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India-UK Trade Deal के बाद सस्ती होगी व्हिस्की और स्कॉच, आखिर कैसे भारत पहुंची Scotch और दोनों में फर्क ?
Difference Between Scotch and Whiskey : भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत अब स्कॉच व्हिस्की भारत में सस्ती हो सकती है। शराब प्रेमियों के लिए यह खबर किसी तोहफे से कम नहीं है। लेकिन इस खबर के बीच एक जरूरी सवाल यह भी है, क्या आप स्कॉच और व्हिस्की को एक ही समझते हैं?
अगर हां, तो ज़रा रुकिए। दोनों में कई अहम अंतर हैं जो इनके स्वाद, बनावट और पहचान को बिल्कुल अलग बनाते हैं।

व्हिस्की क्या है?
व्हिस्की एक लोकप्रिय अल्कोहलिक ड्रिंक है जो दुनिया भर में पी जाती है। यह आमतौर पर जौ, मक्का, राई और गेहूं जैसे अनाजों के मिश्रण से बनाई जाती है। व्हिस्की की कोई खास भौगोलिक पहचान नहीं होती, यह अमेरिका, आयरलैंड, जापान, भारत समेत कई देशों में बनाई जाती है। वैसे बता दें कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा व्हिस्की बाज़ार है।
स्कॉच व्हिस्की क्या है?
स्कॉच एक विशेष प्रकार की व्हिस्की है, जिसे केवल स्कॉटलैंड में ही बनाया जाता है। स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन (SWA) के सख्त नियमों के अनुसार इसे तैयार किया जाता है। स्कॉच को कम से कम तीन साल तक ओक बैरल में स्टोर करना अनिवार्य होता है, जिससे इसका फ्लेवर और रंग गहराता है। इसे आमतौर पर दो बार डिस्टिल किया जाता है।
स्कॉच और व्हिस्की में अंतर
उत्पत्ति: स्कॉच सिर्फ स्कॉटलैंड में बनती है, जबकि व्हिस्की दुनिया में कहीं भी बनाई जा सकती है।
सामग्री: स्कॉच मुख्य रूप से माल्टेड जौ से बनती है, जबकि व्हिस्की में कई अनाजों का मिश्रण होता है।
स्वाद: स्कॉच में पीट (peat) के कारण स्मोकी स्वाद होता है, जबकि व्हिस्की का स्वाद अलग-अलग हो सकता है।
एजिंग प्रोसेस: स्कॉच को कम से कम 3 साल तक ओक बैरल में रखा जाता है, जबकि व्हिस्की में ऐसा कोई नियम नहीं है।
कीमत: स्कॉच आमतौर पर अधिक महंगी होती है क्योंकि इसके निर्माण की प्रक्रिया लंबी और नियंत्रित होती है।
भारत में स्कॉच कैसे आई?
स्कॉच व्हिस्की पहली बार भारत में 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश राज के दौरान आई थी। 1820 के दशक के अंत में एडवर्ड डायर नामक व्यक्ति इंग्लैंड से भारत आया और कसौली (हिमाचल प्रदेश) में भारत का पहला ब्रेवरी प्लांट लगाया। ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों की मांग को पूरा करने के लिए स्कॉच को आयात किया गया। धीरे-धीरे भारतीय डिस्टिलरियों ने खुद की व्हिस्की बनाना शुरू किया, जिसमें कभी-कभी स्कॉच को भारतीय अनाजों से ब्लेंड किया जाता था।



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