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Uttarkashi Tunnel Crash: कौन हैं प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स, जिन्हें कहा जा रहा है सुरंग हादसे का संकटमोचक
Uttarkashi Tunnel Crash: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्कयारा सुरंग के ढहने से 41 मजदुर फंस गए जिन्हें अभी तक निकाला नहीं जा सका है। तमाम कोशिशों के बाद भी सफलता हासिल ना होने पर मजदूरों की जान जोखिम में देखते हुए सरकार ने संकटमोचक के तौर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स से मदद मांगी।
प्रोफेसर डिक्स ने आते ही एक प्लानिंग के तहत काम करना शुरू कर दिया है और आशा की जा रही है की प्रोफेसर डिक्स इन मजदूरों को बचा लेंगे। सोशल मीडिया पर प्रोफेसर डिक्स चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग इनके बारे में जानना चाहते हैं कि ये हैं कौन और इनकी एक्सपरटीज क्या है। तो आइये आपको बताते हैं कौन हैं प्रोफेसर डिक्स।

प्रोफेसर डिक्स इंटरनेशनल टनलिंग अंडरग्राउंड स्पेस के अध्यक्ष हैं और सुरंग सुरक्षा और आपदा जैसी स्थितियों में इनके पास बहुत ज्यादा अनुभव है। वह सुरंग सुरक्षा और आपदा जांच में विश्व स्तर पर एक मशहूर विशेषज्ञ के तौर पर जाने जाते हैं। अपने अनुभव के बलबूते इन्होंने कई जटिल बचाव अभियान का नेतृत्व किया है और सफलता हासिल की है।
तकनीकी विवरणों पर शोध करने और प्रत्येक परियोजना की बारीकियों को सहजता से समझने की अपनी क्षमता के लिए प्रसिद्ध, मौजूदा उत्तरकाशी सुरंग संकट में डिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रोफेसर डिक्स के करियर में कई सफलताएं हासिल हुई हैं जिनसे वो काफी लोकप्रिय हैं। 2011 में, उन्हें टनलिंग, विशेष रूप से टनल अग्नि सुरक्षा में उत्कृष्टता के लिए एलन नेलैंड ऑस्ट्रेलेशियन टनलिंग सोसाइटी द्वारा पुरस्कृत किया गया था।
सुरंगों में अग्नि सुरक्षा कारगर ढंग से काम करे इसके लिए इनके प्रयासों को अभूतपूर्व माना गया है। अभी हाल ही में, 2022 में, उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन द्वारा समिति सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो सुरंग सुरक्षा के लिए कोड और मानकों को विकसित करने में उनकी निरंतर और मूल्यवान सेवा का प्रमाण है।
अब तक क्या है अपडेट
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल में फंसे में 41 मजदूरों को निकालने के लिए जद्दोजहद जारी है। हालांकि, रेस्क्यू के 12 दिन बाद भी एजेंसियों के हाथ खाली हैं। अमेरिकी ऑगर मशीन ने अभी तक करीब 48 मीटर ड्रिलिंग कर 800 एमएम व्यास के पाइप डाले गए हैं। जबकि मजदूर 60 मीटर दूर फंसे हैं। यानी अभी भी मजदूरों को निकालने के लिए 12 मीटर की खुदाई की जरूरत है। इस ओर काम किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि सभी के अथक प्रयास के दम पर बहादुर मजदूरों के सुरंग से बाहर निकलने की सुचना जल्द मिलेगी।
किस तरह के किये गए हैं इंतजाम?
गौरतलब है कि सुरंग में मजदूर कई दिनों से अंदर फंसे हुए है। ऐसे में उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से आघात जरूर हुआ होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए घटनास्थल पर पहले से ही मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध रखी जा रही हैं। इमरजेंसी की स्थिति में एम्बुलेंस भी मौजद हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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