Latest Updates
-
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म -
दुआ के दूसरे बर्थडे पर दीपिका-रणवीर ने कराया मैटरनिटी फोटोशूट, बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए शेयर की तस्वीरें -
Laddu Gopal Chatthi 2026: 9 या 10 सितंबर, कब है लड्डू गोपाल की छठी? नोट करें सही तिथि, पूजा विधि और भोग -
Krishna Chhathi 2026 Wishes: माखन-मिश्री का भोग...कृष्ण जी की छठी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
वायरल बुखार, खांसी-जुकाम और इंफेक्शन से बचने के लिए करें ये 5 योगासन, इम्यूनिटी होगी बूस्ट
Snake Mela: नागपंचमी पर यहां लगता है अनोखा मेला, निकलती है जिंदा सांपों की परेड
Snake Fair : बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड में नागपंचमी के दिन एक अद्भुत और रोमांचक मेला लगता है, जिसे सांपों का मेला कहा जाता है। यह मेला समस्तीपुर से करीब 23 किलोमीटर दूर बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित सिंधिया घाट पर आयोजित होता है। इस मेले में हजारों लोग जहरीले सांपों के साथ करतब दिखाते हैं-कभी उन्हें गले में डालते हैं, तो कभी मुंह में दबाकर पूजा-पाठ करते हैं। यह मेला न केवल आस्था, बल्कि अद्भुत साहस और पारंपरिक विरासत का प्रतीक बन गया है।

कैसे शुरू होता है यह मेला?
सांपों का यह मेला सिंघिया बाजार के माँ भगवती मंदिर में पूजा-अर्चना से शुरू होता है। भक्त पहले माँ भगवती की पूजा करते हैं, फिर सांपों को टोकरियों में रखकर सिंधिया घाट पहुंचते हैं। वहाँ वे बूढ़ी गंडक नदी में डुबकी लगाते हैं और नाग देवता और माँ विषहरी की विधिवत पूजा करते हैं। पूजा के दौरान भक्त कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांपों को गले में लटकाते हैं, बाजुओं पर लपेटते हैं, और कई बार उन्हें मुंह में दबाकर करतब भी दिखाते हैं।
पूजा के बाद इन सांपों को जंगल में छोड़ दिया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि इस पूजा से विशेष रूप से संतान सुख, वंश वृद्धि और पारिवारिक समृद्धि की मुरादें पूरी होती हैं।
300 साल पुरानी परंपरा
यह मेला लगभग 300 वर्षों पुरानी मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यह नाग देवता और माँ विषहरी के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं खास तौर पर इस मेले में भाग लेती हैं और अपने परिवार के कल्याण के लिए मन्नत मांगती हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे मंदिर में विशेष प्रसाद चढ़ाती हैं।
समस्तीपुर के अलावा खगड़िया, सहरसा, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों से भी लोग बड़ी संख्या में इस मेले में भाग लेने आते हैं। मेले में लगभग एक किलोमीटर लंबी लाइनें लग जाती हैं, जिनमें बच्चे, बुज़ुर्ग, युवा सभी सांपों को गले में डाले दिखते हैं।



Click it and Unblock the Notifications
