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Rath Yatra 2025 : अविवाहित प्रेमी जोड़े नहीं कर सकते हैं जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, एक श्राप से जुड़ा है रहस्य
Why Unmarried Couples Are Not Allowed in Jagannath Temple : जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 में 26 जून से आरंभ हो रही है और यह 10 दिनों तक चलेगी। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी भव्यता और आस्था का विस्तार देश-विदेश तक फैला हुआ है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी का घर माना जाता है। दसवें दिन वापसी के साथ रथ यात्रा का समापन होता है।
पुरी का जगन्नाथ मंदिर जितना पूजनीय है, उतना ही रहस्यमयी भी है। इस मंदिर से कई कथाएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से एक प्रमुख मान्यता यह है कि अविवाहित प्रेमी जोड़ों को मंदिर में एक साथ प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।

ऐसी है मान्यता
कहते हैं कि एक बार राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की, वहां के पुजारी ने उन्हें रोक दिया। जब राधा रानी ने इसका कारण पूछा, तो पुजारी ने कहा कि वे श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं, पत्नी नहीं। मंदिर में केवल पत्नियों को या वैध विवाह-संबंध में जुड़ी महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति है। राधा रानी यह सुनकर बेहद आहत हुईं और उन्होंने मंदिर को श्राप दे दिया।
श्राप का रहस्य
श्राप के अनुसार, अब से कोई भी अविवाहित प्रेमी जोड़ा यदि मंदिर में एक साथ दर्शन करेगा, तो उनका प्रेम कभी सफल नहीं होगा। उन्हें जीवन में एक-दूसरे का साथ नहीं मिल पाएगा। यही कारण है कि आज भी पुरी के स्थानीय लोग और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं। मंदिर में अविवाहित प्रेमी जोड़े साथ में दर्शन नहीं करते, क्योंकि यह माना जाता है कि ऐसा करने से उनके रिश्ते में दरार आ सकती है या विवाह में बाधाएं आ सकती हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा है बेहद खास
जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन रथों पर सवार होकर मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं और सात दिन बाद लौटते हैं। मान्यता है कि इस यात्रा में भाग लेने और रथ खींचने से साधकों को सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा जीवन की बाधाओं से मुक्ति दिलाती है और अत्यंत पुण्य फलदायक मानी जाती है।



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