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Wayanad Landslides :केदारनाथ से दार्जिलिंग तक भारत के इतिहास के 5 प्रलयकारी भूस्खलन, जिसने मचाई थी तबाही
five worst landslides in India's history : केरल के वायनाड जिले में आई भारी बारिश के वजह से अचानक से भूस्खलन की वजह से इस इलाके के 151 लोगों की मौत हो गई और अभी भी सैकड़ों लोग गायब हैं और घायल हैं। हालांकि तेज बारिश के बीच भी रेस्क्यू अभियान जारी हैं। इस प्राकृतिक आपदा की तस्वीरें ऑनलाइन वायरल हो रही हैं, जो झकझोर देने वाली हैं। वहीं केरल में राजकीय शौक घोषित कर दिया गया है। वैसे ये पहली बार नहीं है जब भूस्खलन की वजह से इतना बड़ा जान-माल का नुकसान हुआ हैं।
इतिहास में झाकें तो इससे पहले भी जमीन खिसकी हैं और मलबो के ढेर के साथ कई सैकड़ों जान गई हैं। देश इससे पहले भी भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड के वजह से तबाही का मंजर देख चुका हैं। आइए जानते हैं भारत में आए पांच सबसे भयानक लैंडस्लाइड की घटनाओं के बारे में, जिसने कई लोगों को बेघर कर दिया और कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

क्यों भारत में बढ़ रहे हैं भूस्खलन के मामले?
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की माने तो भारत अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से अधिक संवेदनशील हैं। इसरों की तरफ से जारी भारत एटलस तस्वीरों से कुछ स्थानों को सूचीबद्ध किया गया है जिसमें पता चलता हैं कि भारत का लगभग 12. 6 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं। इसमें ज्याादत्तर हिस्से पहाड़ी हैं। देश में लैंडस्लाइड की ज्यादातर घटनाएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, और केरल जैसे पहाड़ी राज्यों में होती हैं।
केरल (2018-2019)
केरल के वायनाड इलाके में लैंडस्लाइड की भयानक घटनाएं पहले भी देखने को मिली चुकी हैं। 2019 में केरल के आठ जिलों में सिर्फ तीन दिन में 80 भूस्खलन की घटनाएं हुईं, इसमें 120 लोग मारे गए थे। वहीरं 2018 में केरल के दस जिलों 341 बड़े भूस्खलन हुए। इसमें से अकेले इडुकी में 143 भूस्खलन आए थे। जिसमें 104 लोगों की मौत हो गई थी।
मलिन गांव, महाराष्ट्र (2014)
30 जुलाई 2014 में पुणे का खूबसूरत मलिन गांव भारी बारिश की वजह से हुए भूस्खलन की वजह से कब्रिस्तान में बदल गया, मलबे में दबने से लगभग 170 लोग की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की भी खबर आई थी। 750 लोगों की आबादी वाला यह गांव गांव करीब 30-35 फीट चौड़े कीचड़ और मलबे में धंसकर रातों-रात गायब हो गया था।

केदारनाथ, उत्तराखंड (2013)
केदारनाथ त्रासदी को सदी की सबसे बड़ी त्रासदी माना जाता है। 2013 में बादल फटने से आई विनाशकारी बारिश और बाढ़ की वजह से भूस्खलन में 5,700 से ज्यादा लोग मारे गए और 4,200 से ज्यादा गांव बह गए, जो देश की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक था। अभी इस केदारनाथ में आए इस विनाशकारी आपदा के निशान मौजूद हैं।
मालपा गांव, उत्तर प्रदेश (1998)
अगस्त 1998 में सात दिनों तक लगातार भूस्खलन आते रहे। इस घटना में 380 से अधिक लोगों की मौत हुई और पूरा का पूरा गांव खत्म हो गया।
दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल (1968)
4 अक्टूबर 1968 दार्जिलिंग-सिक्किम क्षेत्र में हुआ अंबूटिया भूस्खलन भारत के इतिहास के विनाशकारी भूस्खलनों में से एक था। जिसने 60 किमी लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग को 91 हिस्सों में काट दिया। इस आपदा में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए और संपत्ति, बुनियादी ढांचे और चाय के बागानों को काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। इसमें पूरा एक गांव दबकर दफन हो गया था। इसके बाद ये गांव कभी नहीं बसाया गया। बाद में इस गांव को मरे लोगों की याद में स्मारक बना दिया गया।
गुवाहाटी, असम (1948)
सितंबर में भारी बारिश के कारण एक गुवाहाटी में बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें पूरा गांव दफन हो गया और 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।



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