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Sainji Village: उत्तराखंड का अनोखा गांव, जहां लोग भुट्टों से सजाते हैं घर-दीवार, वजह है बड़ी निराली
Sainji Village: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में मसूरी के प्रसिद्ध केम्पटी फॉल्स से 5 किमी की दूरी पर सैंजी गांव एक अलग ही वजह से मशहूर है। इस गांव को कॉर्न विलेज के नाम से भी जाना जाता है। इस गांव को कॉर्न विलेज इसलिए नहीं पुकारते हैं क्योंकि यहां मक्कों की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, बल्कि यहां गांव के लोग इन भुट्टों को गुच्छे में बांधकर घर की दिवारों में बांधकर य
जिस वजह से पूरा गांव भुट्टों से सजा हुआ बहुत ही खूबसूरत सा दिखाई देता है। आइए इसकी पीछे की वजह-

यह है वजह
मकई यानी भुट्टा इस गांव की मुख्य फसल है। सर्दियों के आने से पहले मक्के की फसल को सुखाने के लिए लोग अपने घरों की दीवारों पर मक्के टांग देते हैं। इन्हें सुखाकर इसका आटा बनाने के साथ ही इन्हें अगले वर्ष बीज के रूप में उपयोग में लिया जाता है। यह खेत के बीज उपलब्ध कराने के साथ घरों की साज-सज्जा में इजाफा करता है। बालकनियां, खिड़कियां यहां तक की दरवाजे भी भुट्टे से ढंकी हुई रहती हैं।
एक वजह यह भी है
घर के बाहर भुट्टे लगाने की एक वजह यह भी है कि गांव वालों का मानना है कि जिसके घर के बाहर जितने भुट्टे लगे होते हैं वो लोग उतने आर्थिक रुप से संपन्न होते हैं। घर के बाहर जितने ज्यादा भुट्टे यानी उतने ज्यादा अमीर। भुट्टे इस गांव में धन का संकेत भी माना जाता है।
धूमधाम से सेलिब्रेट करते हैं त्योहार
ग्रामीण लोग कुछ अनोखे त्योहारों को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। जनवरी के आसपास एक गोट फेस्टीवल होता है, जहां कुछ बकरों की बलि दी जाती है, वहीं जून के महीने में एक फिश फेस्टिवल मनाया जाता है, जिसे मौंड उत्सव कहते हैं। इस त्योहार में पूरा गांव नदी पर जाकर मछलियों का शिकार करता है।
सैंजी गांव कब जाएं
इस खूबसूरत गांव में जाने का सबसे अच्छा समय सितंबर और अक्टूबर के दौरान होता है। क्योंकि यह फसल का मौसम होता है। यदि आप मसूरी घूमने गए हैं, तो सैंजी मकई गांव की यात्रा जरूर करें। इस विचित्र छोटे से गांव में आपको बहुत अच्छा अनुभव प्राप्त होगा।



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