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Shaheed Diwas 2024: 30 जनवरी और 25 मार्च, जानें साल में दो बार क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस
Shaheed Diwas 2024: भारत की आज़ादी में कई वीर जवानों का योगदान रहा है। महात्मा गांधी, अम्बेडकर, नेहरु, सुभाष चन्द्र बोस जैसे बड़े राजनीतिक नेताओं के साथ सतह भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक, चन्द्र शेखर आज़ाद सही कई हज़ारों क्रांतिकारियों ने भी स्वतंत्रता आन्दोलन में निर्णायक भूमिका निभाई। इस लड़ाई में कई जाबांजों ने अपनी जान तक गंवाई।
ऐसे ही शहीदों के बलिदान को याद करते हुए गणतंत्रता दिवस के तीन दिन बाद शहीदी दिवस मनाया जाता है। हालांकि शहीदी दिवस साल में दो बार मनाया जाता है- पहला 30 जनवरी को और दूसरा 23 मार्च को। जानते हैं क्यों दो बार मनाया जाता है शहीदी दिवस, और क्या है इसका महत्व -

30 जनवरी का शहीदी दिवस
जनवरी माह की 30 तारीख को शहीदी दिवस महात्मा गांधी को समर्पित होता है। देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी, 1948 के दिन ही हुई थी। नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर गांधीजी की हत्या हुई थी, और उनके आखिरी शब्द "हे राम" थे। गांधीजी ने अपने जीवन भर अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए ही देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया। उनके इस समर्पण और योगदान के सम्मान के लिए ही उनकी पुण्यतिथि के दिन शहीदी दिवस मनाया जाता है।
30 जनवरी शहीदी दिवस- कैसे स्मरण करते हैं गांधीजी को?
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, तीनों सेना प्रमुख और कई प्रमुख राजनेता राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। सेना के जवान भी इस मौके पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते हुए हथियार नीचे झुकाते हैं। इसके साथ ही स्कूलों कॉलेजों में महात्मा गांधी के योगदान को याद करते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
दूसरा शहीदी दिवस - 23 मार्च
23 मार्च को भी शहीदी दिवस मनाया जाता है, जो शहीदों की शहादत में मनाया जाता है। वर्ष 1931 में इस दिन ही भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेजों ने फांसी की सज़ा दी थी। भारतियों के आक्रोश के दर से अंग्रेजों ने तय तारिख से एक दिन पहले ही तीनों सेनानियों को फांसी पर चढ़ाया था। उन तीनों की कम उम्र में दी गई यह शहादत लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनी थी और आज भी प्रेरणा का स्त्रोत है। इस दिन इन तीन शहीदों की यद् के साथ साथ आज़ादी की लड़ाई में शहादत हुए और सेनानियों के सम्मान में भी मनाया जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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