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21 Gun salute: गणतंत्र दिवस पर क्यों दी जाती है 21 तोपों की सलामी? कब और कैसे शुरू हुई यह परंपरा
21 Gun salute In India: हर साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रगान के समय 21 तोपों की सलामी दी जाती है। तोपों की सलामी को लेकर अक्सर मन में ये सवाल उठते होंगे कि आखिर ये क्यों दी जाती है इसके पीछे क्या वजह है? और कब-कब ये सलामी दी जाती है?
तोपों से सलामी देने के पीछे भी अलग- अलग प्रोटोकॉल हैं? आइए आज हम आपको बताते हैं कब और कैसे दी जाती हैं तोपों से सलामी-

किन्हें दी जाती है 21 तोपों की सलामी?
यह सम्मान देने की एक प्रक्रिया है। जिसका फैसला सरकार करती है किसे राजकीय सम्मान देना है किसे नहीं। राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और कला के क्षेत्र में योगदान देने वाले शख्सियतों के निधन पर राजकीय सम्मान दिया जाने लगा है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस सहित कई अन्य मौकों पर तोपों की सलामी दी जाती है। विशेष मौकों पर तोपों की सलामी देकर सम्मान दिया जाता है। वहीं भारतीय सेना के सैन्य सम्मान उन सैनिकों को दी जाती है जिन्होंने शांति अथवा युद्ध काल में अपना विशेष योगदान दिया हो। राजकीय सम्मान (state honor) में भी तोपों की सलामी दी जाती है।
कब से भारत में शुरु हुआ 21 तोपों की सलामी की प्रथा?
आजाद भारत में 21 तोपों की सलामी की प्रथा पहले गणतंत्र दिवस से ही चली आ रही है। लेकिन 21 तोपों की सलामी 21 तोपों से नहीं दी जाती है। दरअसल, 21 तोपों की सलामी 7 अलग-अलग तोपों से दी जाती है और हर एक तोप से 3 गोले दागे जाते हैं। इस प्रकार 21 तोपों की सलामी पूरी होती है। लेकिन बता दें कि गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान 7 के बजाय 8 तोप लाई जाती है, ताकि किसी भी तोप के काम ना करने पर इमरजेंसी में एक्सट्रा तोप का इस्तेमाल किया जा सके।

हर 2.25 सेकेंड में ही क्यों दागा जाता है गोला
21 तोप की सलामी के दौरान हर एक तोप से हर 2.25 सेकेंड में एक गोला दागा जाता है। ऐसा करने के पीछे भी एक खास वजह है। दरअसल, हमारा राष्ट्रगान 52 सेकेंड का होता है और हर 2.25 सेकेंड में एक गोला दागने पर 21 तोपों की सलामी भी कुल 52 सेकेंड में पूरी हो जाती है।
101 से हुई 21 तोपोंं की सलामी
ब्रिटिश हुकूमत के समय दी जाती थी 101 तोपों की सलामी बता दें कि आजादी से पहले भी 21 तोपों की सलामी का चलन था। शुरू में ब्रिटिश क्राउन के सम्मान में 101 तोपों की सलामी दी जाती थी। इसे शाही सलामी भी कहा जाता था, लेकिन बाद में इस प्रथा में बदलाव किया गया और ब्रिटेन की महारानी और शाही परिवार के सदस्यों को 31 तोपों की सलामी दी जाने लगी।
इसके बाद राज्यों के वायसराय और गवर्नर जनरल को भी तोपों की सलामी दी जाने लगी। हालांकि, ये सलामी 21 तोपों की होती थी। इसी को देखते हुए ब्रिटिश हुकूमत ने यह तय किया कि अंतर्राष्ट्रीय सलामी 21 तोपों की ही कर दी जाए और तभी से 21 तोपों की सलामी का चलन चला आ रहा है। सलामी देने वाले तकरीबन 122 जवानों के दस्ते का हेडक्वार्टर मेरठ में है। ये सेना की स्थाई रेजीमेंट नहीं होती है।
क्या असली गोले दागे जाते हैं?
कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि 21 तोपों की सलामी के दौरान जिन गोलों का इस्तेमाल किया जाता है, क्या वो असली होते हैं? तो आपको बता दें कि सलामी में इस्तेमाल किए जाने वाले गोले खास तरह से बनाए जाते हैं। इसे सेरोमोनियल कार्टरेज कहा जाता है। ये गोले अंदर से खाली होते हैं, जब इनको फायर किया जाता है तो केवल धुआं और आवाज आती है। इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता।



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