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Republic Day 2024: कैसे होता है गणतंत्र दिवस की झांकियों का चयन और क्या है इसे लेकर नया विवाद?
How R Day tableaux are designed and selected : नया साल आते ही गणतंत्र दिवस के जश्न की तैयारियां शुरू जाती है। हर साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर परेड के अलावा इनमें राज्यों की झांकियां भी शामिल होती हैं। इस बार के समारोह के लिए पंजाब, दिल्ली और पश्चिम बंगाल राज्यों की तरफ से झांकियों को शामिल नहीं किया गया है, जिस पर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। आइए जानिए कि पूरा विवाद क्या है और झांकियों का चयन किस आधार पर होता है।

झांकियों को लेकर क्या है विवाद?
दरअसल, गणतंत्र दिवस की परेड के लिए इस बार पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब की झांकियों का चयन नहीं हुआ है। इन राज्यों की सरकारों ने केंद्र सरकार पर पक्षपात और भेदभाव के आरोप लगाए हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि विशेषज्ञ समिति की बैठक के पहले 3 दौर में पंजाब की झांकी के प्रस्ताव पर विचार किया गया था। तीसरे दौर की बैठक के बाद पंजाब की झांकी पर विचार नहीं हुआ, क्योंकि ये परेड की व्यापक थीम के अनुरूप नहीं थी। पश्चिम बंगाल की झांकी पर भी पहली 2 बैठक में विचार किया गया था, लेकिन ये झांकी भी इस बार की थीम के अनुरूप नहीं पाई गई।
रक्षा मंत्रालय संभालता है जिम्मेदारी
बता दें कि गणतंत्र दिवस की परेड की पूरी जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के पास होती है। जो इसकी तैयारियां, सुरक्षा, परेड, झांकी आदि की व्यवस्था को देखते हैं। चूंकि, इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि देश के राष्ट्रपति होते हैं जो कि तीनों सेनाओं के प्रमुख भी हैं इसलिए इससे जुड़े सारे काम रक्षा मंत्रालय की निगरानी में होते हैं।
कैसे होता है झांकियों का चयन?
गणतंत्र दिवस की परेड के लिए झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय की एक समिति करती है। इस समिति में आर्ट, कल्चर, पेंटिंग, स्कल्पचर, म्यूजिक, आर्किटेक्चर, कोरियोग्राफी जैसे क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग होते हैं। समिति सदस्य विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों से मिले झांकियों के प्रस्तावों को देखते हैं। इन झांकियों का चयन उनके विषय, डिजाइन और कई पहुलओं के आधार पर किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 6 या 7 बैठकें की जाती हैं।
झांकियों की डिजाइन को लेकर क्या है गाइडलाइन?
झांकियों पर किसी तरह का लोगो लगाने की अनुमति नहीं होती है। झांकियों के आगे राज्य का नाम अंग्रेजी में, पीछे हिंदी में और दाएं या बाएं क्षेत्रीय भाषा में लिखा जा सकता है। झांकी की जमीनी सतह से उंचाई 45 इंच, चौड़ाई 14 इंच और ऊंचाई 16 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा ट्रैक्टर और ट्रेलर के बीच 6-7 फीट की दूरी होना चाहिए, ताकि उन्हें मोड़ने में कोई परेशानी न आए
हर बार किसी न किसी राज्य की झांकी को नहीं मिलती है अनुमति
दरअसल, परेड में समयसीमा और बाकी इंतजामों को देखते हुए 15 या 16 झांकियों को ही शामिल किया जाता है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा मंत्रालयों और विभागों के 30-40 प्रस्ताव समिति को मिलते हैं।
इनमें से सभी को अनुमति नहीं दी जा सकती, इसलिए जरूरी नहीं कि हर साल हर राज्य की झांकी परेड में शामिल हो। चुनी हुई झांकियों को रक्षा मंत्रालय एक ट्रैक्टर और ट्रेलर उपलब्ध करवाता है।
इस बार किन-किन राज्यों की झांकियां शामिल होंगी?
इस बार की परेड में शामिल होने वाली झांकियों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस बार उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान, ओडिशा, मणिपुर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गोवा, मेघालय, लद्दाख, कर्नाटक, झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, असम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल की झांकियों का चयन हुआ है। इसके अलावा केंद्र सरकार के कई मंत्रालय की झांकियां भी शामिल रहेंगी।



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