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कौन थे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल? निधन पर PM मोदी ने जताया शोक
Vinod Kumar Shukla Passed Away: हिंदी साहित्य जगत के लिए यह एक बेहद दुखद खबर है। हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था,जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य प्रेमियों, लेखकों और पाठकों में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर साहित्यिक मंचों तक हर जगह उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाला उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

सांस संबंधी समस्याओं से थे परेशान
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विनोद कुमार शुक्ल को सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें दो दिसंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट के दौरान उन्होंने मंगलवार शाम को अंतिम सांस ली।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
हिंदी साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान को आदर हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिए जाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें राज्य का गौरव बताते हुए कहा, 'महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन एक बड़ी क्षति है। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी चर्चित कृतियों से साधारण जीवन को गरिमा देने वाले विनोद जी छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप मे हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे। संवेदनाओं से परिपूर्ण उनकी रचनाएँ पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनके परिजन एवं पाठकों-प्रशंसकों को हार्दिक संवेदना। ॐ शान्ति। '
कौन थे विनोद कुमार शुक्ल?
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था। उन्होंने जबलपुर कृषि महाविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। पेशे से वे प्राध्यापक रहे और अध्यापन के साथ-साथ निरंतर लेखन करते रहे। बीते पांच दशकों से भी अधिक समय तक उन्होंने कविता, उपन्यास और गद्य के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य में अपनी सादगी, सरलता और मानवीय दृष्टि के लिए जाने जाते थे। हिंदी साहित्य में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2024 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था।
उपन्यास पर बनी थी फिल्म
उनकी पहली कविता 'लगभग जयहिंद' वर्ष 1971 में प्रकाशित हुई। उनकी प्रमुख और चर्चित कृतियों में 'नौकर की कमीज', 'खिलेगा तो देखेंगे' और 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' शामिल हैं। उनके उपन्यास 'नौकर की कमीज' पर फिल्मकार मणि कौल ने फिल्म भी बनाई थी। वहीं 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।
विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख कविताएं
लगभग जय हिंद
सब कुछ होना बचा रहेगा
अतिरिक्त नहीं
कविता से लंबी कविता
वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहनकर विचार की तरह
आकाश धरती को खटखटाता है
पचास कविताएं
कभी के बाद अभी
कवि ने कहा - चुनी हुई कविताएं
एक संवेदनशील आवाज का मौन



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