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Supreme Court: पीरियड्स पेन में छुट्टी ना देना आर्टिकल 14 का उल्लघंन, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
अगर कोई विमेन एम्पलाई अपने बॉस से ये कहकर छुट्टी मांगे कि उसे उसके पीरियड पेन की वजह से छुट्टी चाहिए तो क्या उसे लीव मिलेगी, नहीं, इंडिया में तो नहीं, क्योंकि पीरियड पेन के लिए इंडिया में चाहे सरकारी हो या प्राइवेट कंपनियों में छुट्टी को लेकर कोई रूल्स या रेगुलेशन नहीं है। सबसे बड़ी बात ये है कि मेंस्ट्रुअल लीव को लेकर भारत में अलग से कोई कानून नहीं बना हुआ है, लेकिन आप ये बात जानकर जरूर हैरान हो जाएंगे कि देश में बिहार पहला ऐसा राज्य है, जिसने 1992 से ही महिला कर्मचारियों को 2 दिन की पीरियड्स लीव की इजाजत दी हुई हैं। इस छुट्टी की शुरूआत तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव ने की थी।
लेकिन अब महिलाओं को हर महीने मेंस्ट्रुअल पेन के लिए लीव का प्रावधान बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 10 जनवरी 2023 को PIL (Public Interest Litigation) यानि जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि महिलाओं को गर्भावस्था के लिए छुट्टी मिलती है, लेकिन मासिक धर्म के लिए लीव क्यों नहीं मिलती। देश के कुछ राज्यों ने महीने में 2 दिन छुट्टी का प्रावधान किया है। अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि कोर्ट, देश के सभी राज्यों को मासिक धर्म के दर्द के लिए लीव देने के नियम और निर्देश दें।

याचिका में क्या कहा गया?
याचिकाकर्ता अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन की एक स्टडी का हवाला दिया है। जिसमें कहा गया है कि महिलाओं को पीरियड्स के दौरान उनको इतना दर्द होता है जितना कि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ने पर होता है। इस तरह ये एक महिला कर्मचारी की वर्क प्रोडक्टिविटी को धीमा या कम कर देता है। याचिकाकर्ता ने बताया कि कुछ भारतीय कंपनियां जैसे कि ज़ोमैटो, स्विगी मातृभूमि मैग्टर, एआरसी , फ्लाईमाईबिज़, गूज़ूप व कुछ अन्य कंपनियां हैं जो पेड पीरियड्स लीव अपनी महिला कर्मचारियों को देती है। सुप्रीम कोर्ट में दी गई इस याचिका में इस बात की जानकारी दी गई कि साल 2018 में शशि थरूर ने वूमेन्स सेक्सुअल रिप्रोडक्टिव एंड मेंस्ट्रूअल राइट्स बिल पेश किया था। जिसमें ये बताया गया कि महिलाओं को पब्लिक अथॉरिटी फ्री में सिनेटरी पैड उपलब्ध कराया जाए।

मासिक धर्म के दर्द को लेकर छुट्टी ना देना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्यों द्वारा महिलाओं को मासिक धर्म के दर्द को लेकर छुट्टी ना देना या मना करना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
साल 2017 के मेंस्ट्रुअल पेन बेनिफिटिट्स विधेयक को बजट सत्र के पहले दिन 2022 में दोबारा पेश किया गया था, याचिकाकर्ता के अनुसार, विधान सभा ने इसे एक फॉल सबजेक्ट के रूप में देखकर अनदेखा किया गया था।

कई देशों में महिला कर्मचारियों के पेड पीरियड लीव दी जा रही
1. इंडोनेशिया में साल 2003 से एक कानून पारित करके महिला कर्मियों को महीने में दो दिन पेड पीरियड लीव दी जा रही है।
2. स्पेन पीरियड्स लीव देने वाला पहला पश्चिमी देश है। साथ ही स्पेन में सैनिटरी पैड और
टैम्पून पर कोई टैक्स नहीं लगता है।
3. ताइवान में महिला कर्मचारियों को साल में 3 दिन पीरियड्स लीव मिलती है।
4. यूनाइटेड किंगडम, चीन, जापान, जाम्बिया में भी पीरियड लीव दी जाती है।



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