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पुरी रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के रथों का क्या होता है? पढ़िए धार्मिक कारण
What Happens Old Chariots After Puri Rath Yatra: पुरी रथ यात्रा न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में श्रद्धा और आस्था का अद्वितीय पर्व है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को भव्य रथों पर सवार कर नगर भ्रमण कराया जाता है। ये रथ श्रद्धालुओं द्वारा खींचे जाते हैं और पूरे उत्सव का केंद्र होते हैं। इस रथ यात्रा में देश-विदेश से भक्त आते हैं। पुरी की जगन्नाथ यात्रा की तैयारी अक्षय तृतीया के दिन से शुरू ह जाती है। रथों को बनाने के लिए शिल्पकार आते हैं और अपना हुनर दिखाते हैं।
हर वर्ष भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के नए रथ बनाए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पुराने रथों का क्या होता है? इस परंपरा के पीछे भी कई धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारण छिपे हैं।

क्या होता है पुराने रथों का?
1. लकड़ी का उपयोग पवित्र कार्यों में किया जाता है
पुरी रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की लकड़ी को शुभ कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है। रथों की लकड़ी को मंदिर का इस्तेमाल महाप्रसाद बनाने में, धार्मिक यज्ञ और अन्य पूजनीय प्रयोजनों में किया जाता है।
2. रथों को तोड़ दिया जाता है
कहा जाता है कि रथों का इस्तेमाल करने के बाद उनकी लकड़ी को तोड़ दिया जाता है। इसके बाद उनका इस्तेमाल जरूरत के कामों में किया जाता है।

3. स्थानीय श्रद्धालुओं में वितरण किया जाता है
ऐसी मान्यता भी है कि रथों की लकड़ी भक्तों को भी दी जाती है। वो लोग इन लकड़ियों को घरों में पूजन सामग्री, लकड़ी के पूजापात्र, या ताबीज जैसे धार्मिक उपयोगों में लाते हैं।

क्यों नहीं किया जाता रथों का पुन: प्रयोग?
ये तो हमें पता चल गया है कि पुरी की जगन्नाथ यात्रा के बाद उनकी लकड़ियों को धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल में लिया जाता है। अब ये भी जान लेते हैं कि आखिर पुराने रथों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता है। इसके पीछे भी कुछ मान्यता है जैसे-
1. हर वर्ष नए रथ बनाना एक परंपरा है जो भगवान के प्रति नई श्रद्धा और ताजगी को दर्शाता है।
2. यह आस्था से जुड़ा है कि भगवान हर वर्ष एक नए रथ में यात्रा करना पसंद करते हैं।
3. रथों की निर्माण प्रक्रिया भी एक धार्मिक अनुष्ठान मानी जाती है, जिसमें कई कारीगर पीढ़ियों से जुड़े हैं।



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