Latest Updates
-
Akshaya Tritiya 2026 Upay: अक्षय तृतीया पर करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से सुख-संपत्ति में होगी वृद्धि -
World Liver Day 2026: हर साल 19 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है विश्व लिवर दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और थीम -
Nashik TCS Case: कौन है निदा खान? प्रेग्नेंसी के बीच गिरफ्तारी संभव या नहीं, जानें कानून क्या कहता है -
कश्मीर में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, क्या सच हुई बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी? -
चेहरे से टैनिंग हटाने के लिए आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी दमकती त्वचा -
World Heritage Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
Aaj Ka Rashifal 18 April 2026: मिथुन, तुला और कुंभ के लिए आज बड़ा दिन, जानें मेष से मीन तक का हाल -
Akshaya Tritiya 2026 Daan: अक्षय तृतीया पर इन 5 चीजों का करें दान, कभी नहीं होगी अन्न और धन की कमी -
World Hemophilia Day 2026: हीमोफीलिया क्या है? जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज -
Shukra Gochar 2026: अक्षय तृतीया पर शुक्र का गोचर बदलेगा इन 4 राशियों का भाग्य, बाकी के लिए जानें उपाय
Rath Yatra 2025: भगवान जगन्नाथ की बड़ी-बड़ी आंखों पर क्यों नहीं हैं पलकें? अद्भूत है वजह
Why Lord Jagannath Has Big Eyes and No Eyelids : गोला कुआं स्थित प्राचीन मंदिर से इस वर्ष की भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून, रविवार को निकाली जाएगी। यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह रथयात्रा हर वर्ष बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाली जाती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं भी रथ पर विराजमान होती हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा न केवल धार्मिक रूप से विशेष होती है, बल्कि इसकी हर एक परंपरा, प्रतीक और प्रतिमा का भी विशेष महत्व होता है। खासतौर पर भगवान जगन्नाथ की विशेष बनावट वाली आंखें और उन पर पलकों का न होना, भक्तों और दर्शकों के बीच हमेशा जिज्ञासा का विषय बना रहता है।

क्यों होती हैं भगवान जगन्नाथ की आंखें इतनी बड़ी?
अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की तुलना में भगवान जगन्नाथ की आंखें असाधारण रूप से बड़ी होती हैं। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए प्रतिदिन लाखों भक्त पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान की दृष्टि से कोई भक्त अछूता न रह जाए, इसीलिए उनकी आंखें बड़ी बनाई जाती हैं। यह उनकी सर्वदर्शिता और अपार करुणा का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि भगवान जगन्नाथ सभी को एक समान दृष्टि से देखते हैं और उनके हृदय में सभी के लिए स्थान है।
क्यों नहीं होती हैं भगवान जगन्नाथ की पलकें?
भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा में एक और खास बात होती है, उनकी आंखों पर पलकों का अभाव। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि भगवान पल भर के लिए भी आंखें मूंद लें या पलकें झपकाएं, तो उस क्षण में हजारों भक्त उनके दर्शन से वंचित हो सकते हैं। इसलिए उनकी मूर्ति ऐसी बनाई जाती है, जिसमें वे बिना पलक झपकाए अपलक अपने भक्तों की ओर निहारते रहते हैं। यह भी मान्यता है कि भक्त भले ही भगवान के दर्शन न कर पाएं, लेकिन भगवान की दृष्टि से कोई भक्त छूटना नहीं चाहिए।
कितने वर्षों में बदली जाती है भगवान जगन्नाथ की मूर्ति?
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थायी नहीं होतीं। जब भी आषाढ़ का अधिक मास आता है, तब इन मूर्तियों को परंपरा के अनुसार समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है और उनकी नई प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस विशेष प्रक्रिया को "नव कलेवर" कहा जाता है। नव कलेवर का अर्थ होता है, नया शरीर। यह परंपरा हर 12 से 19 वर्षों में निभाई जाती है। मूर्तियों का निर्माण पवित्र नीम के पेड़ों से होता है, जिन्हें विशेष पहचान और नियमों के अनुसार चुना जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया को शास्त्रों के अनुसार बहुत विधिपूर्वक किया जाता है और यह उत्सव हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। रथ यात्रा, भगवान जगन्नाथ की महिमा और भक्तों की आस्था का जीवंत प्रतीक है, जो हर वर्ष उन्हें और अधिक करीब लाने का माध्यम बनती है।



Click it and Unblock the Notifications











