क्रांतिकारी नारों को एक बार जरूर याद करना चाहिए जिसने ब्रिटिशों के माथे पर शिकन पैदा कर दी थी।

1.
ज़िंदगी तो अपने दम पर जी जाती है। दूसरों के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं।
-भगत सिंह

2.
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है।
-राम प्रसाद बिस्मिल

3.
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।
-सुभाष चंद्र बोस

4.
आज़ादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है।
-सुभाष चंद्र बोस

5.
मैं आजाद था, आजाद हूं और आजाद ही रहूंगा।
-चंद्रशेखर आजाद

6.
राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान है,
मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है।
-भगत सिंह

7.
मेरे सिर पर लाठी का एक-एक प्रहार,
अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगा।
-लाला लाजपत राय

8.
सत्यमेव जयते
-पंडित मदनमोहन मालवीय

9.
स्वतंत्रता जन्मसिद्ध हक नहीं, कर्म सिद्ध हक है।
-विनोबा भावे

10.
करो या मरो
-महात्मा गांधी

11.
जय जवान जय किसान
-लाल बहादुर शास्त्री

12.
इंकलाब जिंदाबाद
-भगत सिंह



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