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क्या हैं वाटर बियर? जिसे अंतरिक्ष में साथ ले जाएंगे शुभांशु शुक्ला, इसकी खासियत जानें
What Are Water Bears : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला 10 जून को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। Axiom 4 मिशन के तहत इस यात्रा में वह 14 दिन तक स्पेस स्टेशन पर रहेंगे और कई वैज्ञानिक प्रयोगों का हिस्सा बनेंगे। खास बात यह है कि वह अपने साथ एक खास जीव भी लेकर जा रहे हैं - टार्डिग्रेड, जिसे आम भाषा में वाटर बियर कहा जाता है। आइए जानते है आखिर ये रहस्यमयी जीव क्या है और इसकी खासियत क्या है?

कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
शुभांशु शुक्ला दूसरे ऐसे भारतीय होंगे जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचेंगे। इस मिशन में वह केवल यात्री नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी हैं। वह इसरो के निर्देश पर कई प्रयोग करेंगे, जिनका संबंध भविष्य के भारतीय स्पेस मिशन जैसे गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन से है। इन्हीं प्रयोगों में से एक है वाटर बियर यानी टार्डिग्रेड्स से जुड़ा परीक्षण।
क्या है वाटर बियर?
वाटर बियर एक सूक्ष्म जीव है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में टार्डिग्रेड कहा जाता है। यह आकार में केवल 0.5 मिमी का होता है और इसके चार जोड़े पैर होते हैं। हर पैर में 4 से 6 पंजे होते हैं। इसके पास एक विशेष प्रकार का मुख होता है जिससे यह पौधों की कोशिकाओं, शैवाल और अन्य सूक्ष्म जीवों से पोषण प्राप्त करता है।
टार्डिग्रेड्स को 1773 में जर्मन वैज्ञानिक जोहान अगस्त एफ्रेम गोजे ने खोजा था। यह जीव दुनिया के लगभग हर कोने में पाया जाता है, हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर समुद्र की गहराइयों तक। ये सबसे ज्यादा काई, लाइकेन और नम सतहों पर मौजूद पतली पानी की परत में पाए जाते हैं।
क्यों खास है ये जीव?
वाटर बियर को धरती का सबसे मजबूत जीव कहा जाता है। यह किसी भी परिस्थिति में जीवित रह सकता है फिर चाहे वह -273 डिग्री सेल्सियस का ठंडा वातावरण हो या 150 डिग्री सेल्सियस की गर्मी। यही नहीं, यह 40,000 किलोपास्कल तक का दबाव सह सकता है, जो समुद्र की सतह के 4 किमी नीचे के दबाव के बराबर है।
इतना ही नहीं, टार्डिग्रेड्स बिना पानी के वर्षों तक जिंदा रह सकते हैं। यह स्पेस की खतरनाक पराबैंगनी किरणों और रेडिएशन को भी झेलने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इनका अंतरिक्ष में गहन अध्ययन करना चाहते हैं।
क्यों ले जाया जा रहा है स्पेस में?
शुभांशु शुक्ला के साथ इन जीवों को अंतरिक्ष में इसलिए ले जाया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि टार्डिग्रेड्स इतने कठोर वातावरण में कैसे जीवित रहते हैं। इससे हमें भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी जैविक उपाय समझने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, टार्डिग्रेड्स खास किस्म का प्रोटीन बनाते हैं, जिसे साइटोप्लाज्मिक प्रोटीन कहा जाता है। यह प्रोटीन सेल्स को सूखने, गर्मी और रेडिएशन से बचाता है। इस पर रिसर्च करके वैज्ञानिक अधिक टिकाऊ फसलें, शक्तिशाली सनस्क्रीन, और अंगों को सुरक्षित रखने की तकनीकें विकसित कर सकते हैं।



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