Latest Updates
-
Kamada Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा,,,कामदा एकादशी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Kamada Ekadashi Sanskrit Wishes: इन दिव्य संस्कृत श्लोकों से अपनों को दें कामदा एकादशी की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 29 March 2026: कामदा एकादशी पर किन राशियों का होगा भाग्योदय? जानें अपना भविष्यफल -
Summer Fashion Tips: चिलचिलाती धूप में ठंडक का एहसास कराएंगे ये 5 रंग, आज ही बदलें अपना वॉर्डरोब -
इन 5 समस्याओं से जूझ रहे लोग भूलकर भी न खाएं आंवला, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान -
क्यों मनाया जाता है अप्रैल फूल डे? जानें 1 अप्रैल से जुड़ी ये 3 दिलचस्प कहानियां -
IPL 2026 का आगाज आज, बेंगलुरु में SRH से भिड़ेगी चैंपियन RCB, जानें लाइव स्ट्रीमिंग की पूरी डिटेल -
जून-जुलाई में हवाई सफर खतरनाक? सुमित आचार्य महाराज की भविष्यवाणी वायरल -
अनोखी परंपरा! जहां पति की डेड बॉडी के साथ सोती है पत्नी, वजह जान सुन्न हो जाएगा दिमाग -
एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, 11,200 करोड़ में हुआ तैयार, जानें Jewar Airport से जुड़ी 10 बड़ी बातें
पंच केदार: जब पांडवों से रुष्ट हुए महादेव, उत्तराखंड में स्थापित हुए 5 पवित्र शिव मंदिर
Panch Kedar temple and story : उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यही धरती भगवान शिव के पंच केदार रूप की साक्षी भी है। केदारनाथ से आगे की यात्रा करने वाले भक्त पंच केदार के दर्शन करके अपनी तीर्थयात्रा को पूर्ण मानते हैं। पंच केदार- केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर, पांच ऐसे पवित्र स्थान हैं, जहां भगवान शिव के विभिन्न अंग प्रकट हुए थे। यह सभी मंदिर ऊँचाई और दुर्गम पर्वतीय मार्गों पर स्थित हैं, लेकिन इनकी महिमा अपार है।

1. केदारनाथ मंदिर
केदारनाथ मंदिर पंच केदार में सबसे प्रसिद्ध है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव की पीठ या कूबड़ प्रकट हुई थी। मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और यह हिमालय की बर्फीली घाटियों में बसा हुआ है। यहां पहुंचने के लिए आपको हरिद्वार/ऋषिकेश से सोनप्रयाग होते हुए गौरीकुंड तक जाना होता है। इसके बाद 16-18 किलोमीटर की ट्रेकिंग करके केदारनाथ मंदिर पहुंचा जा सकता है। यह यात्रा मई से नवंबर तक की जा सकती है।
2. तुंगनाथ मंदिर
दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर तुंगनाथ, पंच केदार में दूसरा स्थान रखता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। यह मंदिर भी रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और चोपता से 4 किलोमीटर की ट्रेकिंग करके यहां पहुंचा जा सकता है। तुंगनाथ की यात्रा मई से नवंबर तक ही संभव होती है और इस दौरान चारों ओर हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां और अल्पाइन मीडोज की सुंदरता देखने को मिलती है।
3. रुद्रनाथ मंदिर
रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। यह मंदिर चमोली जिले के गोपेश्वर के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए पहले हरिद्वार से गोपेश्वर और फिर सागर गांव तक की यात्रा करनी होती है। सागर से रुद्रनाथ तक 20 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी होती है। यह मंदिर बेहद शांत और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर है, जहां मन एकाग्र होकर शिव साधना में लीन हो जाता है।
4. मध्यमहेश्वर मंदिर
मध्यमहेश्वर मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और यहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। यह स्थान हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। यहां तक पहुंचने के लिए पहले उखीमठ और फिर रांसी गांव जाना होता है। रांसी से मध्यमहेश्वर मंदिर की यात्रा लगभग 16 किलोमीटर की ट्रेकिंग द्वारा की जाती है। यात्रा के दौरान हिमालय की गोद में बसे गांवों और नदियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
5. कल्पेश्वर मंदिर
कल्पेश्वर मंदिर चमोली जिले में उर्गम घाटी में स्थित है। यह पंच केदार में एकमात्र मंदिर है जो पूरे वर्ष खुला रहता है। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा होती है। ऋषिकेश से जोशीमठ तक बस या टैक्सी से पहुंचा जा सकता है और फिर उर्गम गांव तक पैदल चढ़ाई करनी होती है। यह मंदिर गुफाओं, जंगलों और प्राकृतिक शांति से घिरा हुआ है।
पंच केदार की यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई तक पहुंचने का अनुभव है। शिव के विभिन्न रूपों की यह यात्रा श्रद्धा, साहस और शुद्ध भक्ति की परीक्षा भी है। यदि आप उत्तराखंड के पावन तीर्थों की योजना बना रहे हैं, तो पंच केदार की यह दिव्य यात्रा आपके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बन सकती है।



Click it and Unblock the Notifications











