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लद्दाख का रहस्यमयी गांव: जहां गर्भधारण के लिए आती हैं विदेशी महिलाएं, जानें क्या है इसके पीछे की चौंकाने वाली
Why Foreign Women Come To Ladakh To Conceive: भारत के उत्तर में बसा लद्दाख अपने अद्भुत पहाड़ों, नीले आसमान और रहस्यमयी परंपराओं के लिए जाना जाता है। देश-विदेश से वहां पर लोग घूमने के लिए आते हैं और वहां के नेचर का लुत्फ उठाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी लद्दाख में एक ऐसा गांव भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां आने वाली विदेशी महिलाएं कुछ समय बाद प्रेग्नेंट हो जाती हैं? या यूं कहें कि वो गर्भाधारण करने के लिए ही वहां जाती हैं।
जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि एक ऐसा रहस्य है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर रिसर्चर्स तक सबको हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की हैरान करने वाली वजह और वहां के पुरुषों की खासियत?

आर्यन के वंशज रहते हैं यहां
ऐसा कहा जाता है कि लद्दाख के दाह-हानू (Dah-Hanu) गांव में ब्रोकपा (Brokpa) नामक जनजाति निवास करती है। अल जजीरा और ब्राउन हिस्ट्री के अनुसार, लद्दाख की राजधानी लेह से करीब 160 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में जिस जनजाति के लोग रहते हैं उन्हें आर्यन वंशज भी कहा जाता है और रेड आर्यन विलेज भी कहा जाता है। इस जनजाति का नाम है ब्रोकपा जिनकी करीब 5000 से ज्यादा लोगों की आबादी वहां रहती हैं।
क्या है ब्रोकप जनजाति के मर्दों की खासियत?
आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस ब्रोकपा जनजाति के लोगों की खासियत क्या है? रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जनजाति के मर्दों की शारीरिक बनावट बहुत अलग होती है। वो बहुत लंबे-चौड़े और गोरे रंग वाले होते हैं। उनकी आंखों का रंग भी काफी अलग होता है। किसी का हरा होता है तो किसी का गहरा ब्राउन। वहीं ब्रोकपा लोगों का दावा है कि वो दुनिया में आखिरी बचे हुए सबसे शुद्ध आर्यन हैं। यानी आर्यन नस्ल के वंशज हैं।
विदेशों से यहां प्रेग्नेंट होने आती हैं महिलाएं?
ऐसा माना जाता है कि लद्दाख के दाह-हानू गांव में ब्रोकपा जनजाति के पुरुषों से प्रभावित होकर विदेशों से महिलाएं यहां पर प्रेग्नेंट होने के लिए आती हैं। कहा जाता है कि इस गांव में एलेक्जेंडर के वंशज रहते हैं। यही वजह है कि यूरोप से महिलाएं यहां आती हैं और यहां के पुरुषों संग रात बीता प्रेग्नेंट होती हैं और उन्हें इसके बदले पैसे देती हैं। वो चाहती हैं कि उनका बच्चा भी एलेक्जेंडर की ही तरह सुंदर, गजब की शारीरिक बनावट वाला और नीली आखों वाला व गोरी स्किन वाला हो।
डॉक्यूमेंट्री में हुआ इस बात का खुलासा
बता दें कि साल 2007 में आई संजीव सिवन की 30 मिनट की डॉक्यूमेंट्री Achtung Baby: In Search of Purity में इस बात का खुलासा हुआ। ऐसा कहा गया कि इस गांव में 'शुद्ध आर्य बीज' रहते हैं जिनकी तलाश में जर्मन महिलाएं इस गांव की तरफ रुख करती हैं। ताकि वो एक शुद्ध आर्यन नस्ल के बच्चें को जन्म दे सकें।



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