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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों होंगे रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट, कैसे भारत चुनता है मुख्य अतिथि, जानें प्रक्रिया
Republic Day 2024 :फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाली परेड के चीफ गेस्ट होंगे। इसी के साथ वह छठे फ्रांसीसी नेता बन जाएंगे जो इस समारोह का हिस्सा बनेंगे।
भारत में रिपब्लिक डे पर विदेशी चीफ गेस्ट की पुरानी परंपरा रही है। दो बार पाकिस्तान के नेता भी परेड के मुख्य अतिथि बन चुके हैं। जनवरी 1965 में पाक के एग्रीकल्चर मिनिस्टर राणा अब्दुल हामिद हमारे मेहमान थे और 3 महीने बाद अप्रैल में पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ गई थी।

आइए जानते हैं कि कैसे चुना जाता है रिपब्लिक डे परेड के लिए चीफ गेस्ट और क्या है प्रक्रिया?
विदेश मंत्रालय कराता है चीफ गेस्ट का चुनाव
किस देश की हस्ती को भारतीय गणतंत्र दिवस पर बतौर चीफ गेस्ट बुलाया जाए, इसके लिए हमारा विदेश मंत्रालय विचार-विमर्श करता है। इस तरह चुनाव के बाद चीफ गेस्ट के नाम पर मुहर लगती है। इस दौरान कई बातों को ध्यान में रखा जाता है। सबसे पहले तो जिस देश के राष्ट्रपति को चीफ बनाना है उससे आपके देश के कैसे संबंध है इसे देखा जाता है। विदेश मंत्रालय की ओर से चुने गए नाम की भारतीय प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भवन से भी अनुमति ली जाती है।
छह महीने पहले शुरु हो जाती है तैयारी
गणतंत्र दिवस पर किसे मुख्य अतिथि के आमंत्रण और उनके स्वागत-सत्कार की प्रक्रिया करीब छह महीने पहले से शुरू हो जाती है। इस बीच उन्हें निमंत्रण भेजना और निमंत्रण स्वीकार किए जाने के बाद उनके आने पर ठहरने और पूरी तरह से विशेष तरह मेहमान नवाजी देने की व्यवस्था, गणतंत्र दिवस उन्हें विशेष गार्ड ऑफ ऑनर देना, विशेष भोज वगैरह कई कार्यक्रमों की तैयारी शुरू हो जाती है।
सबसे ज्यादा फ्रांस के लीडर बन चुके हैं रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट
इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के छठवें लीडर होंगे जो रिपब्लिक डे पर चीफगेस्ट के तौर पर शामिल होंगे? जबकि 5 बार ब्रिटेन और 4 बार भूटान के राजा वहीं पाकिस्तान के 2 लीडर रिपब्लिक डे के विदेशी मेहमान बन चुके हैं। 1958 में चीनी आर्मी के मार्शल जियानपिंग भी चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हो चुके हैं। अब तक 77 विदेशी मेहमान रिपब्लिक तौर पर शामिल हो चुके हैं।
इस वजह से फ्रांस रहता है पहली पसंद
भारत को लेकर फ्रांस का पक्ष दूसरे पश्चिमी देशों से काफी अलग है। कई बार अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारत में मानवाधिकार और लोकतंत्र को लेकर सवाल करते रहते है। फ्रांस इनकी तुलना में भारत के आंतरिक मामलों में काफी कम दखलंदाजी करता है। यही वजह है कि फ्रांस और भारत के ताल्लुक बेहतर हैं।

रिपब्लिक डे पर क्या होता है प्रोटोकोल
चीफ गेस्ट को एक दिन पहले राष्ट्रपति भवन विजिट के लिए ले जाया जाता है। यहां भारतीय सेना उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और 21 तोपों की सलामी देती है। इस दौरान मेहमान के साथ प्रेसिडेंट गार्ड भी मौजूद रहते हैं, जो उनके चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाए हुए होते हैं। इसके बाद चीफ गेस्ट राजघाट पहुंचते हैं। यहां वो महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हैं फिर वो प्रधानमंत्री के साथ लंच में शामिल होते हैं।
फिर अगले दिन यानी 26 जनवरी को वो रिपब्लिक डे परेड में शामिल होते हैं। परेड वाले दिन दस हजार से भी ज्यादा सुरक्षाकर्मी चीफ गेस्ट की सुरक्षा में तैनात होते हैं। मल्टी लेयर्ड सिक्योरिटी के बीच रेड कार्पेट से होते हुए चीफ गेस्ट मुख्य मंच पर पहुंचते हैं। ये मंच बुलेट प्रूफ कांच से कवर होता है। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री मौजूद होते हैं। परेड में तीनों सेनाएं चीफ गेस्ट को सलामी देती हैं।



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