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लैंडस्लाइड क्या हैं? जिसकी वजह से केरल में मची तबाही, क्या करें जब ऐसी सिचुएशन में फंस जाए?
What is a landslide : हरा-भरा स्वर्ग कहे जाने वाला केरल के वायनाड में हुए भारी भूस्खलन की वजह अब तक 143 लोग मर चुके है तो वहीं 100 से ज्यादा लोग लापता हैं और सैकड़ों लोग घायल है, जबकि काफी लोग मलबे में दबे हुए हैं। 200 से ज्यादा घर बह चुके हैं। हालांकि सरकार ने इस इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
मौसम विभाग ने भी वायनाड, कोझिकोड, मलप्पुरम और कसारगोड़ में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया है। तेज बारिश के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में सवाल उठता हैं कि भूस्खलन और इनकी वजह क्या हैं? अगर भूस्खलन जैसी स्थिति बनें तो क्या करना चाहिए?

लैंडस्लाइड क्या है?
लैंडस्लाइड ज्यादात्तर पहाड़ी क्षेत्रों में होते है। यहां पर ढलानों या चट्टानों की मिट्टी अचानक से तेज बहाव में खिसक जाती है और जमीन ढह जाती हैं। इसे ही भूस्खलन या लैंडस्लाइड कहते हैं। यह सब धरती के अंदर होने वाली हलचल की वजह से होता है। बारिश के दिनों में लैंडस्लाइड कई घटनाएं सुनने को मिलती हैं, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान होता है।
लैंडस्लाइड की घटनाएं कहां ज्यादा होती हैं ?
देश में लैंडस्लाइड की ज्यादातर घटनाएं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, और केरल जैसे पहाड़ी राज्यों में होती हैं।
लैंडस्लाइड होने की वजह और प्रकार
लैंडस्लाइड होने के कई कारण होते हैं, यह प्राकृतिक और मानवीय दोनों ही हो सकती हैं। प्राकृतिक कारणों में जहां भूकंप और मूसलाधार बारिश की वजह से भी जमीन और पहाड़ खिसकने लगते हैं। वहीं मानवीय कारण में पेड़ों की कटाई सबसे मुख्य वजह में शामिल हैं। दरअसल, पेड़ की जड़ें मिट्टी और चट्टानों को जमाकर रखती हैं। मगर पेड़ काटने की वजह से चट्टानों की पकड़ ढीली हो जाती है। यही वजह हैं कि लैंडस्लाइड की घटनाएं घटती है और
भूस्खलन की स्थिति में क्या करें और क्या नहीं?
क्या करें?
- मौसम विभाग की जानकारी के बाद कहीं घूमने के बारे में सोचें।
- लैंडस्लाइड के खतरों वाली जगहों पर ना रुकें।
- नालों की साफ-सफाई पर ध्यान दें। कूड़ा इकट्ठा होने पर तुरंत हटाएं, जिससे पानी की निकासी होते रहें।
- पेड़-पौधों का ज्यादा से ज्यादा लगाएं, जिससे चट्टानों की पकड़ मजबूत रहे।
- लैंडस्लाइड का खतरा महसूस होने पर सुरक्षित क्षेत्रों में चले जाएं।
- घायल और फंसे हुए व्यक्तियों की मदद करें।
क्या न करें?
- पहाड़ी इलाको में सोच-समझकर निर्माण क्षेत्र करें और संवेदनशील इलाकों में रहने से बचें।
- बिजली के तार या खंभे को न छुएं।
- खड़ी ढलानों के पास और जल निकासी मार्ग के पास घर न बनाएं।
- नदियों, झरनों, कुओं से सीधे दूषित पानी न पिएं।
- सीधे एकत्रित किया गया बारिश का पानी पी सकते हैं।
- आसपास लैंडस्लाइड की खबरे सुनने के बाद भी डेंजरर्स जोन में न रहें।
इन तरीकों से टाल सकते हैं लैंडस्लाइड के जोखिम
- पहाड़ी इलाके पर घर बनाने से पहले मकान को सही तरीके से नक्शे के साथ बनवाना चाहिए।
- पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीनुमा खेती करने लैंडस्लाइड के खतरे जोखिम कम होता है।
भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में सेंसर और अलर्ट सिस्टम लगाएं।
- वनरोपण और वृक्षारोपण: ढलानों पर पेड़ और झाड़ियां लगाने से बारिश या पानी के तेज बहाव में मिट्टी जल्दी से कटती नहीं है।
- जीआईएस और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर भी इस प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है।



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