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Uttarkashi Cloudburst: पहाड़ों पर ही क्यों बार-बार फटते हैं बादल? उतरकाशी में चंद पलों में बह गया पूरा गांव
Uttarkashi Cloudburst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव के पास खीरगंगा में मंगलवार, 5 अगस्त दोपहर 1:45 बजे बादल फटने की घटना सामने आई। इस हादसे में पूरा गांव देखते ही देखते बह गया। मकान, बाजार, दुकानें, इंसान और मवेशी सभी बहाव में समा गए। खबरों के मुताबिक अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 50 से ज्यादा लोग लापता हैं। राहत-बचाव के लिए SDRF, NDRF और आर्मी की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में हर साल क्लाउडबर्स्ट की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले एक दशक में इन घटनाओं में डेढ़ गुना बढ़ोतरी हुई है। सवाल यह है कि आखिर पहाड़ों पर इतने बादल क्यों फटते हैं?

क्या होता है बादल फटना?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी सीमित क्षेत्र (20-30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे के भीतर 100 मिमी या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना (Cloudburst) कहा जाता है। यह घटना उस समय होती है जब वायुमंडल में अत्यधिक नमी वाले बादल बहुत घने हो जाते हैं और उनका घनत्व इतना बढ़ जाता है कि वे अचानक फटकर भारी बारिश करने लगते हैं।
कैसे बनते हैं ऐसे बादल?
जब गर्म और नम हवाएं ठंडी पर्वतीय हवाओं से टकराती हैं, तब बड़े आकार के क्यूमुलोनिम्बस बादल बनते हैं। यह बादल ऊर्ध्वाधर दिशा में बढ़ते हैं और इनकी गति को 'ऑरोग्राफिक लिफ्ट' कहा जाता है। पहाड़ों की संरचना के कारण ये बादल एक जगह अटक जाते हैं और फिर एक सीमित क्षेत्र में भारी बारिश कर देते हैं। इन बादलों से न केवल तेज बारिश होती है बल्कि बिजली गिरने, गड़गड़ाहट और मलबा बहने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं।
किस ऊंचाई पर फटते हैं बादल?
वैज्ञानिकों के अनुसार, क्लाउडबर्स्ट की घटनाएं समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर से 2,500 मीटर की ऊंचाई के बीच सबसे अधिक होती हैं। हिमालयी क्षेत्र में अधिकांश गांव और कस्बे इसी रेंज में बसे हुए हैं, इसलिए वहां खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
बढ़ती घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन
विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन इन घटनाओं के पीछे एक बड़ा कारण है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अवैध निर्माण, पर्यटकों की भीड़, वाहनों से निकलने वाला धुआं, प्लास्टिक और कचरा जलाने जैसी मानवीय गतिविधियां जलवायु संतुलन को बिगाड़ रही हैं। परिणामस्वरूप, मानसून के मौसम में बादल ज्यादा नमी लेकर आते हैं और अचानक फट जाते हैं।
कहां से आती है इतनी नमी?
क्लाउडबर्स्ट के लिए जरूरी नमी आमतौर पर पूर्व से चलने वाली हवाओं से आती है, जो गंगा के मैदानी इलाकों से नमी लेकर आती हैं। जब ये हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं, तो बादलों को ऊपर की ओर धकेलती हैं और नमी वाले भारी बादल वहीं अटक जाते हैं, जिससे अचानक बारिश होती है। कभी-कभी उत्तर पश्चिम से चलने वाली हवाएं भी इस प्रक्रिया में सहायक होती हैं।
क्यों होती है इतनी तबाही?
जब बादल फटते हैं, तो भारी बारिश के साथ आने वाला पानी पहाड़ों से तेजी से नीचे की ओर बहता है। यह पानी रास्ते में आने वाली हर चीज़ को अपने साथ बहा ले जाता है, मिट्टी, पेड़, पत्थर, इंसान, पशु सभी। पहाड़ों में ढलान के कारण पानी रुक नहीं पाता, जिससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है।
धराली गांव की हालिया घटना में भी यही हुआ। बाजार, मकान और होटल ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। कई लोग लापता हैं और कई घायल हैं। यहां देखें घटना का वीडियो-
Another video of the disaster shows the floodwaters gushing down, destroying multiple houses and hotels in the region.
— Vani Mehrotra (@vani_mehrotra) August 5, 2025
Many are feared trapped; there may also be casualties. An official confirmation on the same is awaited. #Uttarakhand #UttarakhandRain #Uttarkashi #KhirGanga https://t.co/5OQqNJKMZJ pic.twitter.com/wQptVJek6J
बचाव के उपाय
- मॉनसून के दौरान नदी-नालों और ढलान वाले क्षेत्रों में न रुकें।
- बादल फटने के अलर्ट पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें।
- भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण जरूरी है।



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