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महिला पहलवानों के साथ आईं खाप पंचायतें क्या हैं? कैसे लेती हैं अपने फैसले, जानें डीटेल में
देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों भारतीय महिलाा महिला पहलवानों का जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी है। भारतीय कुश्मी महासंघ के अध्यक्ष पर महिला पहलवानों ने गंभीर आरोपों को लेकर उन पर केस दर्ज करवाया है, लेकिन ब्रजभूषण शरण सिंह को अभी तक पुलिस ने अरेस्ट नहीं किया है, जिसके चलते पहलवानों का प्रदर्शन जारी है।
अब महिला पहलवानों के लिए खाप पंचायतें भी उनके समर्थन में आ गई हैं। वैसे खाप पंचायत कोई नया शब्द नहीं है। पिछले कुछ दशकों में चर्चा में बना हुआ है। और इसकी चर्चा रही इनके तुगलकी फैसलों की वजह से।

खाप पंचायतों के फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दखल दे चुका है। कई बार खाप पंचायतों ने एक गोत्र में विवाह को बैन कर दिया था। वहीं कई बार महिलाओं को लेकर खास ने फैसले किये। चप्पलों से मारने से लेकर सिर मुंड़ाने तक की सजा खास सुनाती है। इतना ही नहीं कोड़े मारने और लोगों को हुक्का पानी बंद करने की सजा भी खाप देती गै।
इन दिनों खाप महापंचायत महिला पहलवानों के साथ खड़ी है। आइये जानते हैं कि महिला पहलवानों के समर्थन में आई यूपी और हरियाणा की खापों के बारें में-
खाप पंचायतें क्या है?
खाप पंचायतें किसी एक गोत्र या बिरादरी से मिलकर खाप पंचायत का निर्माण होता है। वहीं कई गांवों को मिलकर एक खाप पंचायत बनाते है। खाप पंचायतें अपने समूह और गोत्र से संबंधित लोगों को फैसला सुनाती है। खाप पंचायतों में सिर्फ पुरूषों का प्रतिनिधित्व होता है। इसमें महिलाएं शामिल नहीं होती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में खाप पंचायतों ने अपना प्रभुत्व बनाकर रखा हुआ है। इन स्थानों पर इनका खासा प्रभाव देखने को मिलता है। महापंचायत को सर्व खाप पंचायत भी कहा जाता है. जब भी किसी सामूहिक मुद्दे पर फैसला लेना होता है तो कई खापें अपने प्रतिनिधि को शामिल कर सर्व खाप बनाती हैं। ये एक बात साफ कर दे कि ये गांव की चुनी हुई पंचायत से इतर होती है। खाप के मुखिया का फैसला सर्वमान्य होता है। इस वक्त सिर्फ जाटों की 3,500 से ज्यादा खाप पंचायतें मौजूद हैं। वहीं पश्चिमी यूपी में बलियान खाप, बत्तीस खाप, कालखांडे खाप, कलस्यान (गुर्जर) खाप, लाटियान खाप, चौगाला खाप, अहलावत खाप,, राठौड़ (राठी) खाप, देशवाल खाप, गठवाला खाप, पछादा खाप अपना काम कर रही हैं। भारतीय किसान यूनियन बलियान खाप से ही है।
कब शुरू हुई खाप पंचायत
इतिहासकारों के अनुसार, खाप की शुरुआत राजा हर्षवर्धन के शासनकाल से हुई है। सन् 643 में कन्नौज में क्षत्रीय एक साथ जुटे थे, तब हरियाणा सर्वखाप पंचायत की शुरूआत हुई थी।
भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में भूमिका
भारत की आजादी की लड़ाई में भी खापा पंचायतों ने अहम भूमिका अदा की थी। इतिहास के अनुसार, 23 अप्रैल 1857 को मेरठ छावनी में सैनिक विद्रोह हुआ और 10 मई 1857 को पंचायत के वीरों ने अंग्रेजों को गोलियों से भून डाला था । जंगलों में पंचयती सेना और हाथीयाराबन्द अंग्रेजी सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ। जिसमें मोहर सिंह वीर को जीत तो मिली थी।
क्या है कानूनी आधार ?
खाप पंचायतों का कोई कानूनी आधार नहीं होता है। ये गांवों की चुनावों के द्वारा चुनी हुई पंचायत से इतर होती है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा खाप पंचायतों को गैर-कानूनी बताया जा चुका है।



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